रविवार, 10 जुलाई 2016

रीजनल रिपोर्टर -जून जुलाई 16 स्ंायुक्तांक-सरकार बहाल-जनता बर्खास्त
सरोकारों से साक्षात्कार की मासिक पत्रिका रीजनल रिपोर्टर का जून-जुलाई 16 संयुक्तांक सरकार बहाल-जनता बर्खास्त की कबर स्टोरी लिए है जिसमें उत्तराखण्ड में हुए समूचे राजनैतिक घटनाक्रम के बाद सरकार की बहाली के बावजूद जनता की लगातार बढती मुसीबतों से रुबरु कराया गया है। देश के कांग्रेस मुक्त का नारा देने वाली भाजपा उत्तराखण्ड में कांग्रेस के 10 विधायक लेकर किस प्रकार कांग्रेस युक्त हो गयी है कवर स्टोरी में ही व्याख्या की है संपादकीय सहयोगी सीताराम बहुगुणा ने। तीसरी कवर स्टोरी जीतेन्द्र अंथवाल ने चार धाम यात्रा को निरापद बताते हुए की है- बेखौफ चले आईये केदारनाथ। चार यात्रा पर वरिष्ठ पत्रकार हरीश चन्द्र चंदोला का आलेख है-चढाव उतार पर यात्रा।
संपादकीय सहयोगी विपिन बनियाल ने- राष्ट्रपति शासन में काम हरीश राज में ऐलान व हार जीत किनारे सुलग रहे दलों के घर आलेख लिखे हैं। कार्यकारी संपादक एल मोहन कोठियाल की खबरों की खबर में -मलाईदार हुआ प्रवन्धक का पद, राजनैतिक चालों से कमजोर होती भाजपा, मौसम विभाग- रोज रोज की वार्निंग, तथा नगर नामा में बागेश्वर पर अच्छी सामग्री है। हल्द्वानी प्रतिनिधि ओ पी पाण्डे ने मई जून में विभिन्न स्थानों पर हुए सिनेमा शो पर रिपोर्ट की है-सिनेमा को आम जन तक पहुंचाने का तरीका प्रतिरोध का सिनेमा। सोच और कर्म के धनी शिक्षक घनश्याम ढौंडियाल, प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी व विद्वान संपादक स्व रामप्रसाद बहुगुणा की स्मृति में पहले राज्य स्तरीय पुरस्कार समता संपादक दयाशंकर टम्टा को मिलने, एवरेस्ट विजेता नूतन वशिष्ठ पर विपिन सेमवाल का आलेख, मो व पुरोला के बागानों में आंधी तूफान का कहर-दलवीरसिंह रावत, कोठियाडा गांव तबाह-धूमसिंह जखेडी, गोपाल मेहरा ने परिश्रम से खडा किया कारोबार, मोहन काला की सक्रीयता से दावेदारों में बेचैनी, इन पत्रकारों के पौ बारह-डा वीरेन्द्र बत्र्वाल सहित कई आलेख हैं।जगमोहन रौतेला का आलेख जमीन के मालिकाना हक के लिए लडते लोग, व वीरेन्‍द्र पैन्‍यूलीकालेख सत्‍तरा में येसहत्‍तर तो नही विशेष हैं।
स्थाई स्तंभों में उर्मिल कुमार थपलियाल का व्यंग बकमबम-कोऊ हो राजा हमें तो हानि ही हानि, डा भरत झाुनझाुनवाला का आलेख-नेट न्यूट्रेलिटी के बढते कदम, जय प्रकाश पंवार‘जे पी‘नया समाज न्यू मीडिया सोसायटी, डा प्रीतम अपच्छांण का व्यंग-अतिथि प्रदेश में आपका स्वागत है व उत्तराखण्छ को जानिये में परिचय करा रहे है जी एस नेगी उत्तराखण्ड में स्थित अंतरराष्ट्रीय अंजरराज्यीय जल विद्युत योजनाओं से।
साहित्य में मनोजकांत उनियाल की कहानी-मुंशी जी,फिल्म समीक्षा भुली ऐ भुली-धनेश कोठारी,पुस्तक समीक्षा रंजना शर्मा के कविता संग्रह हस्ताक्षर- अतुल शर्मा, व अखिलेश चन्द्र चमोला की नैतिक बोधकथाण्ें- सीताराम बहुगुणा, विमल बहुगुणा का यात्रा वृतांत- थाईलेंड की यात्रा और रोमांच हैं।
बाल मन की उडान में अजिता तिवारी की बाल कहानी कर्म ही पूजा व कंन सिरस्वाल का स्वच्छता अभियान पर चित्र है। प्रजामंडल पार्टी पर सामग्री के साथ ही गठन के सबसे विषम दौर में उत्तराखण्ड संपादकीय है।
सरोकारों की पत्रिका से जुडने के लिए आज ही संम्पर्क करें-मो 9411354767, 9412079290, लेंडलाइन 01346-252298
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गुरुवार, 28 अप्रैल 2016

सरोकारों से साक्षात्कार की मासिक पत्रिका रीजनल रिपोर्टर के अप्रैल 16अंक


सरोकारों से साक्षात्कार की मासिक पत्रिका रीजनल रिपोर्टर के अप्रैल 16अंक में प्रख्यात स्तंभकार डा भरत झुनझुनवाला का आलेखडब्लूटीओ पर पुर्नविचार जरुरी पठनीय है. आई आई टी चैन्नई में प्रोफेसर रहे डा झुनझुनवाला आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ हैं-

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2016

स्‍याल्‍दे का गीत' बीजेपी है गे सटबटुवा कांग्रेस है गे जालि


स्याल्दे बिखौती नई परिस्थितियों मेंउसके अनुरुप लोकगीत, झोडे, चांचरी के सृजन की धरती रही है. जिसमें नई हलचल और देश- काल और समाज का विम्ब होता है, इसी परम्परा में इस वर्ष का गीत नया तो नही लेकिन ईधुनिक राजव्यवस्था पर कटाक्ष करता झोडा लोगों को पसन्द आयेगा-
बीजेपी है गे सटबटुवा-कांग्रेस है गे जालि
यूं पार्टियों लें करि हैछ- उत्तराखण्ड खालि
सुक पडि रौ सार पहाड-पाणि लिजी परसडि
विपिना तीलै राज बनाय- खुशि है गया हम
कुर्सी में बैठा चोर चकार-अब क्ये करु हम-----

