बुधवार, 18 नवंबर 2015


     बदरीश धाम के कपाट शीतकाल केलिए हुए बन्द
      गैरसैंण, 17 नवम्बर 2015
भारत के चार धामों में प्रमुख धाम उत्तराखण्ड के चमोली जिले में स्थित करोडों हिन्दुओं के आस्था का प्रतीक प्रसिद्ध धाम बदरीनाथ के कपाट 17 नवम्बर को अपरान्ह 4.35 बजे पर पूजा अर्चना व विधि विधान के साथ शीतकाल में श्रृद्धालुओं के लिए बन्द कर दिये गये। इस अवसर पर बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों ने कपाट बन्द होने से पूर्व भगवान बदरीविशाल के दर्शन किये। मन्दिर को गेंदे के फूलों से सजाया गया।
   प्रातः पूर्व परम्परा के अनुसार रावल द्वारा स्त्रीवेश धारण कर लक्ष्मी जी की मूर्ति को मन्दिर के गर्भ गृह में प्रतिस्थापित किया गया तथा कुबेर जी व उद्धव जी के विग्रह मन्दिर से बाहर लाये गये। उसके बाद भगवान का अभिषेक व फूलों से श्रृंगार कर पूजा प्रारम्भ की गई। 4.15 बजे आम श्रृद्धालुओं द्वारा भगवान के दर्शन किये गये। श्रृद्धालुओं द्वारा इस परिदृश्य का आनन्द लिया गया।
बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के समय की धार्मिक प्रक्रिया व अन्य विधि विधान जितना आकर्षण व कौतुहल लिये होता है कपाट बन्द होने की प्रक्रिया भी उतनी ही अद्भुत होती है। इस परम्परा का निर्वहन करते हुये उन्हें रोना भी पडता है जबकि लक्ष्मी जी के गर्भगृह में प्रवेश करने के साथ ही उद्धव भगवान को भी गर्भगृह से बाहर लाकर चाॅदी की डोली में बिठाया जाता है। इस बीच बदरीविशाल से फूलों का श्रृंगार उतारकर उनकी मूर्ति पर घी मला जाता है।
अनादिकाल से प्राचीन परम्परा के अनुसार माणा गाॅव के मोल्लफा जनजाति के कुंवारी कन्याओ द्वारा अपने हाथों से बनाया गया घृत कम्बल भगवान बदरीविशाल को चढाया जाता है, जो शीतकाल के बाद कपाट खुलने पर ही उतारा जाता है। मान्यता है कि शीतकाल मंे भगवान जनकल्याण के लिये तपस्यारत हो जाते हैं। शीतकाल में छः माह भगवान की पूजा नारद जी द्वारा की जाती है। माॅ लक्ष्मी के गर्भगृह में प्रवेश करने तथा उद्धव जी के गर्भगृह से बाहर निकलने के बाद मन्दिर के कपाट बन्द कर दिये जाते है। कपाट खुलने तक कुबेर व उद्धव भगवान की पूजा अर्चना पाण्डुकेश्वर तथा शंकराचार्य की गद्दी तथा बदरीनाथ की पूजा जोशीमठ नृसिंह मन्दिर में की जाती है। इस धाम के कपाट खुलने का मुहूर्त बसंत पंचमी के पर्व पर महाराजा टिहरी के राजदरबार में की जाती है। तथा कपाट बन्द होने की तिथि दशहरे के पर्व पर बद्रीनाथ मंे घोषित की जाती है। इस अवसर पर लगभग साढे सात हजार श्रृद्धालुओं ने दर्शन किये। श्रद्धालुओं द्वारा भजन कीर्तन व गढ़वाल स्काउट ने बैण्ड की धुन से पूरा बदरीनाथ धाम गुंजायमान रहा। इस मौके पर अध्यक्ष बद्री केदार मन्दिर समिति गणेश गोदियाल, विधायक कपकोट ललित फस्र्वाण, मुख्य कार्याधिकारी मन्दिर समिति बी0डी0सिंह, जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन, पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार मीणा, उपजिलाधिकारी जोशीमठ शैलेन्द्र नेगी, पुलिस उपाधीक्षक बी एस रावत, मन्दिर कमेटी के पदाधिकारी आदि मौजूद थे।

                                           


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें