गुरुवार, 28 फ़रवरी 2019

विज्ञान दिवस पर विशेष- चन्द्र शेखर बैंकटरमन

विज्ञान दिवस और प्रोफेसर रामन्

देवेन्द्र मेवाड़ी (सुप्रसिद्ध विज्ञान लेखक, रीजनल रिपोर्टर में स्तंभकार)

आज विज्ञान दिवस के अवसर पर, आइए अपने देश के नोबेल पुरस्कार विजेता प्रख्यात वैज्ञानिक प्रोफेसर चंद्रशेखर वेंकट रामन् की स्मृति को नमन करें। उन्होंने जो खोज की थी, वह ‘रामन् प्रभाव’ कहलाती है। सर चंद्रशेखर वेंकट रामन् ने 28 फरवरी 1928 को ‘रामन् प्रभाव’ की खोज की थी। इसलिए इस महान खोज की याद में इसी दिन ‘विज्ञान दिवस’ मनाया जाता है। सन् 1928 लीप वर्ष था यानी उस वर्ष फरवरी माह 29 दिन का था। और, 29 फरवरी 1928 को प्रसिद्ध समाचार एजेंसी ‘एसोसिएटेड प्रेस’ के जरिए प्रोफेसर रामन् ने इस खोज की घोषणा की थी।
यह मेरा सौभाग्य था कि मैंने सन् 1966-67 में प्रोफेसर चंद्रशेखर वेंकट रामन् को अपनी आंखों से देखा। वे तब दिल्ली की राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला में व्याख्यान देने के लिए आए थे। मैं तब भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान यानी पूसा इंस्टीट्यूट में मक्का की फसल पर शोध कार्य कर रहा था। प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक डा. एम. एस. स्वामीनाथन संस्थान के निदेशक थे। प्रोफेसर रामन् का व्याख्यान सुनने के लिए हम कई वैज्ञानिक डा. स्वामीनाथन के साथ राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला के सभागार में पहुंचे थे। उस दिन प्रोफेसर रामन् ने फूलों के रंगों पर अपना व्याख्यान दिया था। बहुत सारगर्भित व्याख्यान था। उन्होंने बताया था कि वे अपनी फूलों की वाटिका में जीवित फूलों के रंग पर यह शोध कार्य कर रहे हैं। उनका कहना था कि जो लोग फूलों को तोड़ कर प्रयोगशाला में उनके रंगों पर काम करते हैं, वे रंगों के सच तक कभी नहीं पहुंच पाएंगे क्योंकि वे मृत फूलों पर काम करते हैं। इस सच का तो पुष्प वाटिका की प्रयोगशाला में ही पता लग सकता है।
आज हम सब एक संकल्प कर सकते हैं कि आज से हम अपने प्रिय प्रोफेसर रामन् का नाम हिंदी में सही लिखेंगे और इस तरह उनके नाम का मानकीकरण करेंगे।  आज खबरों में उनका नाम तरह-तरह से लिखा गया है- कहीं वे वेंकटरमण हैं तो कहीं वेंकटरमन, कहीं वेंकटारमन तो कहीं वेंकटारामण, कहीं सी.वी.रमण।
‘नवनीत’ मासिक के पूर्व संपादक श्री नारायण दत्त ने जनवरी 2005 में ‘आंचलिक पत्रकार’ मासिक में एक लेख लिखा था: ‘चंद चर्चित नाम और उनके शुद्ध रूप।’ उसमें उन्होंने लिखा था, “उनका पूरा नाम था- चंद्रशेखर वेंकट रामन्। इसमें ‘चंद्रशेखर’ उनके पिता का नाम था। ‘वेंकटरामन्’ उनका अपना नाम जिसे वे दो टुकड़ों में ‘वेंकट रामन्’ लिखते थे।
वेंकटराम में तमिल का ‘न्’ जोड़ने से ‘वेंकटरामन्’ बनता है। तमिल का यह ‘न्’ प्रत्यय अकारांत पुल्लिंग शब्दों में जुड़ता है और प्रथमा एकवचन को सूचित करता है। सो तमिल का ‘वेंकटरामन्’ संस्कृत के ‘वेंकटरामः’ के बराबर है।”
लेख में उन्होंने यह भी बताया था कि वेंकटरमण नाम भी दक्षिण भारतीयों में होता है, लेकिन कन्नड और तेलुगु बोलने वालों में ही, तमिल भाषियों में वह ‘वेंकटरमणि’ हो जाता है।
प्रोफेसर चंद्रशेखर वेंकट रामन् की स्मृति को विनम्र नमन।

सुरेंद्र बने व्यापार संघ अध्यक्ष

गैरसैंण व्यापार संघ चुनाव
सुरेंद्र चौथी बार बने अध्यक्ष
सुरेश कोषाध्यक्ष व मुकेश महामंत्री निर्वाचित
गैरसैंण,
व्यापार संघ के त्रिवार्षिक चुनाव में सुरेंद्र सिंह बिष्ट ने चौथी बार चुनाव जीत लिया है। जबकि कोषाध्यक्ष पद पर सुरेश लाल साह और महामंत्री पद पर मुकेश ढौंडियाल पर निर्वाचित हुए हैं।
   सुरेंद्र सिंह बिष्ट ने कुल 339 पड़े मतों में 151 मत पा कर निकटतम प्रतिद्वंद्वी रणजीत सिंह शाह को 14 मतों से हराया। रणजीत सिंह शाह को 137 मत मिले, जगदीश टम्टा को 24, गजेन्द्र सिंह को 13 व धनीराम को 12 मतों पर संतोष करना पड़ा। तीन मत रद्द हुए।
  कोषाध्यक्ष पद पर सीधी टक्कर में सुरेश साह ने  195 मत पा कर विजय नेगी को 68 मतों से पराजित किया, विजय को 128 मत मिले, 9 रद्द व 8 नोटा रहे।
  महामंत्री पद पर मुकेश ढौंडियाल ने182 मत पाकर बृजमोहन राज को 34 वोटों से हराया। बृजमोहन को 146 मत मिले, 11 मत नोटा के थे।
  चुनाव को सम्पन्न कराने के लिए  पांच सदस्यीय चुनाव मण्डल गठित किया गया था जिसमें पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष गंगा सिंह पंवार, सेवा निवृत्त प्रधानाचार्य एल पी सती, सेवा निवृत्त प्रवक्ता सुरेंद्र सिंह नेगी, वरिष्ठ व्यवसायी डॉ जयानंद गैड़ी व व्यापार संघ के पूर्व महामंत्री महेंद्र सिंह पंवार थे।

बुधवार, 27 फ़रवरी 2019

गैरसैंण में हिमपात

गैरसैंण में मौसम का बड़ा हिमपात हुआ है।
अक्षर कुंज सलियाणा गैरसैंण से प्रकृति की मनोहारी दृश्य

सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के आतंकी कैम्प

भारतीय वायुसेना ने उड़ाये तीन आतंकी कैम्प
प्रात: 3.30 बजे की कार्रवाई
स्थिति की लिए कैबिनेट सुरक्षा समिति की बैठक जारी

पुलवामा हमले पर पाकिस्तान के हील हवाले के आज प्रात:3.30 बजे भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान स्थित तीन आतंकी कैम्पों पर हमला कर उन्हें तहस नहस कर दिया।
   मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वायुसेना के 12 मिराज विमानों ने बालाकोट, चकोटी व मुजफ्फराबाद के जैश, हिजबुल व लश्कर कैम्पों पर हमला किया जिसमें 2
300 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की संभावना है।
  स्थिति की समीक्षा व आगामी रणनीति के लिए दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की की अध्यक्षता में कैबिनेट सुरक्षा समिति की बैठक चल रही है जिसमें रक्षा , गृह, विदेश, वित्त मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार व वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं।
फोटो-एनडीटीवी

शनिवार, 23 फ़रवरी 2019

जिला चमोली- स्थापना दिवस

मैं चमोली हूँ ! -- 59 बरस बाद भी मय्यसर नहीं हो पाई मूलभूत सुविधाएं ! (24 फरवरी - जन्मदिन विशेष)

ग्राउंड जीरो से संजय चौहान!
     
