गुरुवार, 28 अप्रैल 2016
शुक्रवार, 15 अप्रैल 2016
स्याल्दे का गीत' बीजेपी है गे सटबटुवा कांग्रेस है गे जालि
स्याल्दे बिखौती नई परिस्थितियों मेंउसके अनुरुप लोकगीत, झोडे, चांचरी के सृजन की धरती रही है. जिसमें नई हलचल और देश- काल और समाज का विम्ब होता है, इसी परम्परा में इस वर्ष का गीत नया तो नही लेकिन ईधुनिक राजव्यवस्था पर कटाक्ष करता झोडा लोगों को पसन्द आयेगा-
बीजेपी है गे सटबटुवा-कांग्रेस है गे जालि
यूं पार्टियों लें करि हैछ- उत्तराखण्ड खालि
सुक पडि रौ सार पहाड-पाणि लिजी परसडि
विपिना तीलै राज बनाय- खुशि है गया हम
शुक्रवार, 8 अप्रैल 2016
उमेश डोभाल टस्ट्र द्वारा प्रति वर्ष दिए जाने वाले सम्मानों की घोषणा, डा प्रयाग जोशी, स्वामी प्रेमानन्द, जहूर आलम, चन्दन बंगारी, राहुल शेखावत व दाताराम चमोली होंगे सम्मानित
पौड़ी
उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट के द्वारा हर वर्ष दिये जाने वाले सम्मानों व पत्रकारिता पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। इस आशय का निर्णय ट्रस्ट की बैठक में लिया गया। यह सम्मान व पुरस्कार 24 अप्रैल को उत्तरकाशी में होने वाले स्मृति समारोह में प्रदान किये जायंगेे। इन सबके तहत 11 हजार की धनराशि के अलावा अंग वस्त्र, प्रतीक चिन्ह दिए जाते हैं।
इन सम्मानों में उमेश डोभाल स्मृति सम्मान डाॅ. प्रयाग जोशी को, राजेन्द्र रावत जनसरोकार सम्मान स्वामी प्रेमानन्द को ,व गिरीश तिवारी गिर्दा सम्मान संस्कृतिकर्मी जहूर आलम को दिया जायेगा। उल्लेखनीय है कि यह तीनों हस्तियां अपने-अपने क्षेत्र में लम्बे समय से कार्य में लगी हंै।
उमेश डोभाल स्मृति सम्मान पाने वाले लगभग 70 वर्’ाीय डाॅ0 प्रयाग जोशी का उत्तराखण्ड के संस्कृति, इतिहास, साहित्य में लम्बा योगदान रहा है। प्रयाग जोशी सेवानिवृत्ति के बाद भी लेखनरत हैं। आपने उत्तराखण्ड अनेक इन्टर कालेजों में सेवा दी। उसके बाद आपका चयन उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हो गया और रायबरेली के फीरोज गांधी महाविद्यालय में प्रवक्ता पद पर नैतात हो गये। वहां से सेवानिवृत्त होने के बाद हल्द्वानी में प्रवास कर रहे हैं। चाहे वे कहीं रहे हों उत्तराखण्ड पर लेखन जारी रहा। प्रतिभा व बहुविज्ञता के धनी डॉ. प्रयाग जोशी ने अनेकों पुस्तकंे लिखी हैं।
वहीं नैनीताल के जहूर आलम का नाम कोई अनाम नहीं है। वे एक कवि, रंगकर्मी और विचारवान संस्कृतिकर्मी हैं। नैनीताल की ज्यादातर संस्कृति गतिविधियों में उनकी भागीदारी रहती है। वे संास्कृतिक गतिविधियों के प्रति एक समर्पित व्यक्तित्व हैं। जनगीतों नुक्कड नाटकों, थियेटर या फिल्म फेस्टेवल सबमें उनकी भागीदारी रहती ही है। उनके गीत उत्तराखण्ड आन्दोलन के समय भी गुुनगुनाये गये थे। उनकी अगुआई में कुमाउंनी होली की रंगत देखनी हो या नाटकों का मंचन आप जान जायेंगे कि साम्प्रदायिक सदभावना कहने-सुनने की नहीं, सुनने की चीज है। जहूर ने नैनीताल के थियेटर ग्रुुप युगमंच को जिन्दा रखा है।
