गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

अजय भट्ट भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मेहनत और योग्यता का पुरस्कार करनी होगी बहुत मेहनत, परीक्षा है यह

              विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और रानीखेत से विधान सभा सदस्य अजय भट्ट को उत्तराखण्ड भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष बनाकर हाई कमान उनकी क्षमताओं को स्वीकार किया है। अगस्त में वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष तीरथसिंह रावत का कार्यकाल पूरा होने के बाद पार्टी को अगला अध्यक्ष चुनने के लिए चार महिने का इंतजार करना पडा। कहें कि अजय भट्ट को पार्टी अध्यक्ष चुने जाने में ठोक बजाकर प्रक्रिया को अंजाम दिया गया होगा।
   वकालत से राजनीति में आये अजय भट्ट का राजनैतिक सफर 1997 में उ प्र विधान सभा के लिए रानीखेत से विधान सभा सदस्य चुने जाने जाने से हुआ। उत्तराखण्ड राज्य गठन के प्श्चात पहली अंतरिम सरकार में वे स्वास्थ्य मंत्री बनाये गये।  उततराखण्ड के पहले विधान सभा चुनाव में रानीखेत की जनता ने उन्हें पुनः विजयी बनाया तो सन् 2007 के दूसरे विधान सभा चुनाव में हार का मुंह देखना  पडा।
 मृदु भाषी और राजनीति की नई पीढी के धुरंधर श्री भट्ट 2012 के विधान सभा चुनाव में विजयी हुए तो एक सीट से सत्ता गवां चुकी भाजपा ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष का ताज दे दिया। सन् 2014 में भाजपा को उततराखण्ड से पांचों सीट दिलाने में भट्ट की परिश्रम कम नही रहा। वे नेता पगतिपक्ष केरुप में लगातार सरकार के लिए परेशानी का सबक बनते और मुद्दों पर तर्कपूर्ण बहस करते। हालांकि विधानसभा में चर्चा की जगह अधिकतर हंगामे ने ले ली है लेकिन अजय भट्ट जिन तर्कों और मुद्दों को उठाते हैं सरकार कुछ समय के लिए ही सही  कठघरे में दिखती है।
  भारतीय जनता पार्टी जो लोकसभा चुनाव के बाद विधान सभा, पंचायत या निकाय चुनाव नही जीती है सन् 2017 के विधान सभा चुनाव से पहले अजय भट्ट को पार्टी की बागडोर थमाकर कांग्रेस को चुनौती देने की स्थिति में आयी है। धडों में बंटी पार्टी को एक जुट करना उनकी सबसे बडी चुनौती होगी। मुख्यमंत्री हरीश रावत से जो राजनीति के धुरंधर खिलाडी हैं के मुकाबले जीतना अजय भट्ट की मेहनत और पार्टी की एक जुटता से ही संम्भव हो सकता है। 

बुधवार, 30 दिसंबर 2015

सण्डे हो या मंडे गुरुजी का लक्ष्य है बच्चे पढें, आदर्श शिक्षक हैं दलजीर्तिसंह बिष्ट


        रविवार हो या कोई छुट्टी का दिन गुरु जी रोज विद्यालय जायेगे, पढायेंगे और अच्छे नम्बरों के टिप्स अपने    विद्यार्थियों को देंगे। हां परिणाम भी है भौतिक विज्ञान जैसे विषय में गुरुजी का परीक्षाफल किसी भी सत्र में 90 प्रतिशत से कम नही रहा। छात्र-छात्राओं को उनकी सलाह होती  है कभी भी और कहीं भी वे पाठ्यक्रम सम्बन्धी समस्या का समाधान उनसे ले सकते हैं।
   राजकीय इण्टर कालेज गैरसैंण के भौतिक विज्ञान प्रवक्ता दलजीतसिंह बिष्ट, उनके लिए रविवार और छुट्टी का महत्व ये है कि उन्होंने आज अपने विद्यार्थियों को क्या पढाया और कैसे वे उन्नति का शिखर छुयें। भौतिक विज्ञान व राजनीति विज्ञान के परास्नातक दलजीतसिंह बिष्ट 1987 में अंशकालिक शिक्षक के रुप में विद्यालयी शिक्षा से जुडे। सन् 1989 में स्थाई सेवा में आये। लाटूगैर, मेहलचैरी, रोहिडा इण्टर कालेजों  अध्यापन के बाद वे वर्तमान में राइका गैरसैंण में कार्यरत हैं।
   श्री बिष्ट शिक्षा के गिरते स्तर के लिए सरकारी नीतियों को जिम्मेदार मानते हैं। वे कहते हैं- सबके लिए समान शिक्षा हो और  सी बी एस ई पाठ्क्रम प्राथमिक स्तर से लागू होना चाहिए।  शिक्षकों पर शिक्षण के अलावा दूसरे कार्यों को बोझ मानते हुए कहते हैं शिक्षा पीढी बनाने की जिम्मेदारी है और एक साथ कई जिम्मेदारियां अव्यवस्था को जन्म देती हैं।
   मूल्यांकन पद्धति में सुधार, प्रत्येक स्तर पर बोर्ड की व्यवस्था के साथ किसी को अनुत्तीर्ण न करने जैसे नियमों में सुधार करना पडेगा। शिक्षकों को भौतिकवादी दृष्टिकोण न अपनाने की सलाह देते हुए दलजीतसिंह कहते हैं हमें छात्र हित में संलग्न रह कर शिक्षा के स्तर और व्यवस्था में परिवर्तन लाना होगा।
    रात-दिन शिक्षा और छात्र हित में सोचने वाले शिक्षक तमाम पुरस्कारों की दौड में पीछे छूट जाते हैं और दलजीतसिंह बिष्ट के साथ भी वही हुआ है। कहना न होगा कि छात्र- छात्राओं के चेहेते शिक्षक को अब तक कोई पुरस्कार नहीं मिला है।

मंगलवार, 29 दिसंबर 2015

क्षेत्र प्रचार निदेशालय ने केन्द्र सरकार की योजनाओं पर आयोजित की जागरुकता रैली क्विज प्रतियोगिता के प्रतिभागिगयों को किया पुरस्कृत


गैरसैंण,
 क्षेत्र प्रचार निदेशालय गोपेश्वर द्वारा केन्द्र सरकार की योजनाऐं-प्रधानमंत्री जन धन, बेटी बचाओ-बेटी पढाओ,स्वच्छता मिशन, बीमा योजना आदि की जानकारी के लिय राजकीय इण्टर कालेज के छात्र-छात्राओं की रैली आयोजित की। जो राजकीय इण्टर कालेज से प्रारम्भ होकर गैरसैंण के विभिन्न मार्गों से होकर सभा में परिवर्तित हो गयी।
 राजकीय इण्टर कालेज में सभा को संबोधित करते हुुए सास्वा केन्द्र के चिकित्सा अधीक्षक डा अमलेशकुमर सिंह ने कहा- कन्या भ्रूण हत्या के परिणाम लिंग भेद को उजागर करते हैं। उनहोंने कहा- उत्तराखण्ड जैसी देवभूमि में लिंग अनुपात नीचे से दूसरे नम्बर पर आना चिन्ताजनक है। उन्होंने स्वास्थ्य कार्यक्रमो और प्रधान मंत्री बीमा योजना की भी जानकारी दी।
  क्षेत्रीय प्रचार अधिकारीजे एस पंवार ने कहा- केन्द्र सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढाआ, जन-धन, राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन सहित सभी योजनाओं की आम जनता में जानकारी के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
  कर्यक्रम में प्रभारी प्रधानाचार्य के एस नेगी, दलजीतसिंह बिष्ट, जी पी द्विवेदी, सोनी खत्री, वी के रावत, एच सी चैहान, सत्येन्द्र चैधरी, पी सी पाण्डे आदि उपस्थित थे।कार्यक्रम में क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।


                                                                 


सोमवार, 28 दिसंबर 2015

सलियाणा वासियों के हिस्से आ रही धूल, भूमि काश्तकारों को वापस दे सरकार


       गैरसैंण, 
उत्तराखण्ड की राजधानी के लिये चर्चित गैरसैण नगर पंचायत के वार्ड एक सलियाणा वासियों के हिस्से अपनी ऊपजाऊ जमीन के बदले धूल आ रही है जिससे ग्रामीण परेशान हैं।ग्रामवासियों ने क्षेत्रीय विधायक डा अनुसूया प्रसाद मैखुरी से जमीन काश्तकारों को लौटाने की मांग की है क्योंकि शिक्षा निदेशालय हेतु दी गयी भूमि पर 23 साल बाद भी शिक्षा निदेशालय नही बना।
     उत्तराखण्ड राज्य की मांग के बीच 19 नवम्बर 1991 को उत्तरप्रदेश की तत्कालीन कल्याण सिंह सरकार के गैरसैण में अपर शिक्षा निदेशालय(पर्वतीय) के तीन मंत्रियों ने गैरसैंण में अपर शिक्षा निदेशालय का उदघाटन किया। उस समय पर्वतीय क्षेत्र (आज के उत्तराखण्ड) के लिये यह शिक्षा विभाग का एकमात्र निदेशालय था।
 निदेशालय हेतू सलियाणा ग्राम वासियों ने अपनी 102 नाली उपजाऊ भूमि मात्र सात हजार रू प्रति नाली के हिसाब से शिक्षा विभाग को दी लेकिन सरकार ने उस जमीन पर अपर शिक्षा निदेशालय तो नहीं बनाया लेकिन पिछले दो सालों से कैबिनेट बैठक तथा अन्य अवसरों पर हैलीपैड के रूप में इसका इस्तेमाल हो रहा है। जबकि पिछले विधानसभा सत्र में विधायकों के टैन्ट इसी जमीन में लगे थे। सलियाणा के ग्रामवासियों ने अपर निदेशालय की भूमि पर शिक्षा निदेशालय बनाये जाने की मांग की है।
      “जिस प्रायोजन के लिये भूमि अधिगृहित हुई है उसे दुसरे प्रयोजन में नहीं लिया जा सकता”  
                                                                 -सभासद दिगम्बर सिंह
    “हमने जमीन विकास के लिये दी थी मात्र धूल उडाने या गाडियों का काफिला सजाने के लिये नहीं।” 
                                                           -पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य हयात सिंह
   “भाजपा की हरकते छल करने की रही हैं उसने तो गैरसैण से अपर शिक्षा निदेशालय भी हटा दिया।”                     
                                                       -कांग्रेस ब्लाॅक अध्यक्ष बृजलाल साह
“कांग्रेस सरकार लोगो की आंखों में धूल झोंक रही है, सलियाणा बैण्ड उसका उदाहरण है।”
                                            -भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुरेन्द्र सिंह नेगी

रविवार, 27 दिसंबर 2015

आपदा घोटालों की निष्पक्ष जांच हो


   मुुख्यमंत्री हरीश रावत ने आपदा में 1509 करोड रु की केन्द्रीय सहायता का हिसाब न मिलने पर सेवानिवृत जज से जांच कराने की घोषणा का स्वागत किया जाना चाहिए। उत्तराखण्ड में सन् 2013 में आयी आपदा जितनी अभूतपूर्व थी उत्तराखण्ड की राजनीति और नौकरशाही को देखते हुए उसमें घोटालों की संभावना उतनी ही प्रवल रहीं। पहली किश्त के आरोपों को विपक्ष उतनी गम्भीरता से नही सामने ला पाया और सरकार उसे बहुत आसानी से पचा गयी।
   अब जो केन्द्रीय सहायता और राज्य सरकार के हिसाब-किताब में  1509 करोड रु का अन्तर है उस पर मुख्य मंत्री की उक्त प्रतिक्रिया का स्वागत करते हुए अंजाम तक पहुंचने की मांग की जानी चाहिए। हम आशा करेंगे कि घोटाले की जांच सही और तह तक पहुंचने वाली हो और कही से कहीं तक ये न लगे कि जांच समिति किन्ही तथ्यों को नजरअंदाज कर रही है।
   हमने वीरेन्द्र दीक्षित जैसे आयोग देख लिए हैं जो राजधानी स्थल चयन के नाम पर गैरसैंण को नकारने के एकसूत्री फार्मूले पर काम कर रहे थे। ताज्जुब तो ये है कि सरकार की कमी को उजागर करने के नैतिक कर्तव्य के विपक्ष ने पहले और दूसरे किश्त के आरोप नही लाये, इन्हें सामने लाने का श्रेय जन सूचना अधिकार कानून को है और आर अी आई कार्यकर्ता लोक सूचना के आधार पर आपदा घोटालों को सामने लाये हैं।
  भाजपा जहां कथित घोटाले की सीबीआई जांच की मांग कर रही है वही मुख्य मंत्री ने आलोच्य राशि केन्द्र द्वारा न दिए जाने का आरोप मढ दिया है इससे यह सांप-नेवले की लडाई बन गयी है और असली मुद्दा दब जाने की संभावना बन रही है।
   आर टी आई एक्टीविस्ट और  उत्तराखण्ड की जुझारु शक्तियों को पुरजोर तरीके से जांच और उसके परिणाम की मांग उठानी चाहिए। उत्तराखण्ड भाजपा- कांग्रेस का जरखरीद प्रदेश नही है और 15 साल राज्य पर भारी पडे हैं।

टैटुडा में भैरव पूजा सम्पन्न




गैरसैंण, 
  तहसील गैरसैंण के टैंटुडा माईथान में 3 दिवसीय कालनाथ भैरव पूजा सम्पन्न हुई। जिसमें क्षेत्र के लगभग चार हजार लोगों ने प्रतिभाग किया। प्रत्येक 12 वर्ष में इस पूजा को आयोजन होता है। इस पूजा में क्षेत्र के कई श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग किया।
    इस अवसर पर सीएचसी गैरसैंण ने अधीक्षक ए के सिंह के नेतृत्व में स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किया गया जिसमें लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण के साथ दवाईयां वितरित की गई।  

शनिवार, 26 दिसंबर 2015

उत्कृष्ट है नवल त्रैमासिक का अक्टूबर-दिसम्बर 15 अंक


          साहित्य समाज व संस्कृति की त्रैमासिक पत्रिका नवल का अक्टूबर-दिसम्बर15 अंक उपलब्ध है।रामनगर उत्तराखण्ड से प्रकाशित नवल उन चुनींदा पत्र-पत्रिकसओं में से है जो उद्देश्य परक पत्रकारिता में विश्वास करते हैं। संपादक हरि मोहन मोहन संपादकीय में राज्य की दशा-दिशा के भटकाव को सरकार राजनैतिक दलों विखरे विरोधों और राज्य आन्दोलनकारियों की असफलता के रुप में लिया है। भूमि के माफिया आवटंन, राजधानी और सत्ता की बन्दरबांट को मुद्दा बनाया गया है।
  इतिहास, संस्मरण,आलेख, कविता,कहानी, एकांकी,शोधपत्र, कविता पोस्टर और पुस्तक समीक्षा को 40 पृष्ठों की उपयोगी पत्रिका बनाने में संपादक सफल रहे हैं। मुखपृष्ठ उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध कवि, विचारक व चित्रकार मौलाराम का है।
  इतिहास में डा मदन चन्द्र भट्ट का लेख- उत्तराखण्ड के इतिहास की एटकिंसन समस्या, संस्मरण में वीणापाणी जोशी- लेखनयात्रा अंगुलियों से कम्प्यूटर तक, आलेख   डा गोपालराम आर्य-हिन्दी दलित साहित्य आन्दोलन का स्वरुप एवं विकास व डा तेजपालसिंह- लांक-परम्पराका मांगलिक प्रतीक-पंचांगगुणांक, हैं।
 कविता मे सीताराम गुप्ता, देवीरागरानी व प्रो मनु महरान की गजल, टीकमसिंह प्रजापति- दोहम, डा अजय जन्मेन्जय-तारे निकले, प्रभु दयाल श्रीवास्तव-हथनी दीदी,  जगन्नाथ‘विश्व‘-धूप छांव सा रिश्ता, बालविहारी प्रजापति-ये आदमी, के सी सकलानी- कै तें याद नि आंदी, गोविन्द बल्लभ बहुगुणा- बखत बखत की बात, डा हरीश चन्द्र शाक्य-सुगति छनद व शिवप्रसाद राजभर की कुण्डिलियां हैं। कहानी  धनसिंह मेहता- आखेट, खुशालसिंह खनी-आखेछ, मनजीत शर्मा-घिन्नैट, आनन्द बिल्थरे-पुल का प्रेम व डा प्रयाग जोशी- संतरे मीठे लडकी डूबी हैं।
  कविता पोटर महावीर रवांल्टा की कविता पर बी मोहन नेगी ने बनाया है। हरीशचन्द्र सनवाल की एंकांकी-मनुष्य का आतेक व शोध पत्र डा भगवती प्रसाद पाठक-बहम् राजवंश का समकालीन देवता मोष्टा तथा पुस्तक समीक्षा डा जी सी पंत ने कृष्ण चन्द्र‘कपिल के कविता संग्रह दरख्तों के के साये में की है।
   अंक हर बार की तरह उकृष्ट और पठनीय है।  

शुक्रवार, 25 दिसंबर 2015

पेेशावर विद्रोह के अमर नायक वीर चन्द्रसिंह गढवाली और साथियों को नमन


पेशावर में 23 अप्रैल 1930 को काबुल में निहत्थे खुदाई खिदमतगार आन्दोलनकारी पठानों पर गोली न चलाने का आदेश देने वाले वीर चन्द्रसिंह गढवाली को आज 125 वां जन्म दिन है। पौडी जिला के मासोंसेरा गांव में श्री जाथलीसिंह के सुपुत्र चन्द्रसिंह भण्डारी  का जन्म 25 दिसम्बर 1891 को हुआ था।  निहत्थे आन्दोलनकारियों पर  गोली न चलाने का निर्णय इतिहास  की अद्वितीय घटना बन गयी और आनन-फानन में ब्रिटिश अधिकारियो नें एबटाबाद में 67 गढवाली सैनिकों और जूनियर कमीशंड आंफीसर पर मुकदमा चलाया जिनमें से 63 को सजा हुई। कोर्ट मार्शल में वीर चन्द्रसिंह गढवाली को तीन सजा हुई-क्वार्टर मास्टर हवालदार से पदावन्नत कर सिपाही, फौंज से बर्खास्तगी और कालेपानी की सजा, जो सबसे अधिक थी।
  वीर चन्द्रसिंह गढवाली के 125 वें जन्म दिन पर वीर चन्द्रसिंह गढवाली और उनके क्रान्तिकारी साथियों को नमन, श्रद्धासुमन।
   

बुधवार, 23 दिसंबर 2015

गरीब को लूट लो मार दो और फिर हडताल कर दो, वाह रे तंत्र!


हल्द्वानी के निजी सेंट्रल अस्पताल में मरीज की मृत्यु के बाद हुए घपले में डाक्टर की पिटाई से निजी अस्पतालों के साथ सरकारी डाक्टर भी हडताल पर चले गये। मरीज के परिजनों पा सीनियर कार्डियोलांजिस्ट की पिटाई का आरोप है। मार-पिटाई , हिंसा निन्दनीय है और यदि डाक्टर पीटा गया जो मरीज की जान लेने का जिम्मेदार है तो भी भीड को कानून हाथ में लेने का अधिकार नही होना चाहिए।
  डाक्टर भगवान नहीं है और मरीज के लिए वह भगवान से कम भी नहीं है। प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी और लूट आये दिन सुर्खियां बनती रही हैं। 62 वर्षीय रतनसिंह चल कर अस्पताल आता है और  अस्पताल में मर जाता है। परिजन अस्पताल की लापरवाही बताते हंगामा करते हैं और डाक्टरों की पिटाई लगा देते हैं। दूसरे दिन से डाक्टर और निजी चिकित्सालय हडताल पर चले जाते हैं और तीसरे चैथे दिन डाक्टरों की यूनियन भी हडताल का आह्वान कर देती है। भाई लोग आप साधन सम्मपन्न हैं मरीज को 50 से कम की फीस पर भर्ती नही करते और आपरेशन के जितने मांगों वह देना मरीज के परिजनों की मजबूरी है। पात्र और घटनास्थल बदल सकते हैं लेकिन स्थितियां सब जगह एक हैं।
    अब्बल तो सेंट्रल हांस्पिटल सरकारी सा नाम देना ही ठगी सा लगता है। मरीज के परिजनों को एंजियोग्राफी के बाद यदि आपरेशन की बात कही गयी तो पहले आपरेशन कैसे हुआ? यदि हुआ तो वह मरीज को बचाने के लिए होना चाहिए मारने के लिए नही। मरीज के परिजनों ने जो अपराध किया है उसकी सजा उन्हें मिलनी चाहिए। उनकी यह सजा कम नही है कि वे एक जिन्दा इंसान को अस्पताल लाये और मुर्दे को ले गये। फिर भी यदि सफेद कांलर में मौत कालाधन्धा करने वाले लोग और सफेद कोट धारी चाहते हैं उन्हें सजा हो तो होनी चाहिए। लेकिन एक जिन्दा इंसान को मुर्दा बनाने वालों की सजा क्या हो यह कौन तय करेगा? निश्चित रुप से वे लोग तो नहीं जो इंसानों की जिन्दगी से खेल रहे हैं, इनमें सरकार और वे नेता भी हैं जिनकी पेरोकारी से उत्तराखण्ड के सरकारी अस्पताल पी पी पी मोड के कसाईखने बन गये हैं। सरकार से करोडों रु डकारो और कोई भी विशेषज्ञ चिकित्सक न रखकर अस्पताल को रिफर सेंटर बना दो, जनता मरे-बचे उसका भाग्य, और तुम्हारा एम ओ यू कामधेनु है और पैसा तुम्हारी जेब में जाने को बेताब है।
   हम बार-बार कहेंगे कि कानून हाथ में लेना गैरकानूनी है। बडी हसरत से परिजन प्रसव के लिए प्रसूता को सरकारी अस्पताल ला रहे हैं जिसको प्रोत्साहित करने का ढोंग सरकार भी बखूबी करती है और अस्पताल में डाक्टर की लापरवाही से जच्चा या बच्चा या दोनों नहीं रहते, परिजन किसे कहें? जिसके भरोसे वे अस्पताल आये वही कातिल है। जब डाक्टर और अस्पताल के संचालक कातिल हो जाते हैं उनकी सजा क्या है? सफेद कपडों का काला कारनामा तब हडताल पर ही जायेगा। ऐसी हडतालों के उन कसाईखानों पर ताले जडने चाहिए जो मरीज के जीवन से खिलवाड बन गये।
   सोचिये डाक्टर! आप आसमान से उतरे फरिस्ते नही हैं आपको डाक्टर जैसे भगवान का अवतार बनाने में इस देश और देशवासियों का बेशकीमती संसाधन जाया हुए हैं। हो सकता है और है भी कि आप में से बहुत सारे लोग बहुत अच्छा काम करते हैं गरीब-गुरुवों की निःशुल्क सेवा करते हैं लेकिन अपने बीच छिपे शैतानों को चिन्हित करना भी आपकी जिम्मेदारी है और जो पेशा कलंकित हो जाता है उसे प्रतिष्ठा मिलने में बहुत समय लगता है। इसलिए हडताल में जाने के बजाय सोचो कि मरीज आपके यहां से मुर्दा नही स्वस्थ जाये।  

सोमवार, 21 दिसंबर 2015

तहसील में धरना प्रारम्भ, पीउमजीएसआरवाई द्वारा 5 जनवरी से संरेखण व सर्वे कार्यप्रारम्भ करने का लिखित आश्वासन कार्य प्रारम्भ न हुआ तो 6 जनरी से आमरण अनशन की चेतावनी



गैरसैंण, 
syuni मल्ली के ग्रामवासियों ने दो दशक से लम्बित मोटर मार्ग की मांग को लेकर तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और वहां धरने पर बैठ गये। सायं ब्लाक प्रमुख सुमति बिष्ट, जीएमवीएन निदेशक सुरेशकुमार बिष्ट,  ग्राम प्रधान लीलादेवी, राजस्व निरीक्षकविश्वम्भरदत्त कुकरेती, पीएमजीएसवाई एई सचिनकुमार प्रदीप नौटियाल के साथ हुई लिखित समझोते के बाद धरना समाप्त हुआ। जिसमें पीएमजीएसवाई अधिकारियों ने 5 जनवरी से पहले संमरेखण व सर्वे कार्य प्रारम्भ करने का लिखित आश्वासन दिया।ग्रामवासियों ने कहा- 5 जनवरी से यदि कार्य प्रारम्भ नही हुआ तो 6 जनवरी से आमरण अनशन किया जायेगा। 
    बडी संख्या में तहसील से 15 किमी दूर से आये स्यूणी मल्ली के सैंकडों लोगों ने मोटर मार्ग की मांग को लेकर गैरसैंण में प्रदर्शन किया और तहसील कार्यालय का घेंराव करते हुए वहां धरनंे पर बैठ गये।  सभा को संबेधित करते हुए उप प्रधान जसवन्तसिंह ने कहा-उपजिलाधिकारी को तीन दिन पहले धरना-प्रदर्शन का नोटिस देने के बावजूद किसी सक्षम अधिकारी का तहसील में न होना ग्रामवासियों की उपेक्षा  का प्रमाण है। उन्होंने कहा- पी एम जी एस आर वाई के सहायक अभियंता ग्रामवासियों से बात करने को तैयार नहीं हैं। इससे बडी गैरजिम्मेदारी क्या हो सकती है कि वे ग्राम ग्रामवायिों के प्रस्ताव को खो जाने की बात कह रहे हैं।
  पूर्व प्रमुख सुरेन्द्रसिंह नेगी ने कहा- स्यूणी मल्ली में मोटर मार्ग की मांग अनसुनी कर सरकार ग्रामवासियों से धोखा कर रही है। उन्होंने कहा- हम पूरी तरह आन्दोलन के साथ हैं।
प्रदर्शन व धरने का नेतृत्व ग्राम प्रधान नीनादेवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य माहेश्वरी देवी, महिला मंगलदल अध्यक्ष लीलावती देवी, उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी बसन्तीदेवी, सामाजिक कार्यकर्ता धीरजसिंह, जमनसिंह बिष्ट, पदमसिंह, खीमसिंहजसपालसिंह आदि कर रहे थे।  




रविवार, 20 दिसंबर 2015

गिर्दा को समर्पित- पहाड़ 19 गिर्दा के आयाम

         गिरीश तिवा्डी ‘गिर्दा‘ विराट व्यक्तित्व, सामान्य व्यक्ति और मयालू अपना सा गिर्दा उनके बारे में जितना कुछ कहा-लिखा-पढा जाय कम है। गिर्दा को समर्पित पहाड 19 आठ भाग में है।  संपादक डा शेखर पाठक ने पहाड की आंर से दो संपादकीय लेख ‘सबसे अलग‘ व ‘गिर्दा के अलावा‘ लिखे हैं। पहले भाग संस्मरण हैं- चिरंजीव गिरीश-चारु चन्द्र पाण्डे, 1977 के बहाने गिर्दा की याद-चंडी पगसाद भट्ट, जरा उस तरह से देखना-नवीन जोशी, मेरे नानू मामा-रमेशचन्द्र मिश्र, गिर्दा नाराज मत होना-गोविन्द पंत ‘राजू‘, वह तो अजात शत्रु था-महेश पाण्डे, तुम्हारे समय को सलाम-देवेन मेवाडी, बिखर गये ज्यौंला मुरुली के स्वर- नरेन्द्रसिंह नेगी सहित 22 आलेख हैं।
 भाग दो समीक्षा है जिसमंे- मुक्ति का सागर-मंगलेश डबराल, गिर्दा की सृजन यात्रा- कपिलेश भोज, पानी का फर्श काठ का तकिया व लोक नाटकों के बहाने- जहूर आलम, हमीं से तुम्हारा कफन सा बुना है-प्रयाग जोशी, लोक को मुख्य धारा की बहस बनाने की जद्दोजेहद-बटरोही, कोलाहल से गीत और गीतों से कोहराम-महेश चन्द्र पुनेठा, गिर्दा और उसकी कविताः कुछ टूटी कुछ बिखरी- वीरेन डंगवाल,गिर्दा का गद्य-राजीव लोचन साह, सांझ का रतमोलिया कवि-अनिल कार्की के लेख हैं।   
   भाग तीन - कुछ कुछ मूल्यांकन, चैथा- विशेष और पांचवा कविताओं का है। जिसमें गिर्दा आने को हैं-राजेश सकलानी,नींद से बाहर-शिरीष कुमार मौर्य,मेरे मास्साब-हरीश पंत, पिता-दिनेश उपाध्याय, गिर्दा तुम कब आओगे- दिनेश तिवारी सहित 14 कविताऐं हैं। छठा भाग शताब्दी संस्मरण, सातवां श्रद्धांजली और आठवां प्रकाशन का है।
   पुस्तक का आवरण प्रसिद्ध फ्रांसिसी चित्रकार कैथारीन कानफिनो-अडोर का है तो रेखांकन एकेश्वर हटवाल, मुकुल तिवारी, रोहित जोशी, विश्वम्भरनाथ साह ‘सखा‘ व हरिपाल त्यागी के हैं। डा रघुवीर चन्द द्वारा पहाड के लिए प्रकाशित पुस्तक में संपादक मण्डल ने बहुत परिश्रम किया है और पूर्ववर्ती प्रकाशनों की तरह एक बार पुनः सार्थक अंक पाठकों के सामने है।
 लगभग 400 पृष्ठों की पुस्तक गिर्दा के बारे में काफी जानकारी व समझा देती है। पुस्तक उपयोगी एवं संग्रहणीय है।
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शनिवार, 19 दिसंबर 2015

हम शर्मिन्दा हैं कि शहीदों के स्व्प्नों का राज्य नही बना पाये




     गैरसैंण राजधानी का सवाल लगता है कांग्रेस-भाजपा दोनों पचा चुके हैं। 2-3 नवम्बर के गैरसैंण विधानसभा के फ्लाप सत्र के बाद न तो सरकार, न विधान सभा अध्यक्ष और न ही नेता प्रतिपक्ष गैरसैंण मुद्दे पर मुखर हैं। रीजनल रिपोर्टर सहित उत्तराखण्ड के स्थानीय मीडिया में सरकार व विपक्ष की दोमुंही नीति का खुलासा होने के बाद जनता के भ्रम की स्थिति समाप्त हो गयी है। देहरादून के रायपुर में विधानभवन व सचिवालय बनाने, उसके लिए 25 करोड रु अवमुक्त होने और निर्माण का खर्च फिलहाल सिडकुल से लेने के निर्णयों के खुलासे ने जनभावना का मुखौटा ओडे मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और विधान सभा अध्यक्ष को बेनकाब कर दिया है।
     उत्तराखण्ड जैसे संसाधन विहीन राज्य जिसकी हर जरुरत के लिए केन्द्र का मुंह ताकने की मजबूरी है प्रदेश में तीन-तीन विधान भवन बनाने का निर्णय अदूरदर्शी ही नही राज्य हितों के खिलाफ है और राज्य अवधारणा को अंगूठा दिखाने वाला भी।
    विश्व प्रसिद्ध शहर जिसकी आबोहवा, नफासत, गन्ध-सुगन्ध, बासमती और लीची, शैक्षिक संस्थान और भरी-पूरी सुविधाओं पर नेता, माफिया और नौकरशाहों की नजर भला क्यों नही होती? 9 नवम्बर 2000 को देहरादून में घुसपैठिये की तरह उत्तराखण्ड की अन्तरिम सरकार ने जो घुसपैठ की उसे स्थायी बनाने की हर सरकार ने पुरजोर कोशिश की है। वह चाहे कांग्रेस की नारायणदत्त तिवारी की सरकार हो या कडक फौजी भाजपा के भुवनचन्द्र खण्डूडी या तेजतर्रार रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुण और हरीश रावत भी उन्ही परिकल्पनाओं, परिदृश्यों और परिपाटी के शिकार हैं जो राज्य अवधारणा के खिलाफ हैं।
   उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन से लेकर कौशिक समिति तक और बाबा मोहन उत्तराखण्डी की शहादत  से लेकर दीक्षित आयोग तक जनभावना गैरसैंण के पक्ष में है। मुखर रुप से काबिनामंत्री इंदिरा हृदयेश और हरकसिंह रावत देहरादून को राजधानी बनाने की वकालत कर रहे हैं। उततराखण्ड राज्य आन्दोलन में दोनों ही सकारात्मक भूमिका में नही थे। ये तो उत्तराखण्ड राज्य का अपना भाग्य है कि अपनी लाश पर उत्तराखण्ड देखने वाले नारायण दत्त तिवारी पहली निर्वाचित सरकार के मुख्य मंत्री बन गये। तब राज्य की दशा-दिशा उल्टी ही तो होनी थी और हुई है।
   उत्तराखण्ड राज्य को लेकर कांग्रेस- भजपा का कभी कोई कांसैप्ट नही रहा यदि रहा होता तो अपनी लिखी पुस्तिका में राज्य की राजधानी गैरसैंण बनाने की वकालत करने वाले भगतसिंह कोश्यारी को मुख्यमंत्री बनते ही राजधानी मुद्दा जैसी सोच नही बनानी पडती। कांग्रेस राज में मुजफ्फरनगर जैसे विभित्स  कांड पर मुंह-कान-आंख बन्द कर लेने वाली कांग्रेस फिर-फिर सत्ता में लौटती है तो राज्य अवधारणाऐं उलट कर ही आयेंगी।
  2017 का चुनाव महत्वपूर्ण है और उत्तराखण्ड में तीसरी ताकतों का बिखराव पुरानी कहानी दोहरा सकता है। अर्थात राज्य अवधारणाओं के सफाये की यह तैयारी होगी। शहीदों के बलिदान की व्यर्थता का उत्तराखण्ड गवाह बनेगा। रीते हो चुके गांव-घरों से लोग पलायन कर चुके हैं नेतओं ने अपनी ठौर बना ली है फिर अवधारणाओं व शहादतों का क्या है? शहीदो हम शर्मिदा हैं हम आपके सपनों का राज्य नही बना पाये हैं।      
पुरुषोत्तम असनोड़ा 

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2015

मोटर मार्ग की मांग पर स्यूणी मल्ली का 21 को तहसील मुख्यालय पर प्रर्दशन 12 सालों से हो रहे सर्वे से तंग आ चुके हैं ग्रामवा


गैरसैंण,
       तहसील गैरसैंण का स्यूणी मल्ली गांव, प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर, खांकर देवता की प्रसिद्ध जात  और कर्मयोगी शिक्षक घनश्याम ढौंडियाल की कर्मस्थली, गैरसैंण-नैनीताल मोटर मार्ग से सीधी चढाई पर 4 किमी दूर गांव में सफाई और सहयोग का वर्षों पुरानी परम्परा। उपजाऊ खेती के साथ बहुत कम पलायन। गांव में सडक के अलावा कमोवेश सुविधाऐं हैं  लेकिन पहाड में बडी से बडी असुविधा यातायात का न होना है जिसके लिए सडक चाहिए और स्यूणी मल्ली के लिए सडक ही नही है।
   सन्2002-03 में आगरचट्टी से स्यूणी के लिए मोटर मार्ग का सर्वे हुआ। पूर्व प्रधान देवसिंह कहते हैं उससे पहले गैरसैंण-रीठिया-स्यूणी मल्ली- स्यूणी तल्ली- मोटिया पुल मोटर मार्ग स्वीकृत हुआ था लेकिन वन अधिनियम ने सडक की राह रोक ली।  2002-03 के सर्वे के बाद ग्रामीणों को लगा अब शायद सडक आ जायेगी। 12 साल में दो पार्टियों की तीन सरकार और पांच मुख्य मंत्री आ गये लेकिन नही आयी तो स्यूणी मल्ली के लिए सडक।
    लोनिवि इस मोटर मार्ग निर्माण को प्रधान मंत्री ग्राम सडक योजना बताता है तो पीएमजीएसआरवाई अपने पास स्यूणी मल्ली मोटर मार्ग के कोई पत्राजात होने से ही इंकार करता है। 16 सितम्बर 2015 को उपजिलाधिकारी गैरसैंण द्वारा अधिषासी अभियंता लोनिवि व पीएमजीएसआरवाई को लिखे पत्र में  उनकी कार्य शैली का उल्लेख है। ग्रामीणों ने चुनाव वहिष्कार की धमकी दी है।
     ग्राम प्रधान लीलादेवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य माहेश्वरीदेवी, उपप्रधान जसवन्तसिंह, मंमद अध्यक्ष लीलावती, युमंद अध्यक्ष जसपालसिंह सहित ग्रामवासियों ने कहा- 21 दिसम्बर को तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया जायेगा और यदि फिर भी मोटर मार्ग का निर्माण नही हुआ तो ग्रामीण अनशन और चुनाव बहिष्कार करेंगे।
मोटर मार्ग की मांग पर स्यूणी मल्ली का 21 को तहसील मुख्यालय पर प्रर्दशन
12 सालों से हो रहे सर्वे से तंग आ चुके हैं ग्रामवासी
गैरसैंण, 18 दिसम्बर, तहसील गैरसैंण का स्यूणी मल्ली गांव, प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर, खांकर देवता की प्रसिद्ध जात  और कर्मयोगी शिक्षक घनश्याम ढौंडियाल की कर्मस्थली, गैरसैंण-नैनीताल मोटर मार्ग से सीधी चढाई पर 4 किमी दूर गांव में सफाई और सहयोग का वर्षों पुरानी परम्परा। उपजाऊ खेती के साथ बहुत कम पलायन। गांव में सडक के अलावा कमोवेश सुविधाऐं हैं  लेकिन पहाड में बडी से बडी असुविधा यातायात का न होना है जिसके लिए सडक चाहिए और स्यूणी मल्ली के लिए सडक ही नही है।
   सन्2002-03 में आगरचट्टी से स्यूणी के लिए मोटर मार्ग का सर्वे हुआ। पूर्व प्रधान देवसिंह कहते हैं उससे पहले गैरसैंण-रीठिया-स्यूणी मल्ली- स्यूणी तल्ली- मोटिया पुल मोटर मार्ग स्वीकृत हुआ था लेकिन वन अधिनियम ने सडक की राह रोक ली।  2002-03 के सर्वे के बाद ग्रामीणों को लगा अब शायद सडक आ जायेगी। 12 साल में दो पार्टियों की तीन सरकार और पांच मुख्य मंत्री आ गये लेकिन नही आयी तो स्यूणी मल्ली के लिए सडक।
    लोनिवि इस मोटर मार्ग निर्माण को प्रधान मंत्री ग्राम सडक योजना बताता है तो पीएमजीएसआरवाई अपने पास स्यूणी मल्ली मोटर मार्ग के कोई पत्राजात होने से ही इंकार करता है। 16 सितम्बर 2015 को उपजिलाधिकारी गैरसैंण द्वारा अधिषासी अभियंता लोनिवि व पीएमजीएसआरवाई को लिखे पत्र में  उनकी कार्य शैली का उल्लेख है। ग्रामीणों ने चुनाव वहिष्कार की धमकी दी है।
     ग्राम प्रधान लीलादेवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य माहेश्वरीदेवी, उपप्रधान जसवन्तसिंह, मंमद अध्यक्ष लीलावती, युमंद अध्यक्ष जसपालसिंह सहित ग्रामवासियों ने कहा- 21 दिसम्बर को तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया जायेगा और यदि फिर भी मोटर मार्ग का निर्माण नही हुआ तो ग्रामीण अनशन और चुनाव बहिष्कार करेंगे।
मोटर मार्ग की मांग पर स्यूणी मल्ली का 21 को तहसील मुख्यालय पर प्रर्दशन
12 सालों से हो रहे सर्वे से तंग आ चुके हैं ग्रामवासी
गैरसैंण, 18 दिसम्बर, तहसील गैरसैंण का स्यूणी मल्ली गांव, प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर, खांकर देवता की प्रसिद्ध जात  और कर्मयोगी शिक्षक घनश्याम ढौंडियाल की कर्मस्थली, गैरसैंण-नैनीताल मोटर मार्ग से सीधी चढाई पर 4 किमी दूर गांव में सफाई और सहयोग का वर्षों पुरानी परम्परा। उपजाऊ खेती के साथ बहुत कम पलायन। गांव में सडक के अलावा कमोवेश सुविधाऐं हैं  लेकिन पहाड में बडी से बडी असुविधा यातायात का न होना है जिसके लिए सडक चाहिए और स्यूणी मल्ली के लिए सडक ही नही है।
   सन्2002-03 में आगरचट्टी से स्यूणी के लिए मोटर मार्ग का सर्वे हुआ। पूर्व प्रधान देवसिंह कहते हैं उससे पहले गैरसैंण-रीठिया-स्यूणी मल्ली- स्यूणी तल्ली- मोटिया पुल मोटर मार्ग स्वीकृत हुआ था लेकिन वन अधिनियम ने सडक की राह रोक ली।  2002-03 के सर्वे के बाद ग्रामीणों को लगा अब शायद सडक आ जायेगी। 12 साल में दो पार्टियों की तीन सरकार और पांच मुख्य मंत्री आ गये लेकिन नही आयी तो स्यूणी मल्ली के लिए सडक।
    लोनिवि इस मोटर मार्ग निर्माण को प्रधान मंत्री ग्राम सडक योजना बताता है तो पीएमजीएसआरवाई अपने पास स्यूणी मल्ली मोटर मार्ग के कोई पत्राजात होने से ही इंकार करता है। 16 सितम्बर 2015 को उपजिलाधिकारी गैरसैंण द्वारा अधिषासी अभियंता लोनिवि व पीएमजीएसआरवाई को लिखे पत्र में  उनकी कार्य शैली का उल्लेख है। ग्रामीणों ने चुनाव वहिष्कार की धमकी दी है।
     ग्राम प्रधान लीलादेवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य माहेश्वरीदेवी, उपप्रधान जसवन्तसिंह, मंमद अध्यक्ष लीलावती, युमंद अध्यक्ष जसपालसिंह सहित ग्रामवासियों ने कहा- 21 दिसम्बर को तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया जायेगा और यदि फिर भी मोटर मार्ग का निर्माण नही हुआ तो ग्रामीण अनशन और चुनाव बहिष्कार करेंगे।

गुरुवार, 17 दिसंबर 2015

वीरों की भूमि है गैरसैंण- 53 जांवाज हुए हैं शहीद शहीदों की याद में कोई स्मारक नहीं

गैरसैंण,
, सन् 1971 के युद्ध मे शानदार विजय और  विश्व के नक्शे पर बंग्लादेश नामक नये राष्ट्र के उदय की महत्वपूर्ण घटना हमारी सेनाओं के बलिदान और शौर्य का प्रतीक था। इस लडाई में गैरसैंण क्षूत्र  के 9 सैनिकों ने अपना सर्वोच्च बलिदान कर भरत की विजय में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। डोल्टू निवासी राइफलमैन मकरसिंह को अद्वितीय शौर्य के लिए मरोणोपरान्त महावीर चक्र से नवाजा गया।ं
   नायक धर्मसिंह बच्छुवाबाण,रा मै गोबिन्दसिंह रावत फरसों, रा मै बलवन्तसिंह रावत देवपुरी, रा मै सुखदेवसिंह दिवालीखाल, सि देवसिंह कुशरानी, पा आनन्दसिंह मारखोली व बख्तावरसिंह मेहलचैरी ने सन् 1971 के युद्ध में शहादत दी। शहादत की इस लम्बी श्रंखला के बावजूद क्षेत्र में कोई सैन्य स्मारक नही है।
  सन् 1962 के भरत-चीन युद्ध में  सबसे बधिक 12 सैनिकों ने एक दिन में ही देश की सीमा पर अपना सर्वोच्च बलिदान किया। 19 नवम्बर 1962 को देश की रक्षा में लां ना देवसिंह बिष्ट झूमाखेत, रा मै सुरेशानन्द खेती, रा मै धर्मसिंह तलसारी, रा मै चैतसिंह नेगी स्यूणी तल्ली,  रा मै धर्मसिंह टैंटुडा,रामै आलमसिंह बोखनारा, रा मै गोेविन्दसिंह कफलोडी, रा मै लखनसिंह सिमाण, रा मै गोविन्दसिंह नैणी, रा मै कलमसिंह रामडा,पाइनियर दरवानसिंह गोगना, पा बागसिंह खाल ने देश की रक्षा में प्राणों की आहुति दे दी।                                                                        
   सन् 1965 के भारत- पाक युद्ध में गैरसैंण् विकास खण्ड से 6 शहादतें हुई- लैंसनायक केशरसिंह पुण्डीर गोगना, लैसनायक त्रिलोकसिंह कण्डारी खंोड, रा मै महेन्द्रसिंह देवपुरी, रा मै बलवन्तसिंहउसेरा, रा मै अमरसिंह पंवार ग्वाड, रा मै दरवानसिंह गुसांई मैखोली इस युद्ध में देश के काम आये।
 सन् 1999 के कारगिल युद्ध जिसे आपरेशन विजय  कहा गया में  गैरसैंण के 5 जावाजों ने शहादत दी जिसमें रा मै रणजीतसिंह बासीसैम, रा मै रणजीतसिंह अक्षयवाडा, नायक कृपालसिंह पज्याणा हवा पदमराम घंडियाल व रा मै अमित नेगी टैटुडा शामिल थे।
   श्री लंका में शान्ति सेना के रुप आपरेशन पवन मेें 9 तथा आतंकियों से लडते हुए 12 सैनिक शहीद हुए हैं। गैरसैंण से पेशावर विद्रोह में मैखोली के सूबेदार जयसिंह व ग्वाड के रा मै प्रतापसिंह ने अहिंसा की मिसाल कायम की थी। आजाद हिन्द फौज में भी क्षेत्र से बडी संख्या में सेनानी रहे।
पुरुषोत्तम असनोड़ा

बुधवार, 16 दिसंबर 2015

विजय दिवस पर अच्छा नागरिक बनने की शपथ लें

विजय दिवस पर अच्छा नागरिक बनने की शपथ लें
विजय दिवस पर सेना के शौर्य और पराक्रम की चर्चा अवश्य की जानी चाहिए लेकिन उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर उस चर्चा का कोई महत्व नही है। हमें समझना चाहिए कि प्रथम विश्व  युद्ध से लेकर कारगिल तक हमारे सैनिक अपने जीवन की परवाह न कर देश के लिए लडते और शहादत प्राप्त करते रहे हैं। विषम से विषम परिस्थितियों में सर्वोच्च बलिदान को आतुर ये सैनिक देश के उस वर्ग से आते हैं जहां देश की रक्षा का जज्बा तो है ही सेना और अर्द्ध सैनिक बल रोजगार भी हैं।
   देश के ऐसे बहुत से परिवार हैं  जिनकी पीढियां सेना और देश की रक्षा में परम्परा बन गयी हैं। विजय दिवस उन सब को सलाम करने का दिन है। देश की सीमाओं पर बलिदान हो जाने वाले उन शहीदों को नमन, उन माताओं-वीरांगनाओं को नमन जिनकी गोद और सिंदूर ने सीमाओं की रक्षा करते वीर गति पायी और वे योद्धा जो प्राणों की परवाह न करते हुए लडे और आज हमारे बीच हैं श्रद्धा प्रेरणा के पात्र हैं।  
   पूर्व सैनिक एक रैंक एक पैंशन की मांग पर लगातार आन्दोलित हैं। सरकार ने घोषणा भी कर दी है लेकिन आन्दोलन जारी है अर्थात उनकी मांगों पर सही निर्णय नही हुआ। अर्द्ध सैनिक बल जो युद्ध के अलावा हमेशा अग्रिम पंक्ति के रक्षक होते हैं उन्हें शहादत, पैंशन और दूसरी सुविधाओं में कमतर देखा जाना उचित नही है।  सैन्य बलों और दूसरी सेवाओं के अन्तर को समझना चाहिए और उनकी समस्याओं को लटकाये रखने की प्रवृति त्यागनी चाहिए। विजय दिवस पर यदि स्वयं में एक अनुशासित नागरिक और जो जहां- जिस स्थान पर है उस कर्तव्य के पालन का निर्णय लेते हैं तो यही हमारे सैनिकों को न्याय देने की दिशा का पहला कदम होगा।   
पुरुषोत्तम असनोड़ा

मंगलवार, 15 दिसंबर 2015

दीपेन्द्र ने किया ओलम्पिक के लिए क्वालीफीई

दीपेन्द्र ने किया ओलम्पिक के लिए क्वालीफीई
गैरसैंण,
       बागेश्वर जिला के गरुड तहसील निवासी दीपेन्द्र रावत ने अगस्त 2016 में ब्राजील में हो रहे ओलम्पिक हेतु क्वालिफाई कर लिया है। 6 वीं कुमाऊं रजिमेंट के दीपेन्द्र ने वल्र्ड मिलिट्री गेम्स में क्वालीफायर टाइम लेकर भारतीय टीम में जगह बना ली है।
   सेना के सूबेदार और भारतीय खेल प्राधिकरण के कोच सुरेन्द भण्डारी जो दीपेन्द्र के भी कोच हैं ने बताया कि मैराथन दौड के लिए दीपेन्द्र ने साउथ कोरिया में हुए वल्र्ड मिलिट्री गेम्स  में ओलम्पिक  क्वालिफई हेतु मैराथन दौड के लिए आवश्यक 2 घंटा 18 मिनट 6 सेकिंड का समय लेकर क्वालीफई किया।
     सुरेन्द्र स्वयं सन् 2008 के बीजिंग ओलम्पिक में 1000 मी दौड में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं  और वे उत्तराखण्ड के पहले ओलम्पियन एथलीट हैं। दीपेन्द्र के ओलम्पिक क्वालीफई को बडी संभावना बताते हुए कोच सुरेन्द्र भण्डारी ने कहा- इस उभरते एथलीट से भारत को बडी आशा है और उनका प्रदर्शन बेहतर होगा।

रविवार, 13 दिसंबर 2015

उत्तराखण्ड में 2013 की भीषण आपदा को रीजनल रिपोर्टर ने अपने जुलाई 13 अंक में कवर किया था।


उत्तराखण्ड में 2013 की भीषण आपदा को  रीजनल रिपोर्टर ने अपने जुलाई 13 अंक में कवर किया था। संपादक बी शंकर थपलियाल ने बडी मेहनत से तथ्यों के साथ सामग्री  जुटाई जिनकी अब स्मृति शेष है। प्रस्तुत है रीजनल रिपोर्टर का कवर पृष्ठ-‘सरकार छुपाती रही बिध्वस की भीषणता‘ जो स्व संपादक की आपदा को लेकर गहन पीडा को दर्शाती है।

शनिवार, 12 दिसंबर 2015

रीजनल रिपोर्टर का नवम्बर-दिसम्बर संयुक्तांक करता है-गैरसैंण प्रेम के सत्ता प्रपंच का खुलासा


सरोकारों से साक्षात्कार की मासिक पत्रिका रीजनल रिपोर्टर का नवम्बर-दिसम्बर संयुक्तांक  गैरसेंण राजधानी पर सता व विपक्ष के ढुलमुल रवैये को उद्घाटित करता-गैरसैंण प्रेम का प्रपंच, डीडा नैनीसार में जन संसाधानों की लूट और श्रीनगर के बैंकुण्ठ चतुर्दशी मेला की धूम की कवर स्टोरी लिए है।
  कवर स्टोरी में बेनकाब हुए पक्ष,विपक्ष- इंद्रेश मैखुरी, आंध्र से भी नही ली सीख- सीताराम बहुगुणा, मैं गैरसैंण हूं- महिपाल नेगी और जनाकांक्षाओं पर भारी रहा हंगामा- पुरुषोत्तम असनोड़ा के आलेख हैं। डीडा नैनीसार पर ईश्वर दत्त जोशी की रिपोर्ट-‘डीडा नैनीसार में जन संसाधनों की लूट, पहाड में जमीन पूंजीपतियों को देने की शुरुआत’, भू कानूनों की पडताल-पुरुषोत्तम शर्मा तथा श्रवण सेमवाल व शीना उपाध्याय की बैकुण्ठ चतुर्दशी मेला की रिपोर्ट-‘सतरंगी रंगों में भीगा श्रीनगर’ अच्छे आलेख हैं।
 स्थाई स्तंभों में उर्मिल कुमार थपलियाल का बकम बम ’खंडहरों में दिवाली‘, डा भरत झुनझुनवाला का चिंतन-‘आरक्षण नही सरकारी कर्मियों की लूट है समस्या’, न्यू मीडिया गुरु जयप्रकाश पंवार का स्तंभ-‘बढता इण्टरनेट समुदाय’, अपने राज्य को जानें जी एस नेगी द्वारा राज्य स्थापना दिवस पर जुटाई सामग्री जानकारी बढाते हैं। वरिष्ठ पत्रकार हरीश चन्द्र चंदोला ने मेलों को लेकर - राज्य की खेती आलेख लिखा है।  इको सेंस्टिव जोन पर प्रकाश रांगड का आलेख है तो साहिब  सिंह सजवाण द्वारा सरिता रौतेला का साक्षात्कार-‘गणतंत्र की मिसाल है सरिता रौतेला’ पंचायतों में महिला भागीदार की अच्छी शुरुआत बताते हैं।
   चर्चा में हैं उद्योगपति मोहन काला- गंगा असनोडा थपलियाल ने रोजगार की तलाश पहाड के युवा के उद्यमी बनने की गाथा वयां की है। खबरों की खबर में कार्यकारी संपादक एल मोहन कोठियाल ने -‘उत्तराखण्ड में भी बना वाम मोर्चा’, बहुत कठिन डगर है टिकट की, कोदा, झंगोरा और भंाग, गढवाली फिल्म आंचल होगी उत्तराखण्ड व यू के में शूट,आंन लाइन ट्रेडिंग का असर दीपावली पर की चर्चा का है तो खेल पृष्ठ में बी डी असनोड़ा ने  खेत खलिहान से वल्र्ड चैम्पियन तक चन्दन डंगवाल की गाथा लिखी है।
   पलायन पर तीन आयोजनों को ब्यूरो ने कवर किया है और साहित्य में मुकेश नौटियाल की कहानी ‘लम्बोडा‘ है। पूर्व मंत्री बलदेवसिंह आर्य पर  एल मोहन कोठियाल का विचारोत्तेजक लेख है।

शुक्रवार, 11 दिसंबर 2015

व्यवस्था पुख्ता हो-निरपराध फंसे नही अपराधी छूटे नही

 
        मुंबई के बांद्रा हिल रोड पर 28 सितम्बर 2002 को हिट एण्ड रन मामले में गुरुवार को सलमान खान को मुंबई उच्च न्यायालय ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। लापरवाही और शराब पीकर गाडी चलाने के आरोपी सलमान खान पर पांच व्यक्तियों को कुचलने का आरोप था, जिसमें एक व्यक्ति की मृत्यु हो गयी थी जबकि चार घायल हुए थे।
  निचली अदालत से सलमान को 5 साल की कैद की सजा हुई थी जिसके विरुद्ध सलमान उच्च न्यायालय गये स्थगन प्राप्त किया और अब बरी हो गये हैं।, उच्च न्यायालय ने पुलिस की जांच और साक्ष्यों को पर्याप्त नही माना। देश में हजारों -हजार अपराधी साक्ष्य व विवेचना में कमी के चलते सजा से छूटते रहे हैं और समाज में उनका रुतवा तब भी कायम रहता है। यह हमारी पुलिसिंग व न्याय प्रणाली दोनों के लिए ही दुर्भाग्य है कि स्वतंत्रता के 68 साल बाद भी हम ऐसा तंत्र नही विकसित कर पाये जिसमें निरपराध को सजा होने और अपराधी के छूट जाने की संभावना न के बराबर हो।
  सलमान के केस में जैसा कि जज ने स्वयं कहा है कि केस का फैसला मीडिया ट्रायल या जन भावना के आधार पर नही लिया जाता , यह साक्ष्यों के आधार पर होता है। जज महोदय बिलकुल सही कह रहे हैं अभियोजन ने वे सब साक्ष्य अदालत को नही मुहैया करायी जिसके दम पर अदालत आरोपी को सजा देती। मुकदमे की 13 साल बाद की स्थितियों में आने वाला अंतर अपराधी के लिए संजीवनी बन जाता है। सलमान दोषी हों या नही इससे अधिक तीखा सवाल है फुटपाथ पर जो पांच लोग कुचले गये उनका अपराधी कौन है? यदि सलमान नही तो एक जिन्दे इंसान को मुर्दा किसने बनाया? चार लोग जो घायल हुए और वर्षों तक उस पीडा को भोगते अपनी रोजी- रोटी का इंतजाम करने में भी असफल रहे उनका गुनाहगार कौन है? क्या कोई शराबी तेज रफ्तार से अपनी मंहगी गाडी निरीह लोगों पर चढा दे औश्र अच्छी फीस के साथ किया गया वकील कानून के उन छेछों का सहारा ले उसे बचा ले जाय यह कहां का न्याय है?
   पुलिस का काम होना चाहिए था वह निरीह लोगों की रक्षक हो, विवेचना और अभियोजन में भी पीडित का पहला पक्ष होना चाहिए लेकिन सजा पाया मुजरिम जब उच्च अदालत में जाता है और पीडित बन गुहार करता है तो उसको न्याय मिल जाता है। लेकिन जो लोग बेमौत मारे गये उनको न्याय कब मिलेगा? न्यायपालिका और संसद को विचार करना चाहिए कि निरपराध फंसे नही और अपराधी छूटे नही।         
                        पुरुषोत्तम असनोड़ा

गुरुवार, 10 दिसंबर 2015

अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस- मुजफ्फर नगर काण्ड के अपराधियों को सजा दो


    अन्तराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर देश-प्रदेश और विश्व के उन तमाम मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का जो विषमतम परिस्थितियों में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए कार्य कर रहे हैं, को शुभ कामना। मानव अधिकारों से बंचित उन समस्त मानव जाति के साथ सहानुभूति की उनके अधिकारों की लडाई में यथा संभव योगदान का प्रयास रहेगा।
    उत्तराखण्ड में मानवाधिकारों की स्थिति किसी अन्य राज्य से कम जटिल नही है। केन्द्र से धन लेने की नियत के चलते उत्तराखण्डके कई युवाओं को माओवादी बताकर जेलों में ढूंसा गया और अदालत तक सरकार के तर्क नही चले। सीमा क्षेत्र होने  और निहित लोभ के कारण सरकारों के ऐसे दुःसाहस से पुनः-पुनः इंकार नही किया जा सकता। इसलिए आवश्यक है कि मानवाधिकारों के उलंघन के मामलों में मावनाधिकार कार्यकर्ता एकजुट और त्वरित आन्दोलनात्मक कार्यवाही के लिए तैयार हों।
   लाल-नीली बत्तियां उत्तराखण्ड में कम खौफनाक नही हैं और उनकी हनक और प्रशासन द्वारा उनकी चमचागिरी में सडकों और अन्य स्थानों पर आम नागरिकों व सामाजिक कार्यकर्ताओं को रोका जाना गम्भीर मामले हैं। ऐसी कई-कई घटनाओं का सामना उत्तराखण्ड के आम नागरिक व सामाजिक जीवन में रह रहे लोगों को करना पडा है।
     विकास लोकतंत्र में आम आदमी के मानवाधिकार का मामला है। मूलभूत सुविधाऐं उपलब्ध कराना व्यवस्था की जिम्मेदारी है। और जब सडक की दुर्दशा के चलते हादसे हमें जानन-माल का नुकसान होता है तो जिम्मेदारी निश्चित रुप से सरकारों की होनी चाहिए।  तत्काल औश्र उचित चिकित्सा का न मिलना भी मावनाधिकार हनन है औउर उततराखण्ड में पिछले 15  साल विकास के मामले में मानवाधिकार हनन के दायरे में है।
    उत्तराखण्ड के मानवाधिकारों को रोंदने की सबसे विभित्स घटना 2 अक्टूबर 1994 को मुज्फ्फर नगर के रामपुर तिराहे की है। 21 साल बाद भी उत्तराखण्ड के आन्दोलनकारी महिलाओं को न्याय नही मिला। शान्तिपूर्ण आन्दोलन के लिए दिल्ली जाने से रोकना जहां मानवाधिकारों का हनन था वही विभित्स और बर्बर घटना के आततायी कोई सजा नही पाये यह मानवाधिकारों की हार के रुप में देखा जाना चाहिए और ये मानना चाएि कि 21 साल उत्तराखण्ड और देश के काले शासन और सोच के दिन रहे जिसमें आततायी मौज करते रहे और पाडित ग्लानि के शिकार हुए।
    अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर क्या हम आशा करें कि विश्व के तमाम मानवाधिकार कार्यकर्ता एकजुट हो मुजफ्फर नगर कांड के अपराधियों को सजा दिलाने में सहायक होंगे। सरकारों के उन नुमाइन्दों को जो मानवाधिकार की बडी बातें करते हैं यदि उत्तराखण्ड के पीडितों को न्याय दिला सकें तो ही वे नुमाइन्दी के योग्य कहे जा सकते हैं।  
                                                                                           पुरुषोत्तम असनोड़ा

बुधवार, 9 दिसंबर 2015

छाये बादल बढी ठंड

छाये बादल बढी ठंड
गैरसैंण, 9 दिसम्बर, आसमान में घने बादलों ने ठंड बढा दी है और लम्बे समय बाद वर्षा के आसार हैं।
दूधातोली में वर्षा प्रारम्भ हो चुकी हैऔर रात तक वहां निश्चित रुप से मौसम की दूसरी वर्फवारी होगी।

मंगलवार, 8 दिसंबर 2015

मेहनत और मंशा जनता के लिए हो श्रीमान!