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2016

उमेश डोभाल टस्ट्र द्वारा प्रति वर्ष दिए जाने वाले सम्मानों की घोषणा, डा प्रयाग जोशी, स्वामी प्रेमानन्द, जहूर आलम, चन्दन बंगारी, राहुल शेखावत व दाताराम चमोली होंगे सम्मानित

पौड़ी
   उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट के द्वारा हर वर्ष दिये जाने वाले सम्मानों व पत्रकारिता पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। इस आशय का निर्णय ट्रस्ट की बैठक में लिया गया। यह सम्मान व पुरस्कार 24 अप्रैल को उत्तरकाशी में होने वाले स्मृति समारोह में प्रदान किये जायंगेे। इन सबके तहत 11 हजार की धनराशि के अलावा अंग वस्त्र, प्रतीक चिन्ह दिए जाते हैं।  
इन सम्मानों में उमेश डोभाल स्मृति सम्मान डाॅ. प्रयाग जोशी को, राजेन्द्र रावत जनसरोकार सम्मान स्वामी प्रेमानन्द को ,व गिरीश तिवारी गिर्दा सम्मान संस्कृतिकर्मी जहूर आलम को दिया जायेगा। उल्लेखनीय है कि यह तीनों हस्तियां अपने-अपने क्षेत्र में लम्बे समय से कार्य में लगी हंै।
उमेश डोभाल स्मृति सम्मान पाने वाले लगभग 70 वर्’ाीय डाॅ0 प्रयाग जोशी का उत्तराखण्ड के संस्कृति, इतिहास, साहित्य में लम्बा योगदान रहा है। प्रयाग जोशी सेवानिवृत्ति के बाद भी लेखनरत हैं। आपने उत्तराखण्ड अनेक इन्टर कालेजों में सेवा दी। उसके बाद आपका चयन  उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हो गया और रायबरेली के फीरोज गांधी महाविद्यालय में प्रवक्ता पद पर नैतात हो गये। वहां से सेवानिवृत्त होने के बाद हल्द्वानी में प्रवास कर रहे हैं। चाहे वे कहीं रहे हों उत्तराखण्ड पर लेखन जारी रहा। प्रतिभा व बहुविज्ञता के धनी डॉ. प्रयाग जोशी ने अनेकों पुस्तकंे लिखी हैं।
वहीं नैनीताल के जहूर आलम का नाम कोई अनाम नहीं है। वे एक कवि, रंगकर्मी और  विचारवान संस्कृतिकर्मी हैं। नैनीताल की ज्यादातर संस्कृति गतिविधियों में उनकी भागीदारी रहती है। वे  संास्कृतिक गतिविधियों के प्रति एक समर्पित व्यक्तित्व हैं। जनगीतों नुक्कड   नाटकों, थियेटर या फिल्म फेस्टेवल सबमें उनकी भागीदारी रहती ही है। उनके गीत उत्तराखण्ड आन्दोलन के समय भी गुुनगुनाये गये थे। उनकी अगुआई में कुमाउंनी होली की रंगत देखनी हो या नाटकों का मंचन आप जान जायेंगे कि साम्प्रदायिक सदभावना कहने-सुनने की नहीं, सुनने की चीज है। जहूर ने नैनीताल के थियेटर ग्रुुप युगमंच को जिन्दा रखा है।
उत्कल विश्वविद्यालय भुवनेश्वर उड़ीसा से कृषि में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद संन्यास लेकर उत्तराखंड में बसने वाले 77 वर्’ाीय स्वामी प्रेमानंद 52 साल से समाजसेवा का कार्य कर रहे हैं। पहले उत्तरकाशी के गणेशपुर गांव में ठिकाना बनाकर बीस सालों तक आसपास के गांव के बच्चों को निशुल्क पढ़ाया। अभी तक वे हर साल डेढ़ सौ गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्चा वहन कर रहे हैं। इन उम्र में भी वे आश्रम में आने वाले बच्चों को निराश नहीं करते, बल्कि पूरी लगन से उन्हें पढ़ाकर बच्चों का भविष्य संवारने में मदद करते हैं। स्वामी प्रेमानंद की मदद का ही नतीजा है कि गणेेशपुर तथा आसपास के गांवों के कई लड़के लड़कियां डाक्टर, इंजीनियर तथा दूसरी नौकरियों में हैं। उनकी मदद से आत्मनिर्भर होकर अपना घर परिवार चलाने वालों की भी बड़ी संख्या है।
उनके आश्रम में ही एक अस्पताल भी है जहां ग्रामीणों को निशुल्क चिकित्सा सेवा, दी जाती है। मरीजों के लिये उनके यहां दोपहर में निशुल्क भोजन की व्यवस्था भी रहती है। यहां दांत व आंखों की चिकित्सा के साथ ही आधुनिक मशीनों से लैस ऑपरेशन थियेटर व पैथोलॉजी लैब भी है। यहां फिजियोथैरेपी की सुविधा है। अस्पताल की दो एंबुलेंसे भी हैं। संन्यासियों की तरह रहो और काम करो के आदर्श वाक्य को लेकर चलने वाले स्वामी प्रेमानंद के सेवा भाव से प्रभावित उनके आश्रम को मदद मिलती रहती है जिससे वे इस कार्य में लगा देते हंै।
वहीं 2015 के उमेश डोभाल पत्रकारिता पुरस्कारों में प्रिन्ट मीडिया के लिये अमर उजाला रुद्रपुर में कार्य कर रहे चन्दन बंगारी, इलेक्ट्रानिक मीडिया में लम्बी पारी खेलने वाले ईटीवी देहरादून से राहुलसिंह शेखावत और सोशियल मीडिया में सक्रिय रहने वाले दाताराम चमोली के नाम पर निर्णय हुआ। दैनिक हिन्दुस्तान रामनगर व अल्मोड़ा में कार्य कर चुके चन्दन बंगारी वर्तमान में अमर उजाला रुद्रपुर में कार्यरत है। वहीं शेखावत ईटीवी के संवाददाता हंै और जनपक्षीय समाचारों को लगातार देते रहे हैं। दाताराम चमोली सन्डे पोस्ट के संवाददाता होने के अलावा सोशियल मीडिया में बहुविषयों पर तथ्यपरक पोस्ट करते आये हंै। बैठक में ट्रस्ट के गिरीश डोभाल, बिमल नेगी, सुरेन्द्रसिंह रावत, रवि रावत, बीरेन्द्र पंवार, यमुनाराम, एल मोहन कोठियाल आदि उपस्थित थे।  

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2016

राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्यूंणी का गोल्डन जुबली कार्यक्रम रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न विद्यार्थियों के सामान्य ज्ञान को सराहा दर्शकों ने



गैरसैंण, 
    क्षेत्र में शिक्षा प्रयोगों का महत्वपूर्ण केन्द्र और नवाचारी शिक्षा में अव्वल राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्यूंणी मल्ली के स्वर्ण जयन्ती समारोह रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सम्पन्न हुआ। गढवाली, कुमांऊनी, जौनसारी लोकगीत लोकनृत्यों की अद्भुद छटा के बीच विद्यार्थियों का सामान्य ज्ञान दर्शनीय रहा।
    विद्यालय के बच्चों को विश्व के सभी देशों की राजधानी व स्थितियां मालूम हैं तो किसी भी प्रदेश के जिले और उससे सम्बन्धित जानकारियों का भी ज्ञान हैै। व्यक्ति परिचय व भूगोल व इतिहास के प्रश्न वे चुटकियों में हल कर सकते हैं। किसी भी महंगे पब्लिक स्कूल के शिक्षण साजसज्जा और वातावरण को पिछाडने में सक्षम राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्यूंणी मोटर सडक से 4 किमी दूर खडी चढाई में है। जहां 40 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं जिनमें 21 लडकियां व 19 लडके शामिल हैं।
   विद्यालय के प्रधानाध्यापक घनश्याम ढौंडियाल ने पिछले 20 वर्षों के अथक प्रयासों से विद्यालय को ना केवल सजाया संवारा है बल्कि स्यूंणी मल्ली को शिक्षा क्षेत्र में एक नई पहचान दी है।
  समारोह के मुख्य अतिथि एबीएमए प्लान परियोजना प्रबन्धक गिरीश डिमरी ने कहा सरकारी स्कूलों से जहां अभिभावकों का मोह भंग हो रहा है वहीं स्यूणीं मल्ली या धामदेव जैसे विद्यालय उस धारणा को आईना दिखाने के लिए काफी हैैं। उन्होनें खेद के साथ कहा विकासखण्ड में बने मोडल स्कूलों में इन दोनों स्कूलों का नाम नहीं है जो अधिकारियों की सोच को प्रकट कर रहा है।
   विशिष्ठ अतिथि एचपी गैस प्रबन्धक एचएस रावत ने कहा उत्तराखण्ड राज्य गठन के साथ ही यदि स्यूंणी मल्ली जैसे विद्यालय प्रमोट होते तो पहाडों से पलायन नहीं होता। उन्होनें रीजनल रिर्पोटर के अंक का उल्लेख करते हुए कहा घनश्याम ढौंडियाल व विद्यालय के बारे में प्रकाशित आलेख से स्यूंणी मल्ली के बारे में उनकी जिज्ञासा जगी।
   शिक्षक रमेश चन्द्र के संचालन में हुए समारोह को पूर्व प्रधानाचार्य एलपी सती, राजकीय प्राथमिक शिक्षा संघ मंत्री मोहन सिंह रावत, पूर्व प्रधान उत्तम सिंह रावत आदि ने सम्बोधित किया। इस अवसर पर ग्राम प्रधान लीला देवी, क्षेपंस माहेश्वरी देवी, ममंद अध्यक्ष लीलावती देवी, पूर्व प्रधान देव सिंह बिष्ट, शिक्षक जसपाल नेगी नन्दलाल यादव, कुशलानन्द बरमोला, पूर्व प्रधान देव सिंह बिष्ट, धीरज सिंह, मोहन सिंह, जमन सिंह, राजेन्द्र सिंह, उपप्रधान जसवन्त सिंह, मन्जू देवी आदि उपस्थित थे।
  


बुधवार, 23 मार्च 2016

हरिदत्त बहुगुणा का जाना उततराखण्ड राज्य आन्दोलन के एक युग की विदाई है।

हरिदत्त बहुगुणा का जाना उततराखण्ड राज्य आन्दोलन के एक युग की विदाई है। 
उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के योद्धा, विचारक, शिक्षक, राजनैतिक, सामाजिक कार्य कर्ता और सबसे अधिक एक सच्चे इंसान हरि दत्त बहुगुणा हमारे बीच नही रहे। काफी समय से यकृत की बिमारी बाद एक साल पहले उनके आंत में संक्रमण निकल आया था और दिल्ली के गंगा राम अस्पताल से इलाज चल रहा था। 
कल 22 मार्च 16 को सायं उत्तराखण्ड के महान योद्धा ने हरिद्वार में अपने आवास सांस ली। धर्मपत्नी, पुत्र, पुत्रवधू, पोती सहित परिवार को विलखता छोड गये स्व बहुगुणा हमारे पारिवारिक मित्र और संरक्षक थे। कवि हृदय, स्पष्ट वक्ता और लगन के धनी बीएचईएल के शिक्षक हरिदत्त बहुगुणा उत्तराखण्ड क्रांति दल के वरिष्ठ नेताओं में शुमार थे और राज्य के हर गांव, अली मौहल्ले से उनका परिचय था। वे राज्य की दशा -दिशा के प्रति चिन्तित रहने वाले मार्गदर्शी थे और सन् 1991 में उक्रांद द्वारा बनाये गये उत्तराखण्ड के ब्लू प्रिंट बनाने वाले मार्गदर्शियों में एक भी। 2009 में उक्रांद छोड कांग्रेस में शामिल होने के बाद भी वे उत्तराखण्ड के मुद्दों पर सक्रीय थे। रीजनल रिपोर्टर सहित कई पत्र- पत्रिकाओं में उनके ेलेख बराबर प्रकाशित होते थे जो लेखन और राज्य की चिन्ताओं का दस्तावेज हैं।
आत्मा की अमरता और शरीर की जीर्णता के तर्क के साथ उनका चले जाना जीवन की वे अनचाही और अनिवार्य स्थितियां हैं जिन्हें स्वीकार करना ही होता है। ऐसे महापुरुष जिनके व्यवहार में हमेशा स्नेह टपकता हो, जो विद्वता से अपनी बातें कहता हो और जिससे शिष्टाचार भी शिष्टता सीखता हो और जो उततराखण्ड की परिकल्पनाओं का साक्षी ही नही सर्जक भी हो ऐसे मानव की कमी हमेशा खलेगी।
ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दें, और शोक संतृप्त परिवार को दुख सहने की सामथ्र्य दे।
ओउ्म शान्ति-शान्ति-शान्ति

रीजनल रिपोर्टर मार्च अंक ; जन सरोकारों को प्रतिवद्ध- उत्तराखंड में होली और सरोकार

उत्तराखंड में होली और सरोकार
स्वागत है ऋतुराज तुम्हाराः संपादक पुरुषोत्तम असनोड़ा की संपादकीय के साथ रीजनल रिपोर्टर का मार्च अंक होली और उत्तराखंड के सरोकारों को दर्शाता है। अंक में शामिल आलेखों की संक्षिप्त चर्चा के साथ रीजनल रिपोर्टर के लेखकों, पाठकों व विज्ञापन दाताओं को होली की शुभकामनाएं प्रेषित करते हैं-
कवर स्टोरी
- होरी के दिनन में, अब न करत मो से रंज: गौरी शंकर थपलियाल
- दो सौ साल से ज्यादा पुरानी है श्रीनगर की होलीः कृष्णानंद मैठाणी
- टिहरी की होली, बस यादें ही शेष: आलोक प्रभाकर
- कुमाऊं की होली का है एक अलग अंदाजः जगमोहन रौतेला
- रंग डारि दियो हो अलबेलिन मेंः गिर्दा
- गिरदा के लिए होली भी रही जनसंघर्ष का पर्यायः राजीव लोचन साह
- हां! आज होली है: अरूण कुकसाल
स्थाई स्तंभ
मंथन- हाई स्पीड ट्रेन का आगाजः भरत झुनझुनवाला
खबरों की खबर- छलावा साबित हुए रोजगार के दावे, जायज मांग करना भी गुनाह बना, अतिथि शिक्षकों का दबावः सीताराम बहुगुणा ।
प्राथमिक विद्यालयों में तेजी से घट रही है छात्र संख्याः ईश्वरी दत्त जोशी ‘ईश्वर’।
सफलता की कहानी राजेंद्र सिंह बिष्टः प्रकाश जोशी।
पुस्तक ‘लोक का बाना’ का विमोचन, चकबन्दी पर सरकार को दिए सुझावः रीजनल रिपोर्टर ब्यूरो।
नगरनामा- गैरसैंणः सबके दिलों का सैंण: एल. मोहन कोठियाल
न्यू मीडिया गुरू- वेबसाइटों का बढ़ता दायराः जयप्रकाश पंवार ‘जेपी’
स्वास्थ्य परिचर्चा - नियम पूर्वक करें व्यायाम: डाॅ.सुशान्त मिश्र ;आयुर्वेदाचार्यद्ध
जानें अपने राज्य को - महिला सशक्तिकरण एवं उत्तराखंडः जी.एस.नेगी
बाल मन की उड़ान- अभिसार काला, लक्ष्य बहुगुणा, प्रणव नैथानी, बाल कहानी- चिकचिक और हवाः डाॅ.उमेश चमोला।
कविता- मन की तरंग: प्रो.राजाराम नौटियाल
बकम बम जि बकम बम - हो हो होलक रे: उर्मिल कुमार थपलियाल
विशेष आलेख
असल मुद्दों को भटकाने की नकली लड़ाईः जगमोहन रौतेला
द ग्रेट खली रिटर्न के बाद उत्तराखंड की राजनीति को मिला नया मुद्दाः विपिन बनियाल
चुनिंदा ब्यूरोक्रेटों के चंगुल में सरकारः वीरेंद्र पैन्यूली
जनपक्षीय पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियांः शीना उपाध्याय
जेएनयू का छात्र रहने पर गर्व है मुझेः डाॅ.शमशेर सिंह बिष्ट
सवाल तो हैं, पर जवाब देगा कौनः गजेंद्र नौटियाल
विधायकों के पास सुरक्षित 71 प्रतिशत विधायक निधि ः नदीम उद्दीन
दोहरे आदेशों के बीच झूलती शिक्षा व्यवस्थाः केपीएस अधिकारी

रविवार, 20 मार्च 2016

होली की घूम- महिलाओं व बच्चों ने संभाला मोर्चा

 गैरसैंण, 20 मार्च,
       गैरसैंण में होली की धूम शुरु हो गयी है। सलियाण बैण्ड व गैरसैंण में महिलाओं की होली का रंग जमा है तो गांव- गांव से बच्चे मजीरे और खडताल के साथ होली के लिए निकले है।
    होली खेले गिरजापति नन्दन--की गणेश वन्दना  से प्रारम्भ खेली जा रही होली मेरों रंगीली देवर घर ऐं रौ छ की ठिठोली तक पहुंच जाती है। राधारानी और कृष्ण कन्हैया  के साथ बृज की सुमधुर होली का गायन श्रोताओं को भावविभोर करता है तो स्वांग करती नायिका हंसने-हसाने की सफलता आयोजन का पूर्णता देती है । 
  यायावर जन चेतना समिति ने होली के पारम्परिक सांस्कृतिक स्वरुप को बरकरार रखने, रंगों के प्रयोग और नशा मुक्त होली मनाने के लिए जन चेतना अभियान प्रारम्भ किया है।