उत्कल विश्वविद्यालय भुवनेश्वर उड़ीसा से कृषि में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद संन्यास लेकर उत्तराखंड में बसने वाले 77 वर्’ाीय स्वामी प्रेमानंद 52 साल से समाजसेवा का कार्य कर रहे हैं। पहले उत्तरकाशी के गणेशपुर गांव में ठिकाना बनाकर बीस सालों तक आसपास के गांव के बच्चों को निशुल्क पढ़ाया। अभी तक वे हर साल डेढ़ सौ गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्चा वहन कर रहे हैं। इन उम्र में भी वे आश्रम में आने वाले बच्चों को निराश नहीं करते, बल्कि पूरी लगन से उन्हें पढ़ाकर बच्चों का भविष्य संवारने में मदद करते हैं। स्वामी प्रेमानंद की मदद का ही नतीजा है कि गणेेशपुर तथा आसपास के गांवों के कई लड़के लड़कियां डाक्टर, इंजीनियर तथा दूसरी नौकरियों में हैं। उनकी मदद से आत्मनिर्भर होकर अपना घर परिवार चलाने वालों की भी बड़ी संख्या है।
उनके आश्रम में ही एक अस्पताल भी है जहां ग्रामीणों को निशुल्क चिकित्सा सेवा, दी जाती है। मरीजों के लिये उनके यहां दोपहर में निशुल्क भोजन की व्यवस्था भी रहती है। यहां दांत व आंखों की चिकित्सा के साथ ही आधुनिक मशीनों से लैस ऑपरेशन थियेटर व पैथोलॉजी लैब भी है। यहां फिजियोथैरेपी की सुविधा है। अस्पताल की दो एंबुलेंसे भी हैं। संन्यासियों की तरह रहो और काम करो के आदर्श वाक्य को लेकर चलने वाले स्वामी प्रेमानंद के सेवा भाव से प्रभावित उनके आश्रम को मदद मिलती रहती है जिससे वे इस कार्य में लगा देते हंै।
वहीं 2015 के उमेश डोभाल पत्रकारिता पुरस्कारों में प्रिन्ट मीडिया के लिये अमर उजाला रुद्रपुर में कार्य कर रहे चन्दन बंगारी, इलेक्ट्रानिक मीडिया में लम्बी पारी खेलने वाले ईटीवी देहरादून से राहुलसिंह शेखावत और सोशियल मीडिया में सक्रिय रहने वाले दाताराम चमोली के नाम पर निर्णय हुआ। दैनिक हिन्दुस्तान रामनगर व अल्मोड़ा में कार्य कर चुके चन्दन बंगारी वर्तमान में अमर उजाला रुद्रपुर में कार्यरत है। वहीं शेखावत ईटीवी के संवाददाता हंै और जनपक्षीय समाचारों को लगातार देते रहे हैं। दाताराम चमोली सन्डे पोस्ट के संवाददाता होने के अलावा सोशियल मीडिया में बहुविषयों पर तथ्यपरक पोस्ट करते आये हंै। बैठक में ट्रस्ट के गिरीश डोभाल, बिमल नेगी, सुरेन्द्रसिंह रावत, रवि रावत, बीरेन्द्र पंवार, यमुनाराम, एल मोहन कोठियाल आदि उपस्थित थे।
उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट के द्वारा हर वर्ष दिये जाने वाले सम्मानों व पत्रकारिता पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। इस आशय का निर्णय ट्रस्ट की बैठक में लिया गया। यह सम्मान व पुरस्कार 24 अप्रैल को उत्तरकाशी में होने वाले स्मृति समारोह में प्रदान किये जायंगेे। इन सबके तहत 11 हजार की धनराशि के अलावा अंग वस्त्र, प्रतीक चिन्ह दिए जाते हैं।
इन सम्मानों में उमेश डोभाल स्मृति सम्मान डाॅ. प्रयाग जोशी को, राजेन्द्र रावत जनसरोकार सम्मान स्वामी प्रेमानन्द को ,व गिरीश तिवारी गिर्दा सम्मान संस्कृतिकर्मी जहूर आलम को दिया जायेगा। उल्लेखनीय है कि यह तीनों हस्तियां अपने-अपने क्षेत्र में लम्बे समय से कार्य में लगी हंै।
उमेश डोभाल स्मृति सम्मान पाने वाले लगभग 70 वर्’ाीय डाॅ0 प्रयाग जोशी का उत्तराखण्ड के संस्कृति, इतिहास, साहित्य में लम्बा योगदान रहा है। प्रयाग जोशी सेवानिवृत्ति के बाद भी लेखनरत हैं। आपने उत्तराखण्ड अनेक इन्टर कालेजों में सेवा दी। उसके बाद आपका चयन उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हो गया और रायबरेली के फीरोज गांधी महाविद्यालय में प्रवक्ता पद पर नैतात हो गये। वहां से सेवानिवृत्त होने के बाद हल्द्वानी में प्रवास कर रहे हैं। चाहे वे कहीं रहे हों उत्तराखण्ड पर लेखन जारी रहा। प्रतिभा व बहुविज्ञता के धनी डॉ. प्रयाग जोशी ने अनेकों पुस्तकंे लिखी हैं।
वहीं नैनीताल के जहूर आलम का नाम कोई अनाम नहीं है। वे एक कवि, रंगकर्मी और विचारवान संस्कृतिकर्मी हैं। नैनीताल की ज्यादातर संस्कृति गतिविधियों में उनकी भागीदारी रहती है। वे संास्कृतिक गतिविधियों के प्रति एक समर्पित व्यक्तित्व हैं। जनगीतों नुक्कड नाटकों, थियेटर या फिल्म फेस्टेवल सबमें उनकी भागीदारी रहती ही है। उनके गीत उत्तराखण्ड आन्दोलन के समय भी गुुनगुनाये गये थे। उनकी अगुआई में कुमाउंनी होली की रंगत देखनी हो या नाटकों का मंचन आप जान जायेंगे कि साम्प्रदायिक सदभावना कहने-सुनने की नहीं, सुनने की चीज है। जहूर ने नैनीताल के थियेटर ग्रुुप युगमंच को जिन्दा रखा है।
उत्कल विश्वविद्यालय भुवनेश्वर उड़ीसा से कृषि में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद संन्यास लेकर उत्तराखंड में बसने वाले 77 वर्’ाीय स्वामी प्रेमानंद 52 साल से समाजसेवा का कार्य कर रहे हैं। पहले उत्तरकाशी के गणेशपुर गांव में ठिकाना बनाकर बीस सालों तक आसपास के गांव के बच्चों को निशुल्क पढ़ाया। अभी तक वे हर साल डेढ़ सौ गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्चा वहन कर रहे हैं। इन उम्र में भी वे आश्रम में आने वाले बच्चों को निराश नहीं करते, बल्कि पूरी लगन से उन्हें पढ़ाकर बच्चों का भविष्य संवारने में मदद करते हैं। स्वामी प्रेमानंद की मदद का ही नतीजा है कि गणेेशपुर तथा आसपास के गांवों के कई लड़के लड़कियां डाक्टर, इंजीनियर तथा दूसरी नौकरियों में हैं। उनकी मदद से आत्मनिर्भर होकर अपना घर परिवार चलाने वालों की भी बड़ी संख्या है।
उनके आश्रम में ही एक अस्पताल भी है जहां ग्रामीणों को निशुल्क चिकित्सा सेवा, दी जाती है। मरीजों के लिये उनके यहां दोपहर में निशुल्क भोजन की व्यवस्था भी रहती है। यहां दांत व आंखों की चिकित्सा के साथ ही आधुनिक मशीनों से लैस ऑपरेशन थियेटर व पैथोलॉजी लैब भी है। यहां फिजियोथैरेपी की सुविधा है। अस्पताल की दो एंबुलेंसे भी हैं। संन्यासियों की तरह रहो और काम करो के आदर्श वाक्य को लेकर चलने वाले स्वामी प्रेमानंद के सेवा भाव से प्रभावित उनके आश्रम को मदद मिलती रहती है जिससे वे इस कार्य में लगा देते हंै।
वहीं 2015 के उमेश डोभाल पत्रकारिता पुरस्कारों में प्रिन्ट मीडिया के लिये अमर उजाला रुद्रपुर में कार्य कर रहे चन्दन बंगारी, इलेक्ट्रानिक मीडिया में लम्बी पारी खेलने वाले ईटीवी देहरादून से राहुलसिंह शेखावत और सोशियल मीडिया में सक्रिय रहने वाले दाताराम चमोली के नाम पर निर्णय हुआ। दैनिक हिन्दुस्तान रामनगर व अल्मोड़ा में कार्य कर चुके चन्दन बंगारी वर्तमान में अमर उजाला रुद्रपुर में कार्यरत है। वहीं शेखावत ईटीवी के संवाददाता हंै और जनपक्षीय समाचारों को लगातार देते रहे हैं। दाताराम चमोली सन्डे पोस्ट के संवाददाता होने के अलावा सोशियल मीडिया में बहुविषयों पर तथ्यपरक पोस्ट करते आये हंै। बैठक में ट्रस्ट के गिरीश डोभाल, बिमल नेगी, सुरेन्द्रसिंह रावत, रवि रावत, बीरेन्द्र पंवार, यमुनाराम, एल मोहन कोठियाल आदि उपस्थित थे।