   
          थराली(चमोली) से उत्तर उजाला में एक खबर है कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने जन सभा में वर्तमान विधायक को पुनः जिताने और मुख्यमंत्री को पुनः मुख्यमंत्री बनाने के लिए कितने लोग राजी हैं हाथ उठायें। जवाब में बहुत कम हाथ उठने का उल्लेख है। यह स्थिति केवल थराली की नही है समूचे उत्तराखण्ड या कहें देश की यही स्थिति है। प्रदेश में चुनाव हुए साढे तीन साल हो गये हैं। कोई विधायक बताये तो सही कि उसने अपने क्षेत्र में जन अपेक्षाओं और राज्य परिकल्पनाओं के अनुरुप क्या किया है? गांव का पलायन रोकने के लिए क्या कदम उठाये? प्र्यावरण संरक्षण में आपकी भागीदारी क्या रही? शराब पर आपका क्या स्टेंड है और यह भी कि जल-जंगल-जमीनजेसे सारस्वत मुद्दे पर जनता या माफिया में से किस पक्ष की लडाई लड रहे हैं? भ्रष्टार पर उसकी स्थिति क्या है?
   यह सवाल केवल विधायकों/सांसदों के लिए नही है यह सवाल मुख्यमंत्री और प्रधान मंत्री के लिए भी है।  उत्तराखण्ड राज्य की अपेक्षाओं को चकनाचूर करने वाले हर उस कथित प्रतिनिधि के लिए है जिसकी मौज में जनता का बूरा हाल हुआ है। 15 सालों में गांवखली हो गये। आम मडुवें, झंगोरे की रट लगाये हैं। गांव की मूलभूत सुविधायें आपने बहाल नही की और कोरी घोषणा से पलायन रुकने वाला नही है। जिन्दलों को उत्तराखण्ड की बेशकीमती जमीन देकर आप उत्तराखण्ड का पलायन रोकने और अच्छी शिक्षा का वास्ता देकर लोगों को भरमाने का प्रयास कर रहे हैं। आप बता पायेंगे कि दून स्कूल से उत्तराखण्ड के कितने गरीब-गुरवे शिक्षित हुए? वही नही देहारादून और नैनीताल अंग्रेजी शिक्षा के गढ रहे हैं। उनसे उत्तराखण्ड को कितना कुछ इनपुट- आउटपुट मिला?
   म्ुख्यमंत्री जी! आपके 18-22 घंटे काम करने की चर्चा है आप उत्तराखण्ड के लिए सचमुच विन्तित होंगे। केदार खत्रा में आपके काम की  हम भी प्रशंसा करते हैं। आप उस पीढी के राजनेता है जो धीरे-धीरे थक-हार कर विदा हो रही है आपकी सक्रीयता और लटके झटके देख लोग दंग हैं। आपका जगह-जगह जलेबी, पकौडे, रसगुल्ले के साथ चाय का स्वाद लेना सचमुच अच्छा लगता है कि आपमें पहाडी होने का दम विद्यमान है।
 म्ुख्यमंत्री जी! आप हमें बतायेंगे कि चमडखान-कनोली-सेलापानी मोटर मार्ग कब बना रहे हैं? स्वतंत्रता सेनानी मोतीसिंह नेगी ने अपने स्वतंत्रता संघर्ष और जन सेवा की दुहाई देते हुए आपसे कहा था- मैं जीते जी आपे गांव सउक से जाऊं, 15 सालों में तो उत्तराखण्ड की सरकारें उस सडक को नही बना पायी। क्या आपके 18-22 घंअे में से कुछ समय स्वतंत्रता सेनानी की आखिरी ख्वाहिश पूरी करने के लिए हैं?
    ऐसे बहुत लोग हैं जिनके साथ 15 सालों में कोई न्याय नही हुआ। अपने गांव केवल सडक के कारण न जा सकने की पीडा के साथ कई लोग दुनिया से ही चले गये, गांव गये तो पानी नही, रुके तो शिक्ष की हालत बूरी और रुके तो इलाज नही। अब तो आप श्रीमान भी कह रहे हैं पहाडों में डाक्टर नही जाना चाहता, पहाडों में शिक्षक नही रहना चाहता, ये सब आप श्रीमान का ही किया धरा है डाक्टर को नही बताया कि पहाड चढने के अलावा उत्तराखण्ड में कोई दूसरा रास्ता नही है, आपने शिक्षक को नही कहाकि अपने गांव को शिक्षित करने का जिम्मा तुम्हारा है और तुम अपनी जिम्मेदारी से भागोगे नहीं।
  दून में बैठ कर नोट छापने का जो धंधा बना उसने उत्तराखण्ड की सेवाओं को बाधित कर दिया। आपकी सरकार ने अनिवार्य स्थान्तरण कानून को खत्म कर दिया। लोकपाल विधेयक असपको नहीं भाया।  कुछ पहले के मुख्य मंत्रियों के बारे में भी 18-22 घंटे काम करने की चर्चा रही है, लेकिन जनता के लिए परिणाम कहा हैं? जनता को परिणाम चाहिए। आप शुद्ध मन-मतिष्क से काम करेंगे तो दिखेंगे भी। लेकिन भ्रष्टाचार में लिपटे लोग जब किसी के चारों ओर होंगे तो मेहनत भी उन्ही के लिए होगी और मंशा भी उन्ही के साथ।
   आज की जो स्थितियां हैं और आप लोगों के जो नखरे हैं उनसे जनता खुश तो है नही, फिर आप लोगों को पुनः चुनने के बारे में उसे सोचना पडे तो आश्चर्य क्या है?     पुरुषोत्तम असनोड़ा      

सोमवार, 7 दिसंबर 2015

सी एम के जनता दरबार में समस्याओं का अम्बार, अधिकारियों के पास नही थे उत्तर

 गैरसैंण, 
प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गोपेश्वर महाविद्यालय के जिम हाॅल में जन समस्याओं को सुनकर समस्याओं के निस्तारण के निर्देश दिये। उन्होंने कहा जनता दरबारों का मुख्य उद्देश्य सरकार तथा शासन, प्रशासन को संवेदनशील बनाकर चुस्त दुरूस्त करना है। जनता दरबार में पी डब्लू डी के चार अभियंता को निलंबित किया गया। 
जनता दरबार में ग्राम प्रधानों द्वारा बताया गया कि विधायक निधि से केवल 75 प्रतिशत भुगतान हुआ है शेष 25 प्रतिशत का भुगतान काफी समय से नहीं हो हुआ है। इस पर मुख्यमंत्री द्वारा जिला विकास अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि यदि कार्य पूर्ण हो चुका है तो भुगतान करना सुनिश्चित करें। पोखरी में लोनिवि द्वारा मोटर मार्ग का मुआवजा कम दर पर भुगतान की शिकायत पर संबंधित अधिशासी अभियन्ता को निर्धारित दर पर भुगतान के निर्देश दिये। थराली-देवाल-मन्दोली मोटर मार्ग पर रेलिंग लगाने से रोड की चैडाई कम हो जाने की शिकायत पर मा0 मुख्यमंत्री ने एडीबी को काम रोक कर सर्वप्रथम यह सुनिश्चित करने के निर्देश कि इससे रोड की चैडाई कम न हो।
क्षेत्रीय जनता द्वारा जड़ी-बूटी शोध संस्थान मण्डल में नियमित निदेशक तथा नियमित स्टाफ की नियुक्ति के संबंध में मुख्यमंत्री ने शीघ्र तैनाती का आश्वासन दिया।  जनता दरबार में पेयजल की अनेक शिकायतें, मांग उठी, जिनमें से मरम्मत संबंधी छोटी-छोटी शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। रेजा चैधरी द्वारा जौरासी में पेयजल की लाइन क्षतिग्रस्त होने की शिकायत की गयी जिसका मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया।
प्रधान आशा देवी ने आईटीआई नन्दासैंण का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम पर करने की मांग की, जिस पर मुख्यमंत्री द्वारा विधायक देवाल प्रो0 जीतराम को लोगों की राय के अनुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिये। प्रधान कालेश्वर द्वारा 28 मार्च 2015 को मुख्यमंत्री द्वारा की घोषणा पूरी न होने पर उन्होंने  कहा कि किसी भी काम में थोड़ा वक्त लगता है आप धैर्य रखें एक वर्ष बाद कार्य धरातल पर दिखने लगेगा।
कार्तिक स्वामी मन्दिर समिति के प्रबन्धक पूर्ण सिंह नेगी ने मन्दिर में पेयजल की समस्या व वन विभाग द्वारा बिना पूर्व नोटिस के जुर्माना लगाने की शिकायत की, साथ ही मा0 मुख्यमंत्री को आगामी जून में होने वाले यज्ञ में आने की भी मांग की। जिस पर मा0 मुख्यमंत्री द्वारा पेयजल समस्या के लिए संबंधित विभाग को व वन विभाग द्वारा जुर्माना लगाने की शिकायत को दूर करने का आश्वासन दिया।
सिमली दुग्ध संघ द्वारा दूध का उचित मूल्य न मिलने व दुग्ध संघ की धीमी उत्पादन प्रगति की शिकायत पर मुख्यमंत्री द्वारा सख्त नाराजगी व्यक्त की गयी और दुग्ध विकास अधिकारी सिमली को हटाने के निर्देश दिये। विकलांगो के लिए कल्याण कोष बनाने पर भी आश्वासन दिया गया। ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष द्वारा राज्य का अपना पंचायत एक्ट बनाये जाने की मांग पर मुख्यमंत्री ने जल्द ही प्रदेश का अपना पंचायती राज एक्ट बनाये जाने की बात कही, साथ ही कहा कि चतुर्थ राज्य वित आयोग द्वारा पंचायतों के बजट में कमी की जाने की कोई संस्तुति नहीं की गयी है।
बण्ड क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा टीएचडीसी पीपलकोटी में प्रभावित गाॅवों के लोगों को रोजगार न देने की शिकायत पर मुख्यमंत्री द्वारा फोन पर मुख्य सचिव उत्तराखण्ड को इस मामले में टीएचडीसी से मामले का निस्तारण करने के निर्देश दिये।
 जुम्मा से द्रोणागिरी 6 किमी मोटर मार्ग 2013 में स्वीकृत होने के पश्चात भी कार्य शुरू न होने पर लोनिवि को निर्देशित किया गया। मैठेली के ग्रामीणों द्वारा उनके गाॅव को सडक से जोडने की मांग पर मुख्यमंत्री द्वारा 1 किमी सडक की स्वीकृति दी, तथा सहायक अभियन्ता को आंगणन तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिये।
इस अवसर पर विधानसभा उपाध्यक्ष/विधायक कर्णप्रयाग डाॅ0 अनुसूया प्रसाद मैखुरी, विधायक बद्रीनाथ राजेन्द्र सिंह भण्डारी, थराली प्रो0 जीतराम, उत्तराखण्ड कांगे्रस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, जिला पंचायत अध्यक्षा मुन्नी देवी शाह, गोपेश्वर नगर पालिका अध्यक्ष संदीप रावत, कांगे्रस के पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह लिंगवाल, मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार, पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार मीणा, उपजिलाधिकारी चमोली रामजी शरण शर्मा, पोखरी कृष्णनाथ गोस्वामी, परियोजना निदेशक पुष्पेन्द्र चैहान सहित अधिकारी व जनता मौजूद थी।                                                      
                                             


रविवार, 6 दिसंबर 2015

विदेशी पशु प्रजनन प्रक्षेत्र का क्या होगा, परिकल्पनाओं पर पलीता पोतने की तैयारी तो नहीं?