बुधवार, 16 मार्च 2016

कांग्रेस-भाजपा को सत्ता चाहिए वह घोडे या गधे किसी पर भी सवार होकर आये

            उत्तराखण्ड में सरकार, विपक्ष और मीडिया के लिए मुद्दों का लगातार टोटा बना हुआ है। इसीलिए 15 साल में पहाडों के गांव खाली होने, मैदानी कृषि पर आवासीय व्यवस्था का बोझ बढने और खेत-खलिहानों के बंजर होने सहित तमाम समस्याओं के बजाय सतही मुद्दे उछालने और उसी बहस को लगातार परोसने, बनाये रखने में किसका हित है क्या कोई बतायेगा?
         एक निरीह जानवर जिसे शक्तिमान कहा जा रहा है पुलिस स्कैडन का कांस्टेबल दर्जे का घोडा है जिसे भारतीय जनता पार्टी के 14 मार्च को हुए विधान सभा घेराव के दौरान विधायक गणेश जोशी द्वारा लाठी से पिटने के बाद पैर टूटने की बात कही जा रही है। एक निरीह जानवर के साथ बर्बरता की कठोर शब्दों में निंदा होनी चाहिए। कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाले पुलिस को उस पर एफआईआर मिल चुकी है और उसे सम्यक कार्यवाही करनी चाहिए।
सवाल घोडे के दर्द और जान से अधिक सत्ता के लिए तिकडमी चालों का है।उत्तराखण्ड के उन मुद्दों को लेकर हैं जिन पर                  सरकार और विपक्ष आंख मंद लेता है। मीडिया को काठ मार जाता है। जिस घोडे पर सरपट सवारी का मोह कोई संबरण नही कर पा रहा वह उत्सुकता 23 जनवरी को उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध आन्दोलनकारी पीसी तिवारी व रेखा धस्माना को जिन्दल के गुण्डो ंद्वारा पीटे जाने के समय कहां गयी थी? प्रभात ध्यानी और मुनीश अग्रवाल पर खनन माफिया द्वारा किया गया जान लेवा हमला पक्ष-विपद्वा की तकरीर नही बनती। स्वतंत्रता सेनानी 94 वर्षीय बुजर्ग देवेन्द्र सनवाल और तिरंगे का अपमान उन्हें विचलित नही करता। सडक से सदन तक हंगामा मचाने वाले लोग क्या जिन्दल के बंधक हैं जो उसके उसके कुकृत्यों पर मौन साध लेते हैं?
            व्ीर माधोसिंह मलेठा की कर्मभूमि को बंजर बनने से रोकने की मुहिम लिए हिमालय बचाओ आन्दोलन के नेता समीर रतूडी 23 दिन से अनशन पर हैं उनकी मांग आन्दोलनकारियों से मुकदमे हटाने की है। लेकिन सरकार और विपक्ष पहाड क ेजल-जंगल-जमीन के सौदों पर न केवल खामोश हैं बल्कि वे किसी न किसी रुप में माफिया को सहयोग कर रहे हैं।
कांग्रेस हो या भाजपा और उनका दुमछल्ला उत्तराखण्ड का वह दलाल मीडिया जिसे बेगुनाह युवाओं की माओवादी के रुप में गिरफ्तारी सरकार की सबसे बडी बहादुरी लगती है और वह पन्ने दर पन्ने, एपीसोडदर एपीसोड उत्तराखण्ड में माओवाद के पसरने और सरकार बहादुर की बहादुरी के किस्सों से धन्य-धन्य होता है। जबकि न्यायालय में एक भी मामला नही टिकता है और सभी गिरफ्तार युवा रिहा हो जाते हैं। 80 के दशक में कोटखर्रा में भूमिहीनों की लडाई लडते उत्तराखण्ड संघर्ष वाहिनी के कार्यकर्ताओं की पिटाई किस किस राजनेता को याद है? बिन्दुखत्ता मे ग्रामीणों के हक-हकूक को लेकरं सीपीआई एमएल कार्यकर्ताओं पर कितनी बार लाठी चार्ज हो गया क्या किसी मीडिया ने हिसाब रखा है?छोटी काशी हाट को बचाने के लिए वहां ग्रामीण आन्दोलित हैं लेकिन उनकी परवाह किसी को नही। 
             तीन दिन से चल रही बहस और समाचार केवल एक लाइन में सिमटने चाहिए थे दोषी के खिलाफ कार्यवाही और घोडे को समुचित इलाज। लेकिन मुद्दों की राजनीति से परहेज रखने वाले कांग्रेस और भाजपा के लिए तो कुर्सी और केवल कुर्सी ही पहली और अंतिम प्रारथमिकता है। वह चाहे घोडे या गधे पर सवार होकर ही क्यों न आये। उत्तराखण्ड की परिकल्पनाऐं, शहीदों के सपने तो जिन्दल, शराब, खनन व भू माफिया के यहां गिरवी रख चुके हैं। तब तिरंगे का अपमान भी हो तो उन्हें काठ मार तायेगा।
         मुख्यमंत्री जी! शक्तिमान के साथ फोटो ख्ंिाचाकर जिस राजनैतिक लाभ में आप अपने को पा रहे हैं जिन्दल से नजदीकी और नैनीसार के हमलावरों की गिरफ्तारी रोकना आपको उससे भी महंगा पडने वाला है।

बुधवार, 9 मार्च 2016

समीर रतूडी के जीवन से न खेले सरकार, आन्दोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे अति शीघ्र वापस हों