      मैं उत्तराखंड का सीमांत जनपद चमोली हूँ। आज मेरा जन्मदिन है। मेरे मन में बहुत सारे सवाल कौंध रहें हैं। मेरे अंदर एक छटपटाहट सी है। आज मैं अपने मन की बातें आपसे साझा करना चाह रहा हूं।

चन्द्र्मोली से लेकर चमोली, ज्योत्रीमठ से लेकर कत्युरी राजवंश, नंदाराजजात से लेकर रम्माण का सलुड से राजपथ तक का सफ़र बहुत ही गौरवाविन्त कर देने वाला रहा है। आज मेरा भी जन्मदिन है। आज में 59 बरस का हो गया हूं । 24 फरवरी १९६० को पौड़ी जनपद से अलग होकर मेरा गठन हुआ था। जब में महज १० साल का था तो मैंने २० जुलाई १९७० को गौना ताल टूटने की विभीषिका झेली। जिसके दिए जख्म आज भी हरे हैं। उस त्रासदी के बाद मैंने अपना मुख्यालय चमोली कस्बे से गोपेश्वर शिप्ट कर दिया था। १४ साल की उम्र में मैंने दुनिया को जंगल बचाने हेतु पर्यावरण संरक्षण का जादुई मंत्र अंग्वाल ( चिपको आन्दोलन) दिया और देश दुनिया को गौरा देवी का परिचय दिया। लेकिन आज जब चिपको की प्रासंगिकता सबसे ज्यादा है तो गौरा देवी और चिपको की गाथा केवल लेखों, काॅलम, अखबारों तक ही सीमित होकर रह गयी। ३४ साल की उम्र में अलग राज्य आन्दोलन की अगुवाई की, जिसका सूत्रधार में ही हूँ। ३९ साल की उम्र में भूकम्प की विभीषिका झेली। जिसने मेरे भविष्य पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिया।

२००० में अलग राज्य का गठन हुआ, मुझे उम्मीद थी की मेरे गैरसैंण को स्थाई राजधानी का अहोदा मिलेगा और आवाम के सपने पुरे होंगे। लेकिन जल्द ही मेरा भ्रम भी टूट गया। लोगों ने मेरे गैरसैंण को राजधानी आयोग की बोतल में कैद कर दिया। गैरसैंण के नाम पर सबसे ज्यादा मुझे छला गया, अपनी राजनीती चमकाने के लिए लोगों ने मेरे नाम की रोटियां सेंकी और जब मुकाम मिला तो मुझे ही भूल गए। 59 सालों में देश के सबसे बड़े सदन लोकसभा में मेरे जनपद का एक भी व्यक्ति सांसद बनकर नहीं जा पाया।

२००६ में जनपद में आई भारी बारिश ने मेरे कई गांवो को भूस्खलन की जद में ला दिया। जिस कारण से विगत 13
 सालों में 130 से अधिक गांव मौत के मुहाने पर आ चुकें हैं। 13 सालों से इन गांवों के विस्थापन की फाइलें तंत्र के मेजों की रोनक बढ़ा रही है। २ अक्तूबर २००९ को मेरी ५०० साल पुरानी मुखोटा नृत्य- रम्माण को यूनेस्को ने विश्व सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया। इससे पहले २००५ में मेरी फूलों की घाटी और नंदा देवी पार्क को भी विश्व धरोहर घोषित किया जा चूका है। मार्च २०१२ में बंड पट्टी में शराब के खिलाप प्रसिद कंडाली आन्दोलन की सफलता ने मेरा नाम क्रांति शहर मेरठ तक उंचा किया। जून २०१३ में आई हिमालयी आपदा ने मुझे झकझोर कर रख दिया। जबकि 2018 में थराली के सोल घाटी, ढाढरबगड देवाल के कुलिंग व बुराकोट और घाट के मोखमल्ला व कुंडी गाँव में बारिश नें तबाही मचाई। आपदा ने मेरी गोविन्दघाट और पिंडर घाटी का भूगोल ही बदल कर रख दिया था। इन घाटियों में स्थितियाँ अभी सुखद नहीं कही जा सकती। बरसात में लोगो को जान हथेली पर रखकर लकडियों के सहारे नदियों को पार करना यहां मजबूरी बन गई है। लोगों की जिंदगी बल्लियों के संग झूले को विवश है। मेरे तीन संगम केवल आस्था के प्रतीक भर हैं। लेकिन इनको संवारने की योजनाएँ कागजों तक ही सीमित है। २०१४ के भादो के महीने आयोजित हिमालयी महाकुम्भ नंदादेवी राजजात यात्रा में मेरे यहाँ लाखो श्रदालु यात्रा में पहुंचे। सभी लोगों के अथक प्रयासों से उक्त जात निर्विवाद सम्पन्न हुई। इस आयोजन से मेरा हर गांव नंदामय हो गया था। २०१५ और 2016 में गैरसैण में विधानसभा सत्र और बजट सत्र ने गैरसैण राजधानी को लेकर नई उम्मीद जगाई थी। स्थाई राजधानी को लेकर मेरी उमीदों को मानो पंख लग गए थे। लेकिन जब राजनीतिक दलों की सच्चाई मालूम चली तो बहुत दुख हुआ। ये राजधानी के नाम पर केवल राजनीतिक रोटियां सेक रहें है। 26 जनवरी २०१६ को गणतंत्र दिवस की परेड में मेरे रम्माण की प्रस्तुती ने मुझे झुमने को मजबूर कर दिया। मेरे मुख्यालय गोपेश्वर में स्थापित पशुपालन विभाग के निदेशालय के यहाँ से देहरादून स्थानांतरित हो जाने से यहां की रौनक ही चली गयी है। वहीं मंडल में स्थापित जड़ी बूटी शोध संस्थान को खुद संजीवनी की तलाश है। भूकंप की दृष्टि से जोन पांच / अति संवेदनशील श्रेणी में होने के बाबजूद भी मुझे जलविधुत परियोजनाओं के नाम पर खुर्द-बुर्द किया जा रहा है जो भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। मेरे यहां निर्माणाधीन दर्जनो जलविधुत परियोजनाओं को लेकर पर्यावरण के जानकारों का मौनव्रत भी समझ से परे है। मेरे दशोली गढ के कोट कंडारा गांव की होनहार बिटिया दिव्या रावत मशरूम मिशन के जरिये पूरे देश में मेरा नाम भी रोशन कर रही है। मुझे ऐसी बेटियो पर नाज है। मुझ पर प्रकृति ने अपना पूरा खजाना लुटाया- बद्रीनाथ, फूलों की घाटी, औली, हेमकुंड, चिनाप फूलों की घाटी, सहित कई अनगिनत उपहार दियें हैं। लेकिन निति नियंताओं ने सदैव मेरी उपेक्षा की है। मेरे देवाल ब्लाक के हरमल, चोटिंग, तोरती, झलिया, रामपुर, बलाण, पिनाऊ गांव, घाट ब्लाक के कनोल, जोशीमठ ब्लाक के द्रोणागिरी सहित दर्जनों गांव में 59 साल बाद भी न तो बिजली  पहुँच पाई न ही सडक और न ही दूरसंचार। इन दिनों सड़क की मांग को लेकर मेरे घाट ब्लाक के कनोल के ग्रामीण जिला मुख्यालय गोपेश्वर में आंदोलन कर रहे हैं।
 मेरे इन गांव के लोग डिजिटल युग में अँधेरे में जीवन यापन कर रहें है। अधिकांश गांव के लोग प्राकृतिक स्रोतों से ही पेयजल ढोह रहें है। मेरे पास हस्तशिल्प कला, तीर्थाटन, पर्यटन से लेकर साहसिक खेलों में असीमित संभावनाएँ है जिनसे रोजगार के अवसरों का सृजन किया जा सकता था किंतु इन 59 बरसों मे इस ओर कोई कयावद नहीं की गयी। जिस कारण रोजगार के लिए यहाँ से पलायन बेहद तेजी से हुआ और आज मेरे जनपद के कई गाँव पलायन की वजह से खाली हो गये हैं।

मेरे जनपद में सबसे दयनीय स्थिति शिक्षा की है शिक्षको के अभाव में नौनिहालों को आखर का ज्ञान मिल रहा है। परीक्षायें होने वाली है लेकिन विषयों को पढ़ाने वाले अध्यापक नहीं।डिजिटल और बुलेट ट्रेन के युग में मेरे गांव के लोग २० से लेकर 25 किमी पैदल अपनी रोजमर्रा की वस्तुओं को पीठ में लेकर अपने गांव तक पहुँचते हैं। मेरे ६०० से अधिक गांवो में से अधिकांश गांवो में सडक नहीं पहुची है। कई गांवो की सड़कों की फाइलें वन अधिनियम की मकडजाल में फंसी हुई है। तो कई सड़के तंत्र की लापरवाई से फाइलों में कैद है और जो बन भी रही हैं वो भ्रष्टाचार के चुंगल में है। ऐसे में मेरे इन गांवो तक सडक कब तक पहुंचेगी किसी को नहीं मालूम। सबसे ज्यादा दुखदाई स्थिति स्वास्थ्य की है। भगवान के भरोसे ही जनपद की स्वास्थय सेवाएं है। मेरे सभी अस्पताल पर्ची काटने के रेफर सेंटर बने हुये है। जबकि मैंने सूबे को एक नहीं बल्कि दो दो स्वास्थ्य महानिदेशक दियें हैं। विकास की गाड़ी यहां इतनी तेज गति से जाती है कि ऊर्गम घाटी के लिए स्वीकृत आपातकालीन एम्बुलेंस को मेरे मुख्यालय गोपेश्वर से अपने गंतव्य ऊर्गम तक 90 किमी की दूरी नापनें में 18 महीने लग गये थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां विकास का पहिया कितनी तेजी से घूमता है।

मेरे मुख्यालय गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में स्थापित १२ वीं शताब्दी का ऐतिहासिक त्रिशूल स्तभ भी खतरे में है क्योंकि उस पर लगातार जंक लग रहा है। मेरे हिस्से औली, आली जैसे मखमली बुग्याल आयें हैं जो स्कीइंग के लिए ऐशगाह से कम नहीं है लेकिन दुःखद तस्वीर ये है कि 59 सालों में हम प्रीति डिमरी और वंदना पंवार को छोड़कर कोई भी स्कीइंग खिलाड़ी तैयार नहीं कर पाये। हाँ जरूर संतोष इस बात का है कि इन 59 सालों में कोठियालसैण में इंजीनियरिंग काॅलेज और गोपेश्वर में नर्सिंग काॅलेज की सौगात मुझे मिली।

कुल मिलकर यदि मेरे 59 सालों का आंकलन किया जाय तो साफ़ पता चलता है की मेरी हर किसी ने उपेक्षा की है। और आज भी मुझे बुनियादी सुविधायें मय्यसर नहीं हो पाई है। 59 साल पहले मेरे साथ अस्तिव में आये मेरे सीमांत भाई उत्तरकाशी और पिथौरागढ जनपद की भी तस्वीर और कहानी भी हुबहु कुछ इसी तरह है। जाने कब बदलेगी हमारी तस्वीरें।







आयुक्त ने लिया औली अल्पाइन स्की प्रतियोगिता तैयारियों का जायजा

गढ़वाल आयुक्त ने ली औली में नेशनल अल्पाइन स्कीइंग प्रतियोगिता की बैठक
किया तैयारियों का निरीक्षण

गैरसैंण,

23 फरवरी,2019
हिमक्रीडा केन्द्र औली (चमोली) में नेशनल अल्पाइन स्कीइंग एण्ड स्नो र्वोडिंग कम्पीटिशन के आयोजन की तैयारियों को लेकर शनिवार को गढवाल मण्डल आयुक्त डा0 बीवीआरसी पुरूषोत्तम ने जीएमवीएमन सभागार औली में संबधित अधिकारियों की बैठक लेते हुए सभी व्यवस्थाओं को चाक-चैबन्द करने के निर्देश दिये। इस दौरान उन्होंने औली में रोपवे, स्की शाॅप, स्की स्लोप तथा स्की उपकरणों सहित मौजूदा व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण भी किया। औली में 26 से 28 फरवरी तक नेशनल अल्पाइन स्कीइंग प्रतियोगिता का आयोजन होना है, जिसमें आर्मी, आईटीवीपी, हिमांचल, जम्मू कश्मीर, दिल्ली तथा उत्तराखण्ड की टीमें प्रतिभाग कर रही है

मण्डल आयुक्त ने कहा कि नेशनल स्कीइंग प्रतियोगित में प्रतिभाग करने वाले हर खिलाडी औली गेम्स से अच्छे अनुभव ले के जाये, इसके लिए खिलाडियों के आने-जाने व ठहरने की उचित व्यवस्थाऐं सुनिश्चित की जाय। स्की टीमों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए कन्ट्रोल रूम स्थापित करते हुए लाइजेनिंग आॅफिसर की तैनाती कर खिलाडियों को हर सम्भव सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। गेम्स में प्रतिभाग करने वाले सभी टीमों के खिलाडियों के लिए यातायात, आवास, भोजन आदि व्यवस्थाओं की जानकारी लेते हुए आयुक्त ने गेम्स के दौरान खिलाडियों के लिए भोजन मेनू फिक्स करने, सभी खिलाडियों के लिए एक जैसे आवास सुनिश्चित करने के निर्देश जीएमवीएन के अधिकारियों को दिये। सभी लिखाडियों एवं टैक्निकल टीम को औली पहुॅचने हेतु यातायात की समुचित व्यवस्था करने को कहा।

गेम्म के दौरान औली में बर्फवारी की सम्भावनाओं को देखते हुए मण्डल आयुक्त ने जोशीमठ-औली मोटर मार्ग पर बर्फ हटाने के लिए स्नो-कटर मशीन, जेसीबी एवं जेसीबी आॅपरेटर को हर समय तैनात रखने के निर्देश लोनिवि को दिये। साथ ही कर्णप्रयाग से औली मोटर मार्ग को दुरूस्त करते हुए सेफ्टी के पुख्ता इंतेजाम करने हेतु एनएचआईडीसीएल, लोनिवि एवं बीआरओ को तत्काल आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा। विद्युत एवं पेयजल व्यवस्था की जानकारी लेते हुए आयुक्त ने गेम्स के दौरान विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति सुचारू रखने हेतु कार्मिकों की टीमें तैनात रखने के निर्देश संबधित विभागों को दिये। साथ ही यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए पुलिस एवं तहसील प्रशासन को जरूरी कदम उठाने तथा वाहन पार्किगं हेतु स्थल निर्धारित करने के निर्देश दिये। औली में आर्मी हैलीपैड, सिविल हैलीपैड तथा जोशीमठ हैलीपैड में भी आवश्यक व्यवस्थाऐं सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।

स्वास्थ्य विभाग को गेम्स के दौरान एक आर्थोपेडिक व एक फिजीसीयन डाॅक्टर के साथ बेसिक मेडिकल उपकरण व पर्याप्त मात्रा में दवाईयों की व्यवस्था करने के निर्देश दिये। कहा कि किसी भी खिलाडी को गंम्भीर चोट लगने पर एयर एंबुलेंस की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाय। गेम्स के दौरान औली में संचार व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा अन्य सभी व्यवस्थाओं से जुड़े विभागों को अपने कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। साफ-सफाई व्यवस्था के लिए नगर पालिका को पर्याप्त सफाई कर्मचारियों की तैनाती करने के निर्देश दिये गये। गेम्स के दौरान जीएमवीएम में मीडिया सेन्टर तथा वायरलेस कन्ट्रोल रूम स्थापित करते हुए संचार की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जीएमवीएन के अधिकारियों को दिये। गेम्स की ओपनिंग एवं क्लोजिंग सेरमनी के लिए आईटीवीपी को जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने कहा कि गेम्स की ओपनिंग एवं क्लोजिंग सेरमनी में माननीय विद्यायकगणों, क्षेत्री जन प्रतिनिधियों तथा वीवीआईपी एवं वीआईपी अतिथियों को भी आमंत्रित किया जाय। उन्होंने ओपनिंग सेरमनी में पारम्परिक स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करने, खिलाडियों के लिए मैडल, ट्राॅफी तथा प्रशस्ति पत्रों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। इस दौरान मण्डल आयुक्त ने औली में रोपवे, स्की डू स्नो स्कूटर, एवरेस्ट प्रिनोथ स्नोग्रूमर, हस्की स्नो ग्रूमर, स्नोवीटर, स्कीलिफ्ट, पोमा स्कीलिफ्ट, चेयरलिफ्ट आदि व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण भी किया।

जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने मंडल आयुक्त को मौजूद व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी दी। बैठक में उन्होंने सभी संबधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करते हुए आयोजन को सफल बनाने के निर्देश भी दिये।

बैठक में जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया, पुलिस अधीक्षक यशंवत सिंह चैहान, अपर जिलाधिकारी एमएस बर्निया, नगर पालिका अध्यक्ष शैलेन्द्र पंवार, एसडीएम योगेन्द्र सिंह, मैनेजर जीएमवीएन कमल किशोर डिमरी, स्की रिजोर्ट औली के नीरज उनियाल, डीटीडीओ बृजेन्द्र पांडेय सहित संबधित विभागों के तहसील एवं जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।

केदारनाथ आपदा में अफसरों ने काटी चांदी-कैग रिपोर्ट

KEDARNATH DISASTER: आपदा में अफसरों ने काटी चांदी, अपात्रों को पहुंचाया फायदा, 539 करोड़ रुपये की बंदरबाट
कृष्णा सेमवाल
गोपेश्वर,

केदारनाथ आपदा के बाद राहत और पुनर्निर्माण की आड़ में सरकारी मशीनरी ने जमकर चांदी काटी। पुनर्निर्माण कार्यों के बीच अपात्र को भी फायदा पहुंचाया गया। चहेते ठेकेदारों को मनमाने ढंग से करोड़ों रुपये के काम बांटे गए। यही नहीं, उन कामों में करोड़ों रुपये खर्च कर दिए, जो कि मंजूर भी नहीं थे। करीब 539 करोड़ रुपये गैर मंजूर कामों और आपदा से इतर कामों में बांट दिए गए।

नियंत्रक एवं महालेखाकार की रिपोर्ट (कैग रिपेार्ट) में केदारनाथ आपदा के राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में की गई अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। सरकार ने शुक्रवार को कैग रिपोर्ट को सदन में पेश कर दिया।  यह रिपोर्ट जनवरी 2014 से मार्च 2017 के बीच की अवधि की है। कैग ने केंद्र सरकार से कई योजनाओं में धन न मिलने का भी उल्लेख किया है

केदारनाथ आपदा

15 से 17 जून 2013 के दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अतिवृष्टि के कारण विनाशकारी आपदा आई थी। मंदाकिनी, अलकंदा, भागीरथी समेत अन्य नदियों में आई बाढ़ से बडे़ पैमाने पर जानमाल की हानि हुई। एक हजार से ज्यादा लोग मारे गए। 5400 से ज्यादा लोग लापता हो गए। 70 हजार से ज्यादा तीर्थयात्रियों और एक लाख से ज्यादा स्थानीय लोगों इससे प्रभावित हुए थे।

केंद्र से मिला था स्पेशल पैकेज

इस आपदा से राज्य के पांच जिल में काफी प्रभावित हुए थे। इनमें राहत और पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार ने  9296.89 करोड़ रुपये का पैकेज मांगा था। केंद्र सरकार ने राज्य को वर्ष 2013-14 से वर्ष 2015-16 के बीच 6,259.84 करोड़ रुपये दिए थे।

जो काम मंजूर नहीं, उन पर लुटाए 243 करोड़

आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए मिले धन में अफसरों ने ऐसे काम भी करवा दिए जो जिनकी जरूरत ही नहीं थी।कैग रिपेार्ट के अनुसार  525 कामों में  119 मार्ग और 14 पुल आपदा से अप्रभावित क्षेत्रों में बनवाए गए। इन पर 90.08 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यही नहीं  37.99 करोड़ के स्वीक़ृत काम रदद कर मनमाने ढंग से 117 मार्ग और छह पुलों के लिए 72.05 करोड़ रुपये दे दिए गए। विभिन्न क्षेत्रों के निर्माण कार्यों के लिए बनाई गई डीपीआर में भी लापरवाही की गई। 98 विभिन्न योजनाओं की 5.81 करोड़ रुपये की डीपीआर मंजूर तक नहीं की गई। इसी प्रकार कई और कार्य भी ऐसे हैं, जिनमें विभागीय गलतियों के कारण सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लग गया।

294.64 करोड़ रुपये इधर से उधर किए

आपदा राहत के धन को सरकारी विभागों में मनमाने ढंग से इस्तेमाल किया। रुद्रप्रयाग में 12 बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए 79.19 करोड़ दे दिए गए। यही नहीं, जिन कामों के लिए राज्य सेक्टर में पहले ही पेसा मंजूर हो चुका था, उन्हें आपदा के बजट से और पैसा दे दिया। गोविंदघाट में अप्रैल 2016 में राज्य सेक्टर से मंजूर एक पुल लिए 20.74 करोड़ रुपये और दे दिए। यूजेवीएनएल और पावर कापोर्रेशन को भी इसी प्रकार 35.92 करोड़ रुपये बांटे गए। खाद्य विभाग, वन विभाग, सिंचाई ओर पर्यटन विभाग, उड्डयन विभाग ने भी इसी प्रकार आपदा के बजट में जमकर सेंध लगाई।

सरकार पर लगवा दिया 19.88 करोड़ का ब्याज

राहत और निर्माण कार्यों में लेटलतीफी से से जहां पीड़ितों को समय पर राहत नहीं मिली। वहीं कुछ गैरजिम्मेदार अफसरों ने सरकार पर बेवजह से 19.88 करोड़ रुपये का ब्याज लगवा दिया। दरअसल आपदा प्रबंधन के लिए विश्व बैंक से मिले 1100 करोड़ रुपये में 274.29 करोड़ रुपये का उपयोग नहीं हो पाया था। यह पैसा अफसरों ने लौटाने के बजाए बैंकों में यूं ही पड़े रहने दिया। 1100 करोड के कर्ज में 373.50 करोउ रुपये बिना इस्तेमाल रखे रहे। इस धन की एवज में सरकार पर ब्याज के रूप में 19.88 करोड़ रुपये की देनदारी बन गई।

न पुरोहितों के घर बने और पुल भी अधूरे

आपदा की वजह से केदारनाथ में पुराहितों के घर भी तबाह हो गए थे। पुनर्निर्माण कार्य के तहत यहां 38.63 करोड़ रुपये की लागत से 113 घर बनाए जाने थे। कैग ने पाया कि यहां नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने 113 में से केवल 40 घर ही बनाए। बाकी मकान नहीं बनाए गए। पुरोहितों के आवास मंजूर होने के दो साल बाद भी किसी भी मकान का निर्माण पूरा नहीं हो पाया था। केदारनाथ धाम में आवाजाही के लिए तीन पुल भी मंजूर किए गए थे। इनमें भी केवल एक ही पुल अस्तित्व में आ पाया। बाकी दो पुल अब तक तैयार नहीं हुए।

उड्डयन विभाग ने हवाई योजनाएं बनाईं

आपदा राहत और बचाव कार्यों को त्वरित गति से अंजाम देने के लिए उड्डयन विभाग की योजनाएं भी हवा-हवाई साबित हुई। यही हाल पर्यटन विभाग की योजनाओं का भी रहा। अफसरों ने जोरशोर से योजनाएं तो जरूर बनाई, पर जब उन्हें पर काम करने की बात आई तो आंखे मूंद ली। कैग रिपेार्ट के अनुसार आपदा के बाद सरकार ने राज्य के आपदा प्रबंधन, राहत और बचाव नेटवर्क को मजबूत बनाने पर जोर दिया था। इसके तहत राज्य में पांच हेलीड्रोम्स, 19 हेलीपोर्ट्स ओर 34 हेलीपैड बनाए जाने थे। इसके साथ ही 3500 क्षमता के 37 मल्टीपरपज हॉल बनाने की योजना भी थी। पर, न तो हेलीड्रोम्स पर सरकार आगे बढ़ी और न ही हेलीपोर्ट्स पर। हेलीपैड भी केवल 26 ही बने। सात हेलीपैड को जमीन उपलब्ध न होने के नाम पर निरस्त कर दिया गया। रुद्रप्रयाग के सोनप्रयाग में 65 करोड़ रुपये की लागत से बहुउद्देश्यीय हॉल मंजूर किया था, लेकिन स्वीकृति के चार साल बाद भी वह नहीं बना। लापरवाही का यह आलम पर्यटन विभाग के पर्यटक आवास गृहों में भी साफ दिखाई दिया। इनमें हट और कॉटेज का काम समय पर पूरा नहीं किया जा सका।

नवल किशोर बने अंतरिक्ष वैज्ञानिक

नवल किशोर बने अंतरिक्ष वैज्ञानिक
आंनद सिंह नेगी
घनसाली (टिहरी)

घनसाली  - विकासखण्ड भिलंगना के राजकीय इण्टरमीडिएट कालेज घुमेटीधार से पढाई कर चुका छात्र नवलकिशोर भद्री का पीआरएल (भौतिक अनसंधान प्रयोगशाला) मे अंतरिक्ष वैज्ञानिक शोध के लिए चयन हुआ है छात्र की इस उपलब्धि पर क्षेत्र के लोगों मे खुशी का माहोल बना हुआ है।
टिहरी जनपद के जाखणीधार ब्लाक के ग्राम पंचायत खांड गांव का नवलकिशोर भद्री पुत्र सोहनलाल भद्री की प्राथमिक शिक्षा अपने ननिहाल द्वारी से सरस्वति शिशु मन्दिर पिलखी तथा कक्षा 6 से कक्षा 12 तक राजकीय इण्टर कालेज घुमेटीधार मे सम्पन्न हुई कक्षा 12 मे नवलकिशोर ने उत्तराखण्ड बोर्ड से प्रदेश मे चैथा स्थान प्राप्त किया है। परिवार मे आर्थिक स्थिती कमजोर होने पर नवलकिशोर ने ननिहाल से शिक्षा दीक्षा ग्रहण की है तथा मेहनत व लगन के बल पर उन्होने बारहवीं के बाद छात्रवृति की परीक्षा पास कर अपनी आगे की पढाई के लिए खर्चे की व्वस्था की है। इण्टर मे प्रदेशस्तर पर चौथा स्थान प्राप्त करने के बाद भारत सरकार से 80 हजार रूपये स्कालरशिप के तौर पर मिलने के बाद एमएससी तक की पढाई पूरी की जिसके बाद उनका चयन अंतरिक्ष वैज्ञानिक के तौर पीआरएल फिजिकल रिसर्च लैब्रोटरी नवरंगपुरा अहमदाबाद के लिए हुआ है। अपनी इस सफलता का श्रेय नवलकिशोर भद्री ने अपने गुरूजनो, माता पिता एवं अपने ननिहाल कोे दिया है उनका कहना है कि लोगों को सरकारी विद्यालयों के प्रति अपना नजरिया बदलने की जरूरत है उन्होने कहा कि मेहनत एवं लगन से अध्ययन करने वाले बच्चों को सुनहरा भविष्य बनाने के  लिए सरकारी विद्यालयों से बहुत अच्छी मदद मिलती है।
पहाड़ के सरकारी स्कूल से पढा छात्र बना अंतरिक्ष वैज्ञानिक

शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2019

स्व ललित कोठियाल के जन्मदिन पर बाल मेला

स्व ललित कोठियाल के जन्मदिन 10 अप्रैल को होगा बाल मेला
प्रख्यात विज्ञान लेखक देवेन्द्र मेवाड़ी होंगे बच्चों से रुबरु
गंगा असनोड़ा थपलियाल
श्रीनगर,

सात अगस्त 2018 का दिन था . रीजनल रिपोर्टर की दशाब्द यात्रा पर रीजनल रिपोर्टर की स्मारिका के प्रारूप के लिए पहली बैठक स्व.ललित मोहन कोठियाल ज़ी की अध्यक्षता मेंं चल रही थी. स्मारिका पर बात से पहले पत्रिका पर विस्तृत बात हुई . इस बातचीत मेंं पत्रिका के सबल और निर्बल पक्षों पर वार्ता के साथ ही पत्रिका की विभिन्न जरूरतों पर भी बात हुई . पत्रिका के कलेवर पर पहले भी कई बैठकें हुई थी. इसमें जब- जब पत्रिका की सामग्री की बात होती,  तो ललित भाई पत्रिका मेंं स्थायी स्तम्भ बढ़ाए जाने के पक्ष की बात करते .