शुक्रवार, 1 अप्रैल 2016
राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्यूंणी का गोल्डन जुबली कार्यक्रम रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न विद्यार्थियों के सामान्य ज्ञान को सराहा दर्शकों ने
क्षेत्र में शिक्षा प्रयोगों का महत्वपूर्ण केन्द्र और नवाचारी शिक्षा में अव्वल राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्यूंणी मल्ली के स्वर्ण जयन्ती समारोह रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सम्पन्न हुआ। गढवाली, कुमांऊनी, जौनसारी लोकगीत लोकनृत्यों की अद्भुद छटा के बीच विद्यार्थियों का सामान्य ज्ञान दर्शनीय रहा।
विद्यालय के बच्चों को विश्व के सभी देशों की राजधानी व स्थितियां मालूम हैं तो किसी भी प्रदेश के जिले और उससे सम्बन्धित जानकारियों का भी ज्ञान हैै। व्यक्ति परिचय व भूगोल व इतिहास के प्रश्न वे चुटकियों में हल कर सकते हैं। किसी भी महंगे पब्लिक स्कूल के शिक्षण साजसज्जा और वातावरण को पिछाडने में सक्षम राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्यूंणी मोटर सडक से 4 किमी दूर खडी चढाई में है। जहां 40 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं जिनमें 21 लडकियां व 19 लडके शामिल हैं।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक घनश्याम ढौंडियाल ने पिछले 20 वर्षों के अथक प्रयासों से विद्यालय को ना केवल सजाया संवारा है बल्कि स्यूंणी मल्ली को शिक्षा क्षेत्र में एक नई पहचान दी है।
समारोह के मुख्य अतिथि एबीएमए प्लान परियोजना प्रबन्धक गिरीश डिमरी ने कहा सरकारी स्कूलों से जहां अभिभावकों का मोह भंग हो रहा है वहीं स्यूणीं मल्ली या धामदेव जैसे विद्यालय उस धारणा को आईना दिखाने के लिए काफी हैैं। उन्होनें खेद के साथ कहा विकासखण्ड में बने मोडल स्कूलों में इन दोनों स्कूलों का नाम नहीं है जो अधिकारियों की सोच को प्रकट कर रहा है।
विशिष्ठ अतिथि एचपी गैस प्रबन्धक एचएस रावत ने कहा उत्तराखण्ड राज्य गठन के साथ ही यदि स्यूंणी मल्ली जैसे विद्यालय प्रमोट होते तो पहाडों से पलायन नहीं होता। उन्होनें रीजनल रिर्पोटर के अंक का उल्लेख करते हुए कहा घनश्याम ढौंडियाल व विद्यालय के बारे में प्रकाशित आलेख से स्यूंणी मल्ली के बारे में उनकी जिज्ञासा जगी।
शिक्षक रमेश चन्द्र के संचालन में हुए समारोह को पूर्व प्रधानाचार्य एलपी सती, राजकीय प्राथमिक शिक्षा संघ मंत्री मोहन सिंह रावत, पूर्व प्रधान उत्तम सिंह रावत आदि ने सम्बोधित किया। इस अवसर पर ग्राम प्रधान लीला देवी, क्षेपंस माहेश्वरी देवी, ममंद अध्यक्ष लीलावती देवी, पूर्व प्रधान देव सिंह बिष्ट, शिक्षक जसपाल नेगी नन्दलाल यादव, कुशलानन्द बरमोला, पूर्व प्रधान देव सिंह बिष्ट, धीरज सिंह, मोहन सिंह, जमन सिंह, राजेन्द्र सिंह, उपप्रधान जसवन्त सिंह, मन्जू देवी आदि उपस्थित थे।
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