गुरुवार, 24 मार्च 2016
बुधवार, 23 मार्च 2016
हरिदत्त बहुगुणा का जाना उततराखण्ड राज्य आन्दोलन के एक युग की विदाई है।
हरिदत्त बहुगुणा का जाना उततराखण्ड राज्य आन्दोलन के एक युग की विदाई है।
उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के योद्धा, विचारक, शिक्षक, राजनैतिक, सामाजिक कार्य कर्ता और सबसे अधिक एक सच्चे इंसान हरि दत्त बहुगुणा हमारे बीच नही रहे। काफी समय से यकृत की बिमारी बाद एक साल पहले उनके आंत में संक्रमण निकल आया था और दिल्ली के गंगा राम अस्पताल से इलाज चल रहा था।
कल 22 मार्च 16 को सायं उत्तराखण्ड के महान योद्धा ने हरिद्वार में अपने आवास सांस ली। धर्मपत्नी, पुत्र, पुत्रवधू, पोती सहित परिवार को विलखता छोड गये स्व बहुगुणा हमारे पारिवारिक मित्र और संरक्षक थे। कवि हृदय, स्पष्ट वक्ता और लगन के धनी बीएचईएल के शिक्षक हरिदत्त बहुगुणा उत्तराखण्ड क्रांति दल के वरिष्ठ नेताओं में शुमार थे और राज्य के हर गांव, अली मौहल्ले से उनका परिचय था। वे राज्य की दशा -दिशा के प्रति चिन्तित रहने वाले मार्गदर्शी थे और सन् 1991 में उक्रांद द्वारा बनाये गये उत्तराखण्ड के ब्लू प्रिंट बनाने वाले मार्गदर्शियों में एक भी। 2009 में उक्रांद छोड कांग्रेस में शामिल होने के बाद भी वे उत्तराखण्ड के मुद्दों पर सक्रीय थे। रीजनल रिपोर्टर सहित कई पत्र- पत्रिकाओं में उनके ेलेख बराबर प्रकाशित होते थे जो लेखन और राज्य की चिन्ताओं का दस्तावेज हैं।
आत्मा की अमरता और शरीर की जीर्णता के तर्क के साथ उनका चले जाना जीवन की वे अनचाही और अनिवार्य स्थितियां हैं जिन्हें स्वीकार करना ही होता है। ऐसे महापुरुष जिनके व्यवहार में हमेशा स्नेह टपकता हो, जो विद्वता से अपनी बातें कहता हो और जिससे शिष्टाचार भी शिष्टता सीखता हो और जो उततराखण्ड की परिकल्पनाओं का साक्षी ही नही सर्जक भी हो ऐसे मानव की कमी हमेशा खलेगी।
ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दें, और शोक संतृप्त परिवार को दुख सहने की सामथ्र्य दे।
ओउ्म शान्ति-शान्ति-शान्ति
उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के योद्धा, विचारक, शिक्षक, राजनैतिक, सामाजिक कार्य कर्ता और सबसे अधिक एक सच्चे इंसान हरि दत्त बहुगुणा हमारे बीच नही रहे। काफी समय से यकृत की बिमारी बाद एक साल पहले उनके आंत में संक्रमण निकल आया था और दिल्ली के गंगा राम अस्पताल से इलाज चल रहा था।
कल 22 मार्च 16 को सायं उत्तराखण्ड के महान योद्धा ने हरिद्वार में अपने आवास सांस ली। धर्मपत्नी, पुत्र, पुत्रवधू, पोती सहित परिवार को विलखता छोड गये स्व बहुगुणा हमारे पारिवारिक मित्र और संरक्षक थे। कवि हृदय, स्पष्ट वक्ता और लगन के धनी बीएचईएल के शिक्षक हरिदत्त बहुगुणा उत्तराखण्ड क्रांति दल के वरिष्ठ नेताओं में शुमार थे और राज्य के हर गांव, अली मौहल्ले से उनका परिचय था। वे राज्य की दशा -दिशा के प्रति चिन्तित रहने वाले मार्गदर्शी थे और सन् 1991 में उक्रांद द्वारा बनाये गये उत्तराखण्ड के ब्लू प्रिंट बनाने वाले मार्गदर्शियों में एक भी। 2009 में उक्रांद छोड कांग्रेस में शामिल होने के बाद भी वे उत्तराखण्ड के मुद्दों पर सक्रीय थे। रीजनल रिपोर्टर सहित कई पत्र- पत्रिकाओं में उनके ेलेख बराबर प्रकाशित होते थे जो लेखन और राज्य की चिन्ताओं का दस्तावेज हैं।