ललित भाई अपनी ओर से पत्रिका के लिए इतने समर्पित थे कि उनके जाने के बाद जो अंक निकला,  उसके लिए खबरों की खबर (ये ललित भाई का स्थायी स्तम्भ था.) लिख गए थे. उसके बाद के अंक को निकालने से पहले मुझे ललित भाई का स्थायी स्तम्भ बढ़ाने संबंधी बार बार दिया जाने वाला सुझाव याद आने लगा . ललित भाई की निष्ठा और खबरों की खबर कॉलम को लेकर उनकी मेहनत कई वाकये याद आते रहे . बहुत सोचने के बाद दो ही नाम दिमाग मेंं आए . वरिष्ठ पत्रकार योगेश भट्ट या जगमोहन रौतेला. भाई जगमोहन रौतेला एक पत्रिका मेंं पहले से ही यह कॉलम लिखते हैं,  सो योगेश भट्ट ज़ी से मैंने बात की . बड़े भाई योगेश भट्ट ज़ी की सरलता ही कहूँगी कि उन्होंने सहर्ष यह आग्रह स्वीकार कर लिया है . इस तरह दिसम्बर 2018 से रीजनल रिपोर्टर मेंं खबरों की खबर कॉलम वरिष्ठ पत्रकार योगेश भट्ट ज़ी की लेखनी के साथ सतत आगे चल रहा है . आपका बहुत बहुत आभार भाईजी Yogesh Bhatt जी .

ललित भाई की याद और सुझाव को ध्यान मेंं रख ही रही थी कि ॥ ऊर्जा विशेषज्ञ dr.ईशान पुरोहित ज़ी से वैकल्पिक ऊर्जा पर नियमित स्तम्भ की बात शुरू होते ही उन्होंने अपनी व्यस्तताओं के बावजूद नियमित स्तम्भ के लिए हामी भर दी . जनवरी 2019 से वैकल्पिक ऊर्जा पर यह कॉलम नियमित हो गया है .  आपको बहुत बहुत साधुवाद डा. Ishan Purohit जी.

इसी तरह, लेखनी की धनी,  संस्मरणों को संवेदना के साथ सही शब्दों मेंं पिरोकर पाठकों के सम्मुख रखने मेंं समर्थवान लेखिका प्रतिभा नैथानी ज़ी से जब व्यक्तित्व और स्मृतियाँ कॉलम लिखने का आग्रह किया,  तो वे भी सहर्ष तैयार हो गई और फरवरी 2019 से उनका स्थायी स्तम्भ भी प्रकाशित होना शुरू हो गया है . बहुत बहुत आभार Pratibha Naithani जी .

इससे पूर्व चर्चित स्तम्भ लेखक डा.भरत झुनझुनवाला का स्तम्भ चिंतन,  विज्ञान लेखक देवेन्द्र मेवाड़ी का विज्ञान परिक्रमा,  new media के जानकार जयप्रकाश पंवार 'जेपी' का न्यू मीडिया गुरू,  डा.प्रीतम अपछ्यांण का व्यंग्य, खबरों की खबर (पूर्व मेंं ललित मोहन कोठियाल अब योगेश भट्ट), जी.एस.नेगी का जानें अपने राज्य को तथा व्यंग्य की नौटंकी विधा के सिद्धहस्त लेखक उर्मिल कुमार थपलियाल का बकम्बम जि बकम्बम पत्रिका के ख्यातिलब्ध स्तम्भ हैं.

पत्रिका की मजबूत नींव को रखने मेंं संस्थापक सम्पादक द्वय स्व.बी.शंकर तथा स्व.डा.उमाशंकर थपलियाल जी के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर स्व.ललित कोठियाल जी ने काम किया . उनका मार्गदर्शन हमारे साथ है.

सात अगस्त की वह पहली बैठक और डिजाइन्ड स्मारिका के अंतिम प्रारूप को चेक करने के लिए 27 सितम्बर को अंतिम बैठक हुई. इस दिन रीजनल रिपोर्टर के सम्पादकीय सहयोगी सीताराम बहुगुणा जी ललित भाई को चिढ़ा रहे थे कि इस बार आपका जन्मदिन विशेष मनाया जाना है . सीताराम जी के साथ वरिष्ठ समालोचक एवं लेखक रीजनल रिपोर्टर परिवार के साथी डा.अरुण कुकसाल भी शामिल थे . बहुत देर तक चुप रहने के बाद ललित भाई ने कहा- जन्मदिन तो निकल गया . कुकसाल जी ने कहा- कोई नहीं अगले साल .

अगले साल का ललित भाई का जन्मदिन 10 अप्रैल को है .ललित भाई सशरीर इस दिन मौजूद नहीं होंगे. रीजनल रिपोर्टर उनके जन्मदिन पर बाल मेले का आयोजन करेगा . इस मौके का विशेष आकर्षण चर्चित विज्ञान लेखक एवं बाल सहित्यकार देवेन्द्र मेवाड़ी जी का व्याख्यान रहेगा .

ललित भाई आप नहीं हैं,  लेकिन आपका मार्गदर्शन बना रहेगा . आप जैसे सच्चे और सरल व्यक्तित्व विरले ही होते होंगे . आप लोगों के चले जाने के असीम दुःख के बावजूद आप लोगों की इच्छानुसार पत्रिका अपने पथ पर अग्रसर है,  यह आप लोगों की कल्पनाओं की सुखद परिणिति है .

श्रद्धानमन आप तीनों को .
स्व. बी.शंकर ( संस्थापक सम्पादक)
स्व. उमाशंकर थपलियाल ( संस्थापक प्रबन्ध संस्थापक)
स्व.ललित मोहन कोठियाल ( पूर्व कार्यकारी सम्पादक)

डा ईशान पुरोहित का रीजनल रिपोर्टर में होगा स्थायी स्तंभ

इस साल से बड़े भाई स्व० भवानी शंकर थपलियाल द्वारा स्थापित पत्रिका 'रीजनल रिपोर्टर' में नियमित कॉलम लिखना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है। ,,,,, इस बार का दूसरा लेख उत्तराखंड में 'पवन ऊर्जा' के सम्बंधित है ,,,,
उत्तराखंड से प्रकाशित होने वाली स्तरीय पत्रिका से आप भी जुड़िये जो अब ऑनलाइन भी उपलब्ध है (http://regionalreporter.in) ,,,,,,,

बुधवार, 20 फ़रवरी 2019

विधि असनोड़ा को इण्टरनेशनल इंग्लिश ओलम्पियाड में गोल्ड मेडल

इण्टरनेशनल इंग्लिश ओलम्पियाड में हमारी बिटिया विधि असनोड़ा को गोल्ड मैडल। हैदराबाद में रह रही बिटिया की इस सफलता में उसकी माता हेमा असनोड़ा व पिता भोला असनोड़ा सहित गुरुजनों की शिक्षा काम आयी है।
बहुत-बहुत बधाई बिटिया।
शाबाश।

रा प्रा वि सारेग्वाड का वार्षिकोत्सव समारोह

रा प्रा वि सारेग्वाड का वार्षिकोत्सव
सांस्कृतिक कार्यक्रम व प्रतियोगिता के साथ सम्पन्न
गैरसैंण,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय सारेग्वाड का वार्षिकोत्सव समारोह विभिन्न प्रतियोगिताओं व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सम्पन्न हुआ।
  समारोह में चम्मच दौड़, बोरी दौड़, जलेबी व गुब्बारा दौड़के साथ कविता पाठ, गढ़वाली व कुमांऊनी लोक गीत-लोकनृत्य की धूम रही।
 समारोह के मुख्य अतिथि खण्ड शिक्षा अधिकारी एम एस नेगी ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया।
प्रधानाध्यापक सीता टम्टा के संचालन में हुए वार्षिकोत्सव में राप्रा शिक्षक संघ ब्लाक अध्यक्ष मोहन सिंह रावत, मंत्री बबली सैंजवाल सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं, अभिभावक व ग्रामवासी उपस्थित थे।







