राजीव गांधी नवोदय विद्याालय जो प्रत्येक जिला में अभिनव शिक्षा केन्द्र के रुप में विकसित होना था अपनी अव्रूवस्थाओं के कारण उपहा की वस्तु बन गया है और मेधावी बच्चों की प्रतिभा को हत्तोत्साहित करने का संस्थान भी। सन् 2009 में स्थापित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय का अपना स्टाफ, भूमि व भवन नहीं है । सब उधार पर चल रहा है। राजकीय इण्टर कालेज के भवन में बच्चों का आवास है तो राजकीय जूनियर हाई स्कूल में कक्षाऐं चलती हैं और राजकीय प्राथमिक विद्यालय में भोजनालय। एक किमी की दौड बच्चों को पढाई, आवास और भोजन के लिए लगानी होती है।
राजकीय इण्टर कालेजों से व्यवस्था पर नियुक्त प्रधानाचार्य व शिक्षकों के साथ संविदा कर्मी भी परेशान हैं।
राजकीय इण्टर कालेज व राजकीय हाई स्कूलों में 89 दिन का सेवाकाल पूरा करने के बावजूद सरकार ने उन्हें वेतन नही दिया है। वही सर्व शिक्षा अभियान के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को तीन माह वेतन नही मिला है।
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