आत्मा की अमरता और शरीर की जीर्णता के तर्क के साथ उनका चले जाना जीवन की वे अनचाही और अनिवार्य स्थितियां हैं जिन्हें स्वीकार करना ही होता है। ऐसे महापुरुष जिनके व्यवहार में हमेशा स्नेह टपकता हो, जो विद्वता से अपनी बातें कहता हो और जिससे शिष्टाचार भी शिष्टता सीखता हो और जो उततराखण्ड की परिकल्पनाओं का साक्षी ही नही सर्जक भी हो ऐसे मानव की कमी हमेशा खलेगी।
ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दें, और शोक संतृप्त परिवार को दुख सहने की सामथ्र्य दे।
ओउ्म शान्ति-शान्ति-शान्ति
रीजनल रिपोर्टर मार्च अंक ; जन सरोकारों को प्रतिवद्ध- उत्तराखंड में होली और सरोकार
उत्तराखंड में होली और सरोकार
स्वागत है ऋतुराज तुम्हाराः संपादक पुरुषोत्तम असनोड़ा की संपादकीय के साथ रीजनल रिपोर्टर का मार्च अंक होली और उत्तराखंड के सरोकारों को दर्शाता है। अंक में शामिल आलेखों की संक्षिप्त चर्चा के साथ रीजनल रिपोर्टर के लेखकों, पाठकों व विज्ञापन दाताओं को होली की शुभकामनाएं प्रेषित करते हैं-
कवर स्टोरी
- होरी के दिनन में, अब न करत मो से रंज: गौरी शंकर थपलियाल
- दो सौ साल से ज्यादा पुरानी है श्रीनगर की होलीः कृष्णानंद मैठाणी
- टिहरी की होली, बस यादें ही शेष: आलोक प्रभाकर
- कुमाऊं की होली का है एक अलग अंदाजः जगमोहन रौतेला
- रंग डारि दियो हो अलबेलिन मेंः गिर्दा
- गिरदा के लिए होली भी रही जनसंघर्ष का पर्यायः राजीव लोचन साह
- हां! आज होली है: अरूण कुकसाल
- दो सौ साल से ज्यादा पुरानी है श्रीनगर की होलीः कृष्णानंद मैठाणी
- टिहरी की होली, बस यादें ही शेष: आलोक प्रभाकर
- कुमाऊं की होली का है एक अलग अंदाजः जगमोहन रौतेला
- रंग डारि दियो हो अलबेलिन मेंः गिर्दा
- गिरदा के लिए होली भी रही जनसंघर्ष का पर्यायः राजीव लोचन साह
- हां! आज होली है: अरूण कुकसाल
स्थाई स्तंभ
मंथन- हाई स्पीड ट्रेन का आगाजः भरत झुनझुनवाला
मंथन- हाई स्पीड ट्रेन का आगाजः भरत झुनझुनवाला
खबरों की खबर- छलावा साबित हुए रोजगार के दावे, जायज मांग करना भी गुनाह बना, अतिथि शिक्षकों का दबावः सीताराम बहुगुणा ।
प्राथमिक विद्यालयों में तेजी से घट रही है छात्र संख्याः ईश्वरी दत्त जोशी ‘ईश्वर’।
सफलता की कहानी राजेंद्र सिंह बिष्टः प्रकाश जोशी।
पुस्तक ‘लोक का बाना’ का विमोचन, चकबन्दी पर सरकार को दिए सुझावः रीजनल रिपोर्टर ब्यूरो।
नगरनामा- गैरसैंणः सबके दिलों का सैंण: एल. मोहन कोठियाल
न्यू मीडिया गुरू- वेबसाइटों का बढ़ता दायराः जयप्रकाश पंवार ‘जेपी’
स्वास्थ्य परिचर्चा - नियम पूर्वक करें व्यायाम: डाॅ.सुशान्त मिश्र ;आयुर्वेदाचार्यद्ध
जानें अपने राज्य को - महिला सशक्तिकरण एवं उत्तराखंडः जी.एस.नेगी
बाल मन की उड़ान- अभिसार काला, लक्ष्य बहुगुणा, प्रणव नैथानी, बाल कहानी- चिकचिक और हवाः डाॅ.उमेश चमोला।
कविता- मन की तरंग: प्रो.राजाराम नौटियाल
बकम बम जि बकम बम - हो हो होलक रे: उर्मिल कुमार थपलियाल
विशेष आलेख
असल मुद्दों को भटकाने की नकली लड़ाईः जगमोहन रौतेला
असल मुद्दों को भटकाने की नकली लड़ाईः जगमोहन रौतेला
द ग्रेट खली रिटर्न के बाद उत्तराखंड की राजनीति को मिला नया मुद्दाः विपिन बनियाल
चुनिंदा ब्यूरोक्रेटों के चंगुल में सरकारः वीरेंद्र पैन्यूली
जनपक्षीय पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियांः शीना उपाध्याय
जेएनयू का छात्र रहने पर गर्व है मुझेः डाॅ.शमशेर सिंह बिष्ट
सवाल तो हैं, पर जवाब देगा कौनः गजेंद्र नौटियाल
विधायकों के पास सुरक्षित 71 प्रतिशत विधायक निधि ः नदीम उद्दीन