          गैरसैंण, आठवें दशक में स्थापित भराडीसैंण के विदेशी पशु प्रजनन प्रक्षेत्र पर विधान सभा की छाया(प्रेत) लगने की पूरी संभावना है। प्रक्षेत्र की ही जमीन पर बन रहे विधान सभा और विधायक, मंत्री, अधिकारी हाॅस्टल के बाद प्रक्षेत्र का अस्तित्व खतरे में बताया जा रहा है और वहां आवासीय कालौनी बनाये जाने पर विचार हो रहा है। प्रक्षेत्र को कहां स्थान्तरित किया जायेगा इसकी पुख्ता जानकारी नहीं है अलबत्ता मुख्य मंत्री के प्रधान मुख्य सचिव राकेश शर्मा प्रक्षेत्र को उसी की भूमि में चैरडाखाल की ओर शिफ्ट करने की बात कहते हैं।
    विदेशी पशु प्रजनन प्रक्षेत्र के अधिकारी स्वयं असमंजस में हैं और केन्द्र सरकार से चारा भंण्डारण हेतु मिली धनराशि का उपयोग नही कर पा रहे हैं। 50 लाख रु की राशि से भण्डारण कक्षों का निर्माण होना था।
   विदेशी पशु प्रजनन प्रक्षेत्र उप्र में मुख्य मंत्री रहते स्व हेमवती नन्दन बहुगुणा की पशुपालन के क्षेत्र में महत्वाकांक्षी योजना थी। परवाडी, सारकोट, चोरडा, सिराणा व मरोडा वन पंचायतों की 500 एकड भूमि में स्थापित परियोजना को 1978 में कार्य रुप दिया जा सका। तत्कालीन पर्वतीय विकास मंत्री डा शिवानन्द नौटियाल ने परियोजना की स्थापना में काफी रुचि लेकर स्थापना में योगदान किया था।
 सन् 1980 में डेनमार्क से 20 जर्सी गाय और दो जर्सी सांड आयत हुए और स्थानीय गाय के साथ शंकर नस्ल पैदा कर उसे स्थानीय और बहुतायत होने पर अंयत्र वितरित करने का उद्देश्य लिया गया। प्रारम्भिक वर्षों में परियोजना सफलता से चलती रही और शंकर नस्ल (क्रास व्रीड) काश्तकारों को दी गयी और ग्राम स्तर पर पशुपालन विभग द्वारा सांड दिए गये।
  जैसा कि सरकारी योजनाओं का हश्र होता है सरकार की उपेक्षा, स्टाफ की कमी और लम्बे समय तक प्रभार में रहने से प्रक्षेत्र का प्रदर्शन प्रभावित हुआ। स्थिति तो यह हो गयी कि 200 के गौवंश की जगह प्रक्षेत्र में 350 तक गौवंश को रखना प्रक्षेत्र कर्मियों की मजबूरी हो गया। वर्तमान परियोजना निदेशक डा बर्तवाल ने नियुक्ति के साथ ही डेयरी पर भी ध्यान केन्द्रित किया और वर्तमान में 150 ली दूध का उत्पादन अच्छी संभावना दिखता है।
   जिस परियोजना की जमीन पर विधान सभा का निर्माण हुआ कि उसी को बेदखल करना न्याय संगत है? ये सही है कि विधान सभा बडा मसला है और उसके लिए 100 हेक्टेयर भूमि दी जा चुकी है। अफसरशाही प्रक्षेत्र की वर्तमान स्थिति के इतर बसाने में अनावश्यक धन की बरबादी पर उतारु है। यदि आवासीय कालोनी बननी है तो उसे उस स्थान पर क्यों नही बनाया जा सकता जहां प्रक्षेत्र को स्थान्तरित करने की बात हो रही है।  भराडीसैंण दूधातोली श्रृंखला  क्षेत्र है जहां से 5 सदानीरा नदियां निकलती हैं।  उत्तराखण्ड की स्थायी राजधानी के न्यून आवश्यक निर्माण के अलावा पर्यावरण के महत्वपूर्ण क्षेत्र में अधिक निर्माण फलदायी नही होंगे। शायद उत्तराखण्डी परिकल्पनाओं को 15 सालों में पलीता लगाने वाली नौकरशाही, नेता और माफिया भी यही चाहती होगी।      पुरुषोत्तम असनोड़ा

शनिवार, 5 दिसंबर 2015

सुनाली व जैंटी आपदा प्रभावित 39 परिवारों ने किया गृह प्रवेश

    गैरसैंण
जनपद के सुनाली एवं जेटी गाॅव के 2013 मे आपदा से प्रभावित 39 परिवारों का उपाध्यक्ष विधानसभा/विधायक कर्णप्रयाग के कर कमलों से गृह प्रवेश किया गया।
गुरूवार को जून 2013 की आपदा से प्रभावित जनपद के सुनाली एवं जेटी गांव के 39 परिवारों द्वारा विश्व बैंक के सहयोग से राज्य सरकार द्वारा संचालित आवास नीति के तहत सरकार द्वारा संचालित आवास नीति के तहत नवनिर्मित घरों में उपाध्यक्ष डाॅ अनुसूया प्रसाद मैखुरी की उपस्थिति में गृह प्रवेश किया गया। इस अवसर पर उन्होंने नवनिर्मित भवनों का पाॅच लाख रू0 का दस वर्ष तक इनश्योरेंस के पाॅलिसी बाॅण्ड भी लाभार्थियों को वितरित किये।
इस अवसर पर राइका कोट कण्डारा में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रभावित परिवारों के लिए स्वयं भवन निर्माण ओडीसीएच का विकल्प दिया गया है। जिसके तहत जनपद में 2013 की आपदा से प्रभावित 584 परिवारों को अपना आशियाना शीघ्र मिलने जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा भवन निर्माण के लिए पाॅच डिजायन तैयार कर प्रभावितों को दिया गया है। इसके अलावा यह भी विकल्प दिया गया है कि प्रभावित भवन स्वामी अपने भवन का डिजायन अपनी आवश्यकतानुसार तैयार कर सकता है। कहा कि 584 लाभार्थियों में से 549 लाभार्थियों द्वारा अपने भवनों का डि़जायन तकनीकी एजेन्सी सुधा के फील्ड़ इन्जीनियर के साथ मिलकर किया गया है।
इस अवसर पर अधिशासी निदेशक सुधा एजेन्सी दिनेश तिवारी ने जानकारी देते हुए कहा कि इस परियोजना के तहत उत्तराखण्ड आवास नीति के तहत भवनों का निर्माण कम से कम 40 स्क्वायर मी0 में करने का प्रावधान रखा गया जिसमें 2 कमरे एक बरामदा, कीचन एवं शौचालय का निर्माण होना है। भूकम्प अवरोधी भवन निर्माण होने के पश्चात राज्य सरकार द्वारा भवन का 5 लाख  रू0 का दस वर्ष का बीमा किया जा रहा है। प्रभावित परिवारों को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए जनपद एवं राज्य स्तर पर शिकायत पंजिका का प्रावधान रखा गया है। भवन निर्माण सुरक्षित भूमि पर हो इसके लिए भवन निर्माण से पूर्व भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण करवाया गया। सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर भवन निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार की आवास नीति के तहत 95 गांवों के 584 परिवारों को जिला प्रशासन द्वारा चयनित किया गया है इन परिवारों को भवन निर्माण के लिए 5 लाख रू0 चार किस्तों मे निर्गत करने का प्रावधान रखा गया है। सहमति पत्र हस्ताक्षर होने पर प्रथम किस्त के रूप में एक लाख पचास हजार, भवन फाउण्डेशन निर्माण पूर्ण होने पर द्वितीय किस्त के रूप में दो लाख, लेण्टर बैंड पर तीसरी किस्त के रूप में एक लाख तथा भवन निर्माण कार्य पूर्ण होने पर पचास हजार भुगतान किया जाता है। जनपद में 487 लाभार्थियों को मासिक किराया तीन हजार रू0 जून 2014 से मई 2015 तक दिया गया है। बताया कि जनपद में 584 प्रभावितों के भवनों का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें प्रथम किस्त के रूप में सभी लाभार्थियों को एक लाख पचास हजार भुगतान किया जा चुका है। 555 को द्वितीय किस्त, 424 लाभार्थियों को तृतीय किस्त तथा 219 लाभार्थियों को चैथी किस्त का भुगतान किया जा चुका है। दिसम्बर तक शेष सभी परिवारों को सभी किस्तों का भुगतान किया जाना है। बताया कि तहसील जोशीमठ में 34 परिवारों, तहसील चमोली के छिनका बौंला में 7 परिवारों एवं पोखरी तहसील के ग्राम रानौं में 7 परिवारों को जिला प्रशासन द्वारा भूमि उपलब्ध करायी गयी है। इसके अलावा छिनका एवं थराली के 187 लाभार्थी जिनके पास भूमि उपलब्ध नहीं थी तकनीकी एजेन्सी एवं जिला प्रशासन के समन्वय से भवन निर्माण हेतु भूमि सुनिश्चित करने हेतु प्रेरित किया गया। उन्होंने बताया कि तहसील कर्णप्रयाग के सुनाली, जेटी, जोशीमठ तहसील के पुलना भ्यूंडार, थराली तहसील के त्यूला, छिपाली, भ्याड़ी, चमोली तहसील के छिनका के 75 लाभार्थियों द्वारा कलस्टर एप्रोच में भवनों का निर्माण किया जा रहा है।
इस अवसर पर उपजिलाधिकारी/प्रभारी जिलाधिकारी चमोली रामजी शरण शर्मा, ग्राम प्रधान सोनाली, बातौड़ी, नौली, जिला आपदा प्रबन्धन अधिकारी नन्द किशोर जोशी, जिला परियोजना प्रबन्धक आपदा रिकवरी प्रकाश रतूड़ी सहित अनेक महिला समूह तथा भवन स्वामी मौजूद थे।

जन सूचना अभियान के अंतिम दिन बाल शिक्षा पर विषेश बल

गैरसैंण,   
        चमोली जिले के जयकंडी-कालेश्वर में आयोजित 3-दिवसीय जन सूचना अभियान आज सम्पन्न हो गया। समापन सत्र में मुख्य अतिथि राज्य विधानसभा उपाध्यक्ष, डा. अनसूया प्रसाद मैखुरी ने उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भोटिया जनजाति बहुल इस दूरस्थ क्षेत्र में आयोजित जन सूचना अभियान के माध्यम से केंद्र सरकार की विकास और जन कल्याण की योजनाओं के बारे में लोगों को जागरूक करने में बड़ी सहायता मिली है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इन योजनाओं का पूरा फायदा उठाएं। इस अवसर पर श्री मैखुरी ने पुरस्कार वितरण किया और राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित कालेश्वर की लड़की स्वर्गीय मोनिका के पिता चन्द्रमोहन सिंह और माता कमला देवी को भी सम्मानित किया। मोनिका ने पिछले वर्ष कालेश्वर की 2 लड़कियों को अलकनन्दा में बहने से बचाया, लेकिन इस प्रयास में उनकी जान चली गई। कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए 24 प्रदर्शनी स्टाॅलों में सर्वोत्तम स्टाॅल का पुरस्कार सर्व शिक्षा अभियान, चमोली को दिया गया। दूसरा और तीसरा पुरस्कार क्रमशः हिमालयन उद्योग कौशल विकास एवं प्रशिक्षण समिति, नगरासू और जागृति सेवा समिति, देवतोली को प्रदान किया गया।
अभियान के दौरान आज आयोजित किए गए कार्यक्रमों में सर्व शिक्षा अभियान, शिक्षा का अधिकार कानून और मध्याह्न भोजन योजना पर विशेषज्ञों की वार्ता तथा सर्व शिक्षा रैली शामिल है। सर्व शिक्षा रैली जयकंडी-कालेश्वर मैदान से निकाली गई, जो कालेश्वर बाजार होते हुए वापस इसी मैदान में सम्पन्न हुई। रैली में स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। बच्चों ने अपने हाथों में सर्व शिक्षा के संदेश की तख्तियां लेते हुए नारे लगाकर लोगों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने के बारे में जागृत किया। सर्व शिक्षा अभियान के जिला संयोजक, सुभाष चन्द्र बड़थ्वाल ने बताया कि वर्तमान में चमोली जिले में 6 से 14 वर्ष की आयु का कोई भी बच्चा विद्यालयी शिक्षा से वंचित नहीं है। जिले के 101 विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे, जो पहले गृह आधारित शिक्षा पाते थे, वर्तमान में एस्काॅर्ट सुविधा से कवर किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक शिक्षा के तहत भिखारी, खनन क्षेत्र में कार्यरत मजदूर, घुमंतु और प्रवासियों के बच्चों के लिए आवासीय या गैर आवासीय शिक्षण के लिए बहुद्देशीय वाहन पहल कार्यक्रम शुरु किया गया है। समावेशी शिक्षा के तहत विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों हेतु परीक्षा उपकरण बांटना, परिवहन एस्काॅर्ट उपलब्ध कराना और  बड़ी छपी पुस्तक या ब्रेल किताब देना शामिल है।
विषय विशेषज्ञ, चण्डी प्रसाद नौटियाल ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसके तहत प्रत्येक मान्यता प्राप्त विद्यालय में पहली कक्षा में 25 प्रतिशत सीटें अपवंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित की गई हैं। इसके साथ ही यह सुनिश्ति किया गया है कि इन बच्चों के प्रवेश के लिए कोई विद्यालय कैपिटेशन फीस न वसूल सके। इसके अलावा इन बच्चों को किताब, वर्दी और भोजन हेतु धनराशि उनके बचत खातों में जमा की जाती है तथा शिक्षण शुल्क के रूप में संबंधित विद्यालय को प्रति छात्र अधिकतम रु0 1,383 दिए जाते हैं।
ब्लाॅक समन्वयक, जी.एल. भारती ने मध्याह्न भोजन के बारे में बताया कि प्राथमिक स्तर पर 100 ग्राम प्रति छात्र और उच्च प्राथमिक स्तर पर 150 ग्राम प्रति छात्र प्रतिदिन के हिसाब से केंद्र सरकार के द्वारा खाद्यान्न निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। इसके साथ ही दाल, तेल, मसाले, नमक और ईंधन हेतु प्राथमिक स्तर पर रु0 3.76 प्रति छात्र और उच्च प्राथमिक स्तर पर रु0 5.64 प्रति छात्र प्रतिदिन के हिसाब से दिए जाते हैं।
आज रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां विशेष रूप से दर्शकों के लिए मनोरंजक और आकर्षक रहीं। भोटिया महिला मंगल दल, कालेश्वर द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम को दर्शकों ने खूब सराहा। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, घाट के बच्चों ने जूडो प्रदर्शन दिखाया।







गुरुवार, 3 दिसंबर 2015

नेपाल से संबन्ध सुधारने होंगे राजनैतिक व कूटनीतिक तत्परता जरुरी

   
              नेपाल में भारत के राजदूत रंजीत रे ने माना है कि भारत और नेपाल के संबन्ध प्रभावित हुए हैं। नेपाल में संविधान सभा द्वारा संविधान स्वीकृति के बाद वहां तनाव है और नेपाल के लिए भारतीय सामान आवाजाही नही हो पा रही है। इसका कारण नेपाल की आंतरिक स्थितियां तो हैं ही भारत की विदेश नीति की भी असफलता है। नेपाल हमारा न केवल पडोसी देश है बल्कि वहां रोटी-बेटी के संबन्ध हैं जो किसी भी और पडोसी देश के साथ नही हैं। नेपाल से मिलने वाली सीमा उत्तराखण्ड, उ प्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से मिलती हैं और इतने राज्यों की सीमाओं के लोग आपस में घुलमिल कर रहते हैं।
            नेपाल में राजशाही के खत्मे के साथ वहां की राजनैतिक स्थितियां बदली हैं और वहां भारत के प्रति कहीं न कही अविश्वास के भाव पनपे हैं चाहे वह संख्या न्यून हो। लमबे वाम आन्दोलन के बाद संसद में नेपाली कांगे्रस का वह प्रभाव नही रहा जो राजशाही के दौर में हुआ करता था।  नेपाल के साथ संबन्धों की मधुरता कुटनीतिक तौर भी माने रखती है, भारत से सहायता न मिलने की स्थिति में  नेपाल चीन से संबन्ध बनायेगा। भोगौलिक दुरुहता अब तक उसकी राह रोकती रही है और एक बार चीन-नेपाल उस भेगौलिकता पर विजय पा लें तो भारत की उसे उस हद तक आश्रित रहने की जरुरत नही होगी।
        भारतीय विदेश नीति दूसरी बार नेपाल मामले में असफल सिद्ध हुई है। वहां के विनाशकारी भूकंम्प में  नेपाल ने भारतीय सहायता से इंकार के बाद वर्तमान में वहां भारत के विरुद्ध देखी जा रही प्रतिक्रिया किसी सफल विदेश नीति का संकेत नही है। नेपाल के साथ संबन्धों का बिगाड पहले से ही खराब पडोस के चलते हमारे लिए दुरूवारियां ही पैदा करेगी।
        हमारे साउथ और नोर्थ ब्लाक के अधिकारी किस योग्यता से नेपाल संबन्धों को देखते हैं और प्रधान मंत्री से लेकर विदेश मंत्री तक इस स्थिति को संभालने में तत्पर होते हैं यही नेपाल व भरत के संबन्धों के गतिरोध को तोडेगा।  

केन्द्र सरकार का तीन दिवसीय जनसूचना अभियान प्रारम्भ


गैरसैंण, 
            भारत सरकार की विकास योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में आयोजित तीन दिवसीय जन सूचना अभियान आज चमोली जिले के जयकंडी-कालेश्वर में शुरु हो गया। राज्य विधानसभा के उपाध्यक्ष अनसूया प्रसाद मैखुरी ने अभियान का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाएं। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे विकास योजनाओं में बढ़-चढ़कर भागीदारी करें। उन्हांेने कहा कि समावेशी विकास के लिए जरूरी है कि सरकारी योजनाओं की जानकारी समाज के हर व्यक्ति तक पहुंचे। श्री मैखुरी ने कहा कि लोगों को जागरूक करने में जन सूचना अभियान जैसे कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि जयकंडी-कालेश्वर सीमावर्ती चमोली जिले का भोटिया जन जाति बहुल क्षेत्र है और यह अभियान उनके विकास में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे राजनीति से ऊपर उठकर विकास कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करें। 
        नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक, आशीष भण्डारी ने प्रधानमंत्री जन धन योजना के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि अभी तक इसके तहत देश में 19 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए हैं और लोगों ने लगभग 26 हजार करोड़ रुपए इनमें जमा किए हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य हर परिवार का एक बैंक खाता खुलवाकर उन्हें बैंकों की सुविधाएं मुहैया कराना है। इसमें 6 महीने तक खाता संतोषजनक ढंग से चलने पर खाताधारक को 5 हजार रुपए के ओवर ड्राफ्ट की सुविधा दी जाती है। उन्होंने बताया कि सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं को भी इससे जोड़ा गया है। इनमें प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और अटल पेंशन योजना शामिल हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में 18 से 70 वर्ष के सभी बचत खाताधारकों को 12 रुपए के वार्षिक प्रीमियम पर दुर्घटना में मृत्यु पर 2 लाख रुपए और स्थायी विकलांगता पर 1 लाख रुपए की राशि मिलती हैं। जीवन ज्योति बीमा योजना में 18 से 50 वर्ष के खाताधारक को 330 रुपए वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपए तक की बीमा राशि मिलती है। श्री भण्डारी ने बताया कि अटल पेंशन योजना को 18 से 40 वर्ष के व्यक्ति अपना सकते हैं और 60 वर्ष की आयु से उन्हें न्यूनतम पेंशन मिलनी शुरु हो जाएगी।
       कर्णप्रयाग की ब्लाॅक प्रमुख, राधा देवी ने महिलाओं के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में बताया। उन्होंने विशेष रूप से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि हमें लड़कियों को न केवल सुरक्षित रखना है, बल्कि उनको पढ़ा-लिखाकर जीवन में आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि सरकार इसके लिए स्कूलों में लड़कियों को विशेष सुविधाएं दे रही है। खण्ड विकास अधिकारी, देवी दत्त उनियाल ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के बारे में ग्रामीणों को बताया कि इसके तहत गरीब परिवार के सदस्य को साल में 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है। रोजगार लेने का इच्छुक व्यक्ति इसके लिए आवेदन करता है और रोजगार न मिलने की दशा में अधिकारियों से पारिश्रमिक का दावा ले सकता है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम की खास बात ये है कि रोजगार की व्यवस्था लाभार्थियों को उनके गांवों के आस-पास ही की जाती है।
       जन सूचना अभियान का आयोजन पत्र सूचना कार्यालय (पी.आई.बी.) देहरादून द्वारा किया गया है और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की अन्य मीडिया इकाइयां जैसे क्षेत्रीय प्रचार निदेशालय, विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय, गीत एवं नाटक प्रभाग, आकाशवाणी और दूरदर्शन इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार, जिला प्रशासन, सार्वजनिक उपक्रम और गैर सरकारी संगठन भी सक्रिय सहयोग कर रहे हैं।

बुधवार, 2 दिसंबर 2015

मुख्यमंत्री जी! विकास और अच्छी शिक्षा जनता का हक है

   मुख्यमंत्री जी! विकास और अच्छी शिक्षा जनता का हक है
बीते रविवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अल्मोडा में नैनीसार मामले में जिस ढंग से सफाई दी वह किसी धमकी से कम नही है । अखबारों में प्रकाशित बयान के अनुसार मुख्य मंत्री कहा-यदि जनता को विकास और अच्छा स्कूल नही चाहिए तो नैनीसार का आवंटन वापस ले लेंगे। इसका अर्थ है मुख्य मंत्री ने नैनीसार को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है और इससे यह ध्वनि स्वाभाविक रुप से निकलती है कि नैनीसार प्रकरण में दाल में काला है।
    मुख्यमंत्री जी! अच्छा स्कूल और विकास किसे नही चाहिए? यह दुर्भाग्य है कि जिस शराब से उत्तराखण्ड त्रस्त है वही शराब उत्तराखण्ड सरकार आय के प्रमुख स्रोत के रुप अपना चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने जब शराब बन्दी की घोषणा की तो आपने कहा-उत्तराखण्ड में शराबबन्दी नही होने जा रही है। अब आप कहते हैं विकास और अच्छे स्कूल नही चाहिए उस स्थिति में जनता की जमीन जनता को वापस करोगे। अजब दादागिरी है भाई!
  मुख्यमंत्री जी विकास और अच्छी शिक्षा प्रदेश और देश की जनता का हक है और उसी के लिए वह सरकार चुनती है। राज्य का विकास आपका दायित्व है, तब आप विकास की शर्त पर जिन्दल को भूमि देने पर कैसे अडे रह सकते हैं?
   आपने एक और बात कही है वह कि नैनीसार में भूमि आवंटन का विरोध राजनैतिक है। नैनीसार में मुखर रुप से क्षेत्रीय राजनैतिक दल उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी विरोध कर रही है। यदि उपपा के विरोध को आपने नोटिस किया है तो यह उत्तराखण्ड की राजनीति के लिए अच्छा है। दशकों से जनता की लडाई लड रहे लोग यदि वैकल्पिक राजनीति के तौर पर सामने आते हैं तो निश्चित रुप से माफियाराज खत्म हो जायेगा। तब माफिया हितों की लडाई विधान सत्रों को नही धोयेगी, उत्तरााखण्ड को उत्तराखण्डी परिकल्पनाओं का राज्य मिल पायेगा।  

मंगलवार, 1 दिसंबर 2015

गुरिल्लों को सरकारी सेवा में लेने व पेंशन का लाभ देने की मांग

गुरिल्लों को सरकारी सेवा में लेने व पेंशन का लाभ देने की मांग
गैरसैंण,
   रामलीला मैदान मे एसएसबी गुरिल्ला स्वयं सेवक संगठन की ब्लाॅक स्तरीय बैठक आयोजित हुई। गुरिल्ला संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ब्रह्मानन्द डालाकोटी ने अपने हकों के लिए एक बडे आन्दोलन के लिए तैयार रहने का आवह्न किया। उन्होनें कहा तीन सूत्रिय मांगे जिनमें गुरिल्लों को सरकारी सेवा में लेने पेंशन तथा आश्रितों को सेवा या पेंशन का लाभ देने की मांग शामिल हैं पर संर्घष जारी रहेगा।
    जिलाध्यक्ष चमोली गुलाब सिंह बिष्ट ने कहा हमारे सांसदों ने गुरिल्लों के मामलों में सरकार व संसद में प्रभावी दबाव नहीं बनाया। ब्लाॅक अध्यक्ष रणजीत शाह ने कहा गुरिल्लों की एकता ही उन्हें विजय दिलायेगी।
   बैठक में दरवान लाल, चन्द्र मोहन नेगी, बलवन्त सिंह, पुष्कर सिंह, शीला देवी, कर्मा देवी, रणजीत सिंह, पुष्पा देवी, राजेन्द्र सिंह, सती देवी, नन्दी देवी, आलम सिंह, गबर सिंह रावत, मोहन सिंह, हरी राम, बसन्त लाल, केदारी राम, गोविन्द सिंह आदि उपस्थित थे।


Congratution Mark Zukerberg and Prescilla Chan for new born baby, wish you good luck.
                                                                                    Gairsain Samachar

सोमवार, 30 नवंबर 2015

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय घाट की आवासीय छात्राओं ने किया भरारीसैंण का दौरा


  राजकीय कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय घाट की आवासीय छात्राओं ने भरारीसैंण में बन रहे विधानसभा भवन व विधायक आवास को देखा। शैक्षिक भ्रमण पर आयी विद्यालय की कक्षा 6 से 8 तक की 50 छात्राओं ने ऐतिहासिक चांदपुर गढी, आदिबदरी धाम, लोहवागढी व भैरवगढी मन्दिर सहित राजधानी के लिए चर्चित स्थान गैरसैंण का भ्रमण किया।
   छात्राओं ने इसी माह गैरसैंण में विधानसभा स्थल पालिटेक्निक को भी देखा। शैक्षिक टीम ने श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम में रात्रि विश्राम किया। टीम के साथ आये प्रधानाचार्य सरला डिमरी, शिक्षिका चन्द्रप्रभा करासी, अनित्या देवी व विरेन्द्र सिंह ने कहा गैरसैंण राजधानी स्थल को देखने की छात्राओं में काफी जिज्ञासा थी। छात्रा संगीत राज ने कहा उन्हें शैक्षिक भ्रमण में अच्छा लगा और उन्होनें चांदपुर गढी, भरारीसैंण आदि देखकर काफी जानकारी प्राप्त की।
   ठस अवसर पर एसबीएमए प्लान परियोजना प्रबन्धक गिरीश डिमरी, नगर पंचायत अध्यक्ष गंगा सिंह पंवार व बच्चों के अभिभावक आदि उपस्थित थे।