मंगलवार, 19 फ़रवरी 2019

शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल पंचतत्व में विलीन

शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल सैन्य सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन
वीरांगना निकिता ढौंडियाल ने जय हिन्द सल्यूट के साथ दी अंतिम विदाई
देहरादून,

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल का पार्थिव शरीर कल पूरे सैनिक सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हो गया। उनकी धर्मपत्नी वीरांगना निकिता ढौंडियाल ने भावपूर्ण कारुणिक स्थिति में जयहिंद सल्यूट के साथ शहीद पति को अंतिम विदाई दी।
मां सरोज देवी व यादें विसरा चुकी दादी शकुंतला देवी की शोकाकुल स्थिति हृदय विदारक थी।
   एक दिन पहले हरिद्वार के खड़खड़ी घाट पर मेजर चित्रेश बिष्ट की अंतिम विदाई के दूसरे दिन मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल की विदाई ने शोक व गुस्से की लहर पैदा कर दी।
   बंगाल इंजीनियरिंग की टुकड़ी ने अपने अजीज अफसर को अंतिम सलामी दी।  उनके चाचा सतीश ढौंडियाल ने चिता को मुखाग्नि दी।हजारों नम आंखों ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
  34 वर्षीय मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल तीन बहनों के इकलौते भाई थे और गत वर्ष अप्रैल में निकिता ढौंडियाल से उनका विवाह हुआ था।
  पौड़ी जिला के बैजरों बमियाली गांव के मूल निवासी मेजर ढौंडियाल का देहरादून के नेशविला रोड में घर है।
   शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल आपको शत शत नमन
विनम्र श्रद्धांजलि।





सोमवार, 18 फ़रवरी 2019

सरोकारों से साक्षात्कार की मासिक पत्रिका रीजनल रिपोर्टर फरवरी 19 अंक

सरोकारों से साक्षात्कार की मासिक पत्रिका रीजनल रिपोर्टर का फरवरी 19 अंक
 अपनी प्रति आज ही सुरक्षित करायें।
रीजनल रिपोर्टर कार्यालय
76, अपर बाजार, श्रीनगर गढ़वाल
उत्तराखंड
मो नं 9412079290

पुलवामा के पिंगलिग में मेजर सहित चार सैनिक शहीद

जम्मू-कश्मीर पुलवामा के पिंगलाना में मेजर सहित चार सैनिक शहीद
तीन कुख्यात आतंकियों के मरने की सूचना
मुठभेड़ जारी

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा सेक्टर में पिंगवाला में आतंकियों से हुई मुठभेड़ में उत्तराखंड के देहरादून निवासी मेजर वी एस ढौंडियाल सहित 4 सैनिक शहीद हुए हैं। मेज़र ढौंडियाल पौड़ी जिला के बैजरों बमियाली गांव के मूल निवासी हैं।

 एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार शहीदों में हवालदार शेवराम, सिपाही अजय कुमार व हरी सिंह शामिल हैं। चारों शहीद 55 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। तीन कुख्यात आतंकियों के मारे जाने की भी खबर है जिसमें सी आर पी एफ जवानों के हमले का मास्टरमाइंड गाजी भी बताया जा रहा है।
 समाचार लिखे जाने तक मुठभेड़ जारी है।

पूरे सैन्य सम्मान के साथ मेजर चित्रेश बिष्ट पंचतत्व में विलीन

हरिद्वार में खड़खड़ी घाट पर शहीद मेजर चित्रेश को दी अंतिम विदाई
पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन
 हरिद्वार,
जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में शहीद हुए मेजर चित्रेश बिष्ट का पार्थिव शरीर पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ हरिद्वार के खड़खड़ी शमशान घाट में पंचतत्व में विलीन हो गया। शहीद को उनके चचेरे भाई हर्षित बिष्ट ने मुखाग्नि दी।
  अंतिम विदाई में उनके बड़े भाई नीरज बिष्ट सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
   देहरादून आवास से शुरू हुई अंतिम यात्रा के माता-पिता श्री सुरेन्द्र सिंह बिष्ट व श्रीमती रेखा बिष्ट का बूरा हाल था। किसी तरह श्री बिष्ट व रिस्तेदार शहीद की मां को संभाल रहे थे।
   इससे पहले मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शहीद पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। अंतिम विदाई में जनसैलाब उमड़ पड़ा था।



रविवार, 17 फ़रवरी 2019

मेजर चित्रेश को अंतिम विदाई आज

मेजर चित्रेश का अंतेष्टि आज देहरादून में
देहरादून,
जम्मू-कश्मीर के नौरेशां सेक्टर में आई ई डी डिफ्यूज करने दौरान शहीद हुए मेजर चित्रेश बिष्ट को आज देहरादून में अंतिम विदाई दी जायेगी।
 मूल रुप से अल्मोड़ा जिला के रानीखेत प्रखंड में पीपली गांव निवासी पुलिस के सेवा निवृत्त इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह बिष्ट के 31 वर्षीय सुपुत्र मेजर चित्रेश बिष्ट  17 फरवरी को आई ई डी विस्फोट में शहीद हो गए।
 एक आई ई डी डिफ्यूज करने के बाद दूसरे आई ई डी में बिस्फोट हो जाने से वे शहीद हुए।
  मेजर चित्रेश का 7 मार्च को वि

वाह होना था और घर में शादी की तैयारियां चल रही थी कि अचानक ये वज्रपात हो गया।
  मेजर चित्रेश की शहादत की खबर ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। उनके घर देहरादून और गांव पीपली में मातम छाया है।
 शहीद मेजर चित्रेश को शत शत शत
विनम्र श्रद्धांजलि।

शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

चौथी पुण्यतिथि पर संपादक द्वय को नमन

रीजनल रिपोर्टर के संस्थापक संपादक स्व भवानी शंकर थपलियाल और प्रवन्ध संपादक डॉ उमा शंकर थपलियाल की आज चौथी पुण्यतिथि है।
भवानी शंकर रीजनल रिपोर्टर के संपादक ही नहीं विज्ञान की खोजों, अविष्कारों, राजनीति, भूगोल, इतिहास, अर्थशास्त्र और समाज शास्त्र के अध्येता थे और किसी भी विषय पर प्रमाणिक जानकारी देने वाले अपने मित्रों के बीच ज्ञानी। श्रीनगर बांध के दुष्प्रभावों से वे बहुत पहले सचेत कर चुके थे और उसकी लड़ाई का हिस्सा भी रहे थे। भ्रष्टाचार के खिलाफ तत्कालीन पुलिस महानिदेशक बी एस सिद्धू पर कवर स्टोरी की थी और रीजनल रिपोर्टर को जनपक्षीय वैकल्पिक मीडिया बनने के लगातार प्रयास किया।उनकी टीम पूरी लगन से उसके प्रयासों को आगे बढ़ा रही है।
   स्व डॉ उमा शंकर थपलियाल पत्रिका के प्रवन्ध संपादक के साथ लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकार, संस्कृति कर्मी, पत्रकार और समाज सेवी रहे। मिलनसार, फुटबाल के अच्छे खिलाड़ी और अन्याय के विरुद्ध मुखर इंसान की छवि लिए पिता , पुत्र 17 फरवरी 2015 को अचानक हम लोगों के बीच से उठ गए।
   आपकी परिकल्पना और सोच समझ को सार्थक रुप देने के लिए गंगा जी जान से जुटी है। संपादकीय सहयोगी सीताराम बहुगुणा, जी एस नेगी, साहित्य संपादक उमा घिल्डियाल, डॉ प्रीतम अपच्छ्याण, मदन मोहन डुकलान, स्थाई स्तंभकार उर्मिल कुमार थपलियाल, डॉ भरत झुनझुनवाला, देवेन्द्र मेवाड़ी, जय प्रकाश पंवार 'जेपी', योगेश भट्ट, प्रतिभा नैथानी, ईशान पुरोहित आदि पूरी तन्मयता से जुटे हैं।
  वरिष्ठ लेखकों में हरीशचंद्र चंदोला, जगमोहन रौतेला, बिपिन बनियाल, मनोहर चमोली, महिपाल सिंह नेगी, डॉ एस पी सती सहित लब्ध प्रतिष्ठित लेखक आपकी परिकल्पना को आगे बढ़ा रहे हैं।
       प्रसार व्यवस्थापक अंजना भट्ट घिल्डियाल, डिजाइन मनोहर बिष्ट, पूजा भंडारी, अजीता शर्मा, हमारे प्रतिनिधि महेश शर्मा, देवीप्रसाद भट्ट, शंकर फुलारा, प्रकाश, सुधीर राठौड़, ईश्वरी दत्त जोशी, जीवन सिंह बिष्ट, दीपक शर्मा, संजय साह' जगाती' आदि पत्रिका के सुचारू और स्तरीय लेखन में सहायक हुए हैं।
  आपकी कमी हमेशा रहेगी, आपकी दिशा, सोच और समझ मार्ग दर्शन कराती रहेगी।
संपादक द्वय आपको शत शत नमन
विनम्र श्रद्धांजलि।
पुलवामा हमला-
इमानदार कदम तो उठाइए
पुरुषोत्तम असनोड़ा

भारत के शहर,गांवों में शोक की लहर है। 40 सी आर पी एफ जवानों की शहादत से लोगों में गुस्सा है। लोग बदला लेने की बात कर रहे हैं।टी वी चैनल चिंघाड़ रहे हैं। नेताओं और कार्यकर्ताओं का अपना हित और अपनी निष्ठा हावी है।
  शहीदों के पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचने लगे हैं। वही रुदन, चीख पुकार, विकराल भविष्य, घर परिवार के बीच सांत्वना देते लोग और शहीदो हम शर्मिंदा हैं तुम्हारे कातिल जिन्दा के नारे, गर्वोक्ति  वही सब बातें जो इतने सालों से होता है।
    शहीद देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देते हैं, वे गर्व के योग्य और नमनीय हैं। ये भी सही है कि देश की रक्षा में तैनात गरीब, किसान, मजदूर का बेटा है और उसकी शहादत पर सीना चौड़ा करने वाले लोगों ने ही ये परिस्थितियां पैदा की हैं।
  पुलवामा का हमलावर कश्मीरी आतंकी  ही था। विस्फोट के बाद वहां गोलियां भी चली। 72 साल पहले भारत में विलय हुआ जम्मू-कश्मीर आज भी भारत से आत्मसात क्यों नहीं हुआ? आतंक की जड़ें अफगानिस्तान से पाकिस्तान होते हुए कश्मीर पहुंच गयी और सत्ता हमेशा अपनी पीठ ढोंकती रही।
    टी वी चैनलों को अपनी ट्रायल बंद करनी चाहिए। पहली खबरों  350 किग्रा बिस्फोटक लदी एसयूवी बतायी गयी, फिर 60 किग्रा आरडीएक्स वाली कार बतायी गयी और अब बिस्फोटक अमोनिया नाइट्रेट बताया जा रहा है, ये सब एक्सपर्ट पर छोड़ दो मेरे मालिक!, तुम्हारी  प्रयुक्त बिस्फोटक की खबर एक दिन बाद भी आयेगी तो अंतर नहीं पड़ेगा, वहीं अंतर शहीदों की संख्या के बारे में  42,44,37,40 अधिकारिक आंकड़े आने दीजिए। इससे जग हंसाई और भ्रम पैदा होता है। उत्तराखंड से वीरेंद्र राणा और मोहनलाल रतूड़ी शहीद हुए हैं, तीसरे की आफवाह उड गयी।
  समस्या बड़ी है इसलिए समाधान भी बड़ा चाहिए।70 साल में जो समाधान नहीं निकाला वह 70 घंटे में नहीं निकलेगा। प्रयास इमानदार तो हों। चोर का काम ही चोरी है, साहूकार अपनी संपत्ति कैसे बचाता है ये उसका कौशल है और भारतीय सत्ता अब तक अपनी संपत्ति बचाने में विफल रही है जो संतानें देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान कर रही हैं उन्हें नहीं बचा सकी हैं।

शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2019

पालम एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री ने दी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि

दिल्ली पालम एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री सीता राम रमण, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, थल सेनाध्यक्ष विपिन रावत सहित कई मंत्रियों, रक्षा व सी आर पी एफ अधिकारियों ने शहीदों को पुष्प चक्र से अंतिम विदाई दी।

पुलवामा के आतंकी हमले पर उबाल

पुलवामा की आतंकी घटना को उबाल
आतंक का पुतला व पाकिस्तान का झंडा फूंक कर किया आक्रोश व्यक्त
मोटरसाइकिल रैली में पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे
गैरसैंण,
कल सी आर पी एफ कांनवाई पर आतंकी हमले में 37 जवानों के शहीद और 5 जवानों के घायल होने से आक्रोशित लोगों ने जुलूस प्रदर्शन कर पाकिस्तान के विरुद्ध नारेबाजी की और आतंकवाद का पुतला व पाकिस्तान का झंडा फूंक दिया।
  जुलूस व मोटर साइकिल रैली में वीर शहीद अमर रहें, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया। रामलीला मैदान से प्रारम्भ जुलूस पाकिस्तान को आतंक के पर्याय के रुप घुमाते हुए चौराहे पर आग के हवाले कर दिया।
  रामलीला मैदान में हुई शोक सभा में शहीदों को दो मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
    सभा में नगर पंचायत अध्यक्ष पुष्कर सिंह रावत, पूर्व अध्यक्ष गंगा सिंह पंवार, सभासद कुंवर सिंह रावत, सरोज शाह, राजेंद्र सिंह शाह, जगदीश ढौंडियाल, बृजमोहन राज, एस ओ रवींद्र सिंह नेगी,  व्यापार संघ के रणजीत शाह, धनीराम,डॉ जयानन्द गैडी, जगदीश टम्टा , वीरेंद्र टम्टा, पूरनसिंह नेगी, कृष्णा नेगी, बी पी काला, मंजू बिष्ट, रामचंद्र गौड़, दिनेश गौड़, मनोज गौड़ सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

गुरुवार, 14 फ़रवरी 2019

कल की वर्षा और हिमपात

उत्तराखंड की जनता की राजधानी गैरसैंण में कल हुई वर्षा और  दूधातोली में हुए हिमपात का दृश्य-

सर्वोदयी गांधी वादी नेता मानसिंह रावत नहीं रहे

सर्वोदयी , गांधी वादी नेता एवं जमुना लाल बजाज पुरूस्कार से सम्मानित कोटद्वार निवासी मानसिंह रावत का निधन सामाजिक जीवन की बड़ी क्षति है। 91 वर्षीय स्व रावत आजन्म सामाजिक सरोकारों से जुड़ें रहे।
विनोवा भावे के भूदान आंदोलन से जुड़े रहे मानसिंह रावत थारु समाज की उन्नति के लिए कार्यरत रहे।
 शत शत नमन
विनम्र श्रद्धांजलि।