          हिमालय बचाओ आन्दोलन के नेता समीर रतूडी ने मंगलवार को जमानत लेने से इंकार कर आन्दोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जता दी है। जब न्यायिक मजिस्टेªट ने जमानत न लेने के कारण दूसरी बार उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
         जेल में 17वें दिन अनशन पर रहे समीर रतूडी के स्वास्थ्य की चिन्ता होना लाजिमी है। मलेथा में क्रेशरों के विरोध में हुए आन्दोलन में माफिया की हार को खीज में बदलते देर नही लगी और समीर रतूडी व साथियों पर मुकदमे थोप दिए गये। समीर उन मुकदमों को फर्जी बताकर जमानत नही लेने पर अडिग हैं।
        सरकार का माफिया को समर्थन की बात हर आन्दोलन में उजागर होती रही है और आन्दोलनकारियों पर मुकदमे वापस लेने की घोषणा के बावजूद समीर रतूडी की जिन्दगी से खिलवाड हो रहा है। मुकदमे वापसी में जितनी देर होगी वह सरकार की हृदयहीनता और आन्दोलनकारियों को सबक सिखाने जैसे कुत्सित प्रयासों में शुमार होगा।
         हिमालय बचाओ आन्दोलन के नेता समीर की चिन्ता राज्य के उन संघर्षशील ताकतों और आम जनता को भी करनी चाहिए जिनकी लडाई वे लड रहे हैं। साढे सात किग्रा वजन घटने के साथ उन्हें कमजोरी और दूसरी दिक्कतें हो रही हैं। टिहरी जेल में समीर का संघर्ष  उत्तराखण्ड के उस आम आदमी का संघर्ष है जो उत्तराखण्ड की बेहतरी का सपना देखता है जो माफिया मुक्त उत्तराखण्ड की लडाई लडता है और उसके लिए शान्ति पूर्ण तरीके से किसी भी सीमा तक संधर्ष का जज्बा रखता है।  समीर आपके आन्दोलन उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी के नाते हमारा पूरा-पूरा समर्थन और सरकार से मांग कि आन्दोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे अति शीघ्र वापस हों।
         खबर लिखे जाने तक समीर रतूडी को देहरादून के जाॅलीग्रांट अस्पताल में रिफर कर दिया गया है जहां चिकित्सक उनका उपचार कर रहे हैं।

सोमवार, 7 मार्च 2016

रीजनल रिपोर्टर ने रखा वेव दुनिया में कदम , वेव साइड लांच


श्रीनगर, 7 मार्च, सरोकारों से साक्षात्कार की पत्रिका रीजनल रिपोर्टर ने वेव दुनिया में प्रवेश स्व संपादक द्वय के पथपर चलते हुए वेव साइड लांच हुई है। प्रकाशक एवं संयुक्त संपादक गंगा आसनोडा थपलियाल ने कहा- संपादक द्वय के महाप्रयाण की यह तिथि वेव साइड लांच कर रीजनल रिपोर्टर परिवार उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहा है।
   कोमल व रुचि द्वारा बनाई गयी वेवसाइड में होम पेज, विजन, विशेष सहयोग, एडीटारियल, एडीटोरियल बोर्ड, समदर्शी की कलम से, कवर स्टोरी, न्यू मीडिया गुरु, बकम बम जी बकम बम व जानें अपने राज्य को पृष्ठ हैं तो रीजनल रीपोर्टर का ब्लाग, ट्वीट, संपर्क और फोटो गैलरी के आंपशन हैं।
  पत्रिका की संरक्षक सुशीला थपलियाल के हाथों वेवसाइड लांच हुई। इस अवसर पर संपादक पुरुषोत्तम असनोड़ा, कार्यकारी संपादक एल मोहन कोठियाल, प्रकाशक एवं संयुक्त संपादक गंगा असनोड़ा थपलियाल, प्रसार प्रवन्धक अंजना भट्ट घिल्डियाल, प्रो एस एस रावत, कृष्ण कांत चंदोला, प्रतिभा चंदोला, गिरजा शंकर थपलियाल, गौरी शंकर थपलियाल, शशि मोहन कण्डवाल, तृप्ति कण्डवाल, योगेन्द्र मोहन बडौनी, अरुणा बडौनी, लक्ष्मी प्रसाद बडौनी, शशांक कण्डवाल, लीला असनोड़ा, जयकृष्ण पैन्यूली, के के थपलियाल, सुधीर शुक्ला, कुसुम लता थपलियाल, हिमांशु थपलियाल, महेशगिरी, संदीप रावत, राम कृष्ण पोखरियाल, राजेश सुयाल, सुमित्रा जोशी, सीना उपाध्याय, कंचन नेगी, पूजा सहित बहुत से लोग उपस्थित थे।,     


मंगलवार, 1 मार्च 2016

चकबन्दी दिवस कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम







गैरसैंण, 1 मार्च,
   राजकीय इण्टर कालेज मैदान में चैथे चकबन्दी दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। काफल ग्रुप राजकीय जूनियर हाई स्कूल दिवागाड के बच्चों द्वारा बीस लोकनाट्यों पर आधारित संक्षिप्त पांडव नृत्य पेश किया गया वहीं महिला मंगल दल बछुवाबाण की महिलाओं ने पारम्परिक परिधानों में नन्दा की चांछडी लोकनृत्य प्रस्तुत किया।
  कार्यक्रमों की शुरूआत स्थानीय लोकगायिका सुनीता रावत ने लोकधुनों पर आधारित चकबन्दी गीत ‘‘देख तुम्हे धरा पुकारती’’ और नन्दीसार महाराष्ट्र से आये युवा किसान रवीन्द्र कुंवर ने ध्यान सिंह नेगी द्वारा रचित गढवाली चकबन्दी गीत ‘‘पुंगडों की तितरी बितरी देखी अजब गजब होई बकि बात’’ गाकर स्रोताओं को भावविभोर किया।

चकबंदी दिवस कार्यक्रम में चकबंदी नियमावली बनने तक दोनों मण्डलों के दो-दो गांवों में चकबन्दी करने की मांग 1 मार्च को चकबंदी और कृषि दिवस घोषित करने की मांग नहीं पंहुचे हरक सिंह रावत


गैरसैंण, 1 मार्च,
 गरीब क्र्रांंित अभियान द्वारा आयोजित चकबन्दी दिवस कार्यक्रम में गढवाल व कुमांऊ मंडल के कम से कम दो-दो गांवों में चकबन्दी प्रारम्भ करने, चकबन्दी के लिए जीवन पर्यत्न काम कर रहे गणेश सिंह गरीब के जन्म दिन को चकबन्दी और कृषि दिवस घोषित करने प्रचार-प्रसार में गरीब क्रांति अभियान का सहयोग लेने तथा ब्लाक स्तर पर किसान विद्यालय स्थापित करने की मांग की गयी।
  गोष्ठि में ग्राम ब्लाक एवं जिला स्तरीय चकबन्दी जागरूकता गोष्ठियों एवं विधेयक परिचर्चा पर प्राप्त सुझाव एवं समाधानों का 10 पेज का दस्तावेज चकबन्दी सलाहकार समिति के अध्यक्ष केदार सिंह रावत को सौंपा गया ताकि राज्य में सर्वस्वीकार्य चकबन्दी की राह आसान हो सके। दस्तावेज में चकबन्दी लागू करने सम्बन्धी सुझाव में 14 बिन्दु सुझाये गये जिसमें भौगोलिक परिस्थिति, जमीनों की गुणवत्ता, जमीन हस्तान्तरण की प्रक्रिया आदि शामिल किये हैं। दस्तावेज चकबन्दी के लिए वातावरण सृजन पर जोर देता है ताकि लोग स्वेच्छा से चकबन्दी अपनाये। नई पीडी में कृषि औद्याकनकी को प्रोत्साहित करने के लिए 9 बिन्दुओं के सुझाव दिये गये हैं वहीं विभिन्न स्तरों पर जनता द्वारा उठाये गये व्यवहारिक सवालों का विवरण भी दिया गया है ताकि चकबन्दी से जुडे नियोजकों को नीति और कानून बनाने में आसानी हो।
  मैती आन्दोलन के जनक कल्याण सिंह रावत की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम उन्होंने कहा- खेती और गांव बचाने के लिए कृषि शिक्षा को महत्व देना होगा जैसे हिमांचल ने अपने प्रदेश में किया है। कृषिमंत्री डा हरकसिंह रावत के कार्यक्रम में शामिल होने आश्वासन के बावजूद न पहुंचने पर गरीब क्रांति अभियान के कार्यकर्ताओं ने रोष व्यक्त किया।
 एल मोहन कोठियाल और मनीष भट्ट के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में चकबन्दी आन्दोलन के प्रणेता गणेश सिंह गरीब ने कहा कि सरकार ने सलाहकार समितियां तो बनाई है लेकिन व्यवहारिक रूप में इस ओर तेजी से काम करने की जरूरत है। आयोजन के मुख्य अतिथि और चकबन्दी सलाहकार समिति अध्यक्ष केदार सिंह रावत ने कहा चकबन्दी कानून का ड्राफ्ट मुख्यमंत्री को दिया गया था तथा इस बजट सत्र में हम उसे पारित करने का प्रयास किया जायेगा।
    इस अवसर पर मंगल सिंह नेगी, चतुर सिंह नेगी, कपिल डोभाल, बलवन्त गुंसाई, विकास ध्यानी, अनुप पटवाल, विजय सुन्दरियाल, मनीष सुन्दरियाल, रामकृष्ण पोखरियाल, गिरीश डिमरी, सरस्वती देवी, तनु पन्त, क्षेत्र प्रमुख सुमति बिष्ट, पूर्व प्रमुख जानकी रावत, सभासद कुसुमलता गैडी, रोशन बिष्ट, गढवाल महासभा के अध्यक्ष योगम्बर सिंह रावत, रवीन्द्र कुंवर, नितिन कुंवर, दिलीप सिंह रावत, रंगकर्मी अमित गुंसाई, उद्यान विशेषज्ञ केवलानन्द तिवारी आदि उपस्थित थे।
   गरीब क्रांति के संयोजक कपिल डोभाल ने आगन्तुकों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मेलन में आने पर धन्यवाद किया।






सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

चकबन्दी दिवस कार्यक्रम कल, आज निकली रंग यात्रा कृषि मंत्री हरकसिंह रावत हैं मुख्य अतिथि



   गैरसैंण, 29 फरवरी, झमाझम वर्षा के बीच चकबन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर निकली रंगयात्रा चकन्दी के नारों जनगीतों और स्लोगन की तख्तियों के साथ गैरसैंण की सडकों पर एक बार आन्दोलन की यादें ताजा कर गयी।
  गरीब क्रांति अभियान द्वारा चकबन्दी आन्दोलन की पुरोधा गणेशसिंह गरीब के जन्म दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में कुषि मंत्री डा हरकसिंह रावत, विधान सभा उपाध्यक्ष डा अनुसूया प्रसाद मैखुरी,चकबन्दी सलाहकार अध्यक्ष केदारसिंह रावत और स्वयं गणेशसिंह गरीब शिरकत कर रहे हैं।
   रामलीला मैदान में वीर चन्द्रसिंह गढवाली की मूर्ति के सामने से शुरु हुई रंग यात्रा में ‘ले मशालें चल पडे हैं लोग मेरे गांव के,‘ जनगीत, खेतों की दूरी मिटानी है- चकबन्दी जरुरी है, पहाड बचाने हैं-चकबन्दी लानी है आदि नारों के साथ चकबन्दी के स्लोगन की लिए कार्यकर्ताओं ने रंगयात्रा निकाली जो चैराहा, डाक बंगला रोड, तहसील कार्यालय, वीर चन्द्रसिंह गढवाली मार्ग होत हुए रामलीला मैदान में समाप्त हुई।
  रंगयात्रा में गरीब क्रांति अभियान संयोजक कपिल डोभाल, ललित कोठियाल, बी मोहन नेगी, संजय बुढाकोटी, अमित गुसांई, विकास ध्यानी, डी के तिवारी, मैती आन्दोलन के कल्याणसिंह रावत, अनूप नेगी, तन्नू पंत, चतुरसिंह नेगी, अनूप पटवाल, गजेन्द्र नौटियाल, कुलदीप नेगी, पुरुषोत्तम असनोड़ा आदि ने शिरकत की।

शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

मुस्कराइये! कि आप डेढ लखिया हो गये, मलेथा और नैनीसार की बात जेल भेजेगी


पुरुषोत्तम असनोड़ा
   उत्तराखण्ड में प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक आय एक लाख चैवन हजार आठ सौ अठ्ठारह रु अनुमान है जो गत वर्ष की 139184रु से 7.6 प्रतिशत अधिक है। 7.65 प्रतिशत विकास दर ंसे राष्ट्रीय औसत के लगभग है जबकि प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से राष्ट्रीय औसत 93231रु है। अर्थ एवं संख्या निदेशालय के आंकडे 2011-12 से लगातार बढोतरी प्रदर्शित कर रहे हैं। 2011-12 में उत्तराखण्ड की प्रति व्यक्ति औसत आय 85372रु थी।
  आय में यह वृद्धि तब छठें वेतनमान से राज्य कर्मियों और शिक्षकों को हुए लाभ का कारण बताया गया था। सातवें बेतन आयोग लागू होने के बाद अगले वर्ष यह व्द्धि और और आगे जायेगी। अंाकडे तो आंकडे हैं कृषि विकास दर 3.09 प्रतिशत की वृद्धि बताती है कि उनकी सच्चाई क्या है? गांव खली हुए खेत बंजर हो गये, जंगली जानवरों का आतंक बढ गया, मैदानों में पहाड के पलायन का असर वहां की कृषि भूमि में रिहायशी मकान बनने से सिकुडाहाट हुई, और विकास दर बढ गयी?
  सडक, बिजली, पानी,यातायात, शिक्षा, चिकित्सा कार्यालयों के काम काज पर आय वृद्धि का असर क्यों नही दिख रहा है? 338 गांवों जो के दौर से  रहने के योग्य नही रहे हैं और विस्थापन व पुनर्वास की आवश्यकता के लिए धन और भूमि मुहैया नही हो रही है। सरकारी आंकडे पहाडी जिलों डेढ लाख घरों में ताले लटके होने की बात स्वीकार रहे हैं।  सडकों की हालत एक दशक पहले जो थी वह नही सुधरी है। शिक्षा में कई प्रयोगों के बावजूद सरकारी विद्यालय इसलिए बन्द हो रहे हैं कि वहीं छात्र नहीं हैं। चिकित्सालयों में डाक्टरों को ला पाना तो दूर सरकार खुद कहती है चिकित्सक पहाड नही चढना चाहते। रोज नई घोषणाऐं और फिर धनाभाव का रोना, अजब- गजब का प्रदश हो गया है उत्तराखण्ड। 
       विकास और शिक्षा की कहानी नैनीसार से शुरु हो गयी जिन्हें विकास और शिक्षा चाहिए वे जिन्दल जैसे माफिया को जमीन देने पर एतराज न करें जो  करेंगे वे विकास व शिक्षा के विरोधी हैं। माधोसिंह मलेठा की कर्म भूमि में क्रेसर लगाने वाले उत्तराखण्ड की अर्थ व्यवस्था के मित्र हैं और जो मलेथा की उपजाऊ भूमि जिसके लिए वीर माधोसिंह ने अपने पुत्र की बलि दे दी थी को बंजर बनने से बचाने वालों को जेल ठूंस दो। मुख्य मंत्री द्वारा प्रारम्भ की गयी यात्रा रुकने वाली नही है जो उन्होंने हलद्वानी में कह दिया है।
 निर्जन गांव की आखिर कहानी है क्या? वही विकास, वही शिक्षा-चिकित्सा, सडक, पानी, बिजली और रोजगार। उत्तराखण्ड के जिन घरों में ताले लगे उन्हें अपने घर बन्द करने का शौक नही रहा होगा। अभी गांव की जमीन पर माफिया बिठा दो, कल उन घरों में, अगले दिन देश की सीमा के गांवों में विदेशी बसाओ और किस्सा खत्म। सब निर्जन हो रहा है इसलिए किसी को विकास, किसी को शिक्षा, किसी को रोजगार और जो बचे उसे गुण्डागर्दी के लिए ही सही दे दो उत्तराखण्ड की जमीन, हवा-पानी। दे भी दिया है जल विद्युत परियोजनाऐं ने लूट तो लिए हैं संसाधन।
शायद उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के 15 सालों में जनता ने खुश रहने का प्रयास नही किया। जनता जल विद्युत योजनाओं की खिलाफत करते रहे और लूटने और लुटवाने में मसगूल रहे।
जनता पिटती रही और वे पीटते रहे। उन्हें खनन-शराब से आ रही  अकूत संम्पदा की फिक्र थी और जनता को उसे बचाने की। जब रास्ते अलग थे टकराव कीं न कही होना थ। वह मलेथा या नैनीसार कहीं भी हो सकता था। सत्ता पहले ही दहाड रही थी- खाता न वही हम ही सही, अब तो आंकडे भी हैं- सबको डेढ लखिया बना दिया अब भी रोते हो रोओ। हम तो अपनी मन की करेंगे ही, चाहे उत्तराखण्ड जिसके हाथ बिक जाये। 
     

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2016

शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज अस्वस्थ, कोटेश्वर आश्रम में हो रहा है उपचार


 बदिराश्रम ज्योतिर्पीठ के शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम जी महाराज अस्वस्थ हैं और रुद्र प्रयाग के कोटेश्वर महादेव गाभ्म में उपचार चल रहा है।
  73 वर्षीय विद्वान संत, धर्म के मर्मज्ञ और बदरीकाश्रम ज्योतिर्पीठाधीश्वर माधवाश्रम जी महाराज वेद, धर्म के विद्वान होने के साथ ही जनसरोकारों से जुडे संत हैं।
  उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन, शराबबन्दी आनदोलन और गैरसैंण राजधानी आन्दोलन में प्रत्यक्ष भाागीदारी करते रहे हैं। पिछले दिनों बे्रन हैमरेज के चलते उन्हें पीजीआई चंडीगढ में उपचार दिया गया था, जहां से महाराज जी ने कोटेश्वर आश्रम आने की इच्छा जताई थी।
  महाराज के शिष्य वशिष्ठ जी ने बताया कि महाराज के स्वास्थ में सुधार है और आश्रम में ही चिकित्सक उन्हें पी जीआई के निर्देशों के अनुसार उपचार दे रहै। श्रद्धालु शंकराचार्य महाराज के दर्शनों के लिए बडी संख्या में रोज वहां पहुंच कर स्वास्थ्य लाभ हेतु प्रार्थना कर रहे हैं।
  गैरसैंण से उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी पुरुषोत्तम असनोड़ा, यायावर स्मृति समिति महासचिव डा सी एस भण्डारी व जयसिंह नेगी ने  कोटेश्वर आश्रम में शंकराचार्य महाराज के दर्शन किए और भगवान शंकर से उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की।