दोहरे आदेशों के बीच झूलती शिक्षा व्यवस्थाः केपीएस अधिकारी
रविवार, 20 मार्च 2016
होली की घूम- महिलाओं व बच्चों ने संभाला मोर्चा
गैरसैंण, 20 मार्च,
गैरसैंण में होली की धूम शुरु हो गयी है। सलियाण बैण्ड व गैरसैंण में महिलाओं की होली का रंग जमा है तो गांव- गांव से बच्चे मजीरे और खडताल के साथ होली के लिए निकले है।
गैरसैंण में होली की धूम शुरु हो गयी है। सलियाण बैण्ड व गैरसैंण में महिलाओं की होली का रंग जमा है तो गांव- गांव से बच्चे मजीरे और खडताल के साथ होली के लिए निकले है।
होली खेले गिरजापति नन्दन--की गणेश वन्दना से प्रारम्भ खेली जा रही होली मेरों रंगीली देवर घर ऐं रौ छ की ठिठोली तक पहुंच जाती है। राधारानी और कृष्ण कन्हैया के साथ बृज की सुमधुर होली का गायन श्रोताओं को भावविभोर करता है तो स्वांग करती नायिका हंसने-हसाने की सफलता आयोजन का पूर्णता देती है ।
यायावर जन चेतना समिति ने होली के पारम्परिक सांस्कृतिक स्वरुप को बरकरार रखने, रंगों के प्रयोग और नशा मुक्त होली मनाने के लिए जन चेतना अभियान प्रारम्भ किया है।
बुधवार, 16 मार्च 2016
कांग्रेस-भाजपा को सत्ता चाहिए वह घोडे या गधे किसी पर भी सवार होकर आये
उत्तराखण्ड में सरकार, विपक्ष और मीडिया के लिए मुद्दों का लगातार टोटा बना हुआ है। इसीलिए 15 साल में पहाडों के गांव खाली होने, मैदानी कृषि पर आवासीय व्यवस्था का बोझ बढने और खेत-खलिहानों के बंजर होने सहित तमाम समस्याओं के बजाय सतही मुद्दे उछालने और उसी बहस को लगातार परोसने, बनाये रखने में किसका हित है क्या कोई बतायेगा?
एक निरीह जानवर जिसे शक्तिमान कहा जा रहा है पुलिस स्कैडन का कांस्टेबल दर्जे का घोडा है जिसे भारतीय जनता पार्टी के 14 मार्च को हुए विधान सभा घेराव के दौरान विधायक गणेश जोशी द्वारा लाठी से पिटने के बाद पैर टूटने की बात कही जा रही है। एक निरीह जानवर के साथ बर्बरता की कठोर शब्दों में निंदा होनी चाहिए। कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाले पुलिस को उस पर एफआईआर मिल चुकी है और उसे सम्यक कार्यवाही करनी चाहिए।
सवाल घोडे के दर्द और जान से अधिक सत्ता के लिए तिकडमी चालों का है।उत्तराखण्ड के उन मुद्दों को लेकर हैं जिन पर सरकार और विपक्ष आंख मंद लेता है। मीडिया को काठ मार जाता है। जिस घोडे पर सरपट सवारी का मोह कोई संबरण नही कर पा रहा वह उत्सुकता 23 जनवरी को उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध आन्दोलनकारी पीसी तिवारी व रेखा धस्माना को जिन्दल के गुण्डो ंद्वारा पीटे जाने के समय कहां गयी थी? प्रभात ध्यानी और मुनीश अग्रवाल पर खनन माफिया द्वारा किया गया जान लेवा हमला पक्ष-विपद्वा की तकरीर नही बनती। स्वतंत्रता सेनानी 94 वर्षीय बुजर्ग देवेन्द्र सनवाल और तिरंगे का अपमान उन्हें विचलित नही करता। सडक से सदन तक हंगामा मचाने वाले लोग क्या जिन्दल के बंधक हैं जो उसके उसके कुकृत्यों पर मौन साध लेते हैं?
व्ीर माधोसिंह मलेठा की कर्मभूमि को बंजर बनने से रोकने की मुहिम लिए हिमालय बचाओ आन्दोलन के नेता समीर रतूडी 23 दिन से अनशन पर हैं उनकी मांग आन्दोलनकारियों से मुकदमे हटाने की है। लेकिन सरकार और विपक्ष पहाड क ेजल-जंगल-जमीन के सौदों पर न केवल खामोश हैं बल्कि वे किसी न किसी रुप में माफिया को सहयोग कर रहे हैं।
कांग्रेस हो या भाजपा और उनका दुमछल्ला उत्तराखण्ड का वह दलाल मीडिया जिसे बेगुनाह युवाओं की माओवादी के रुप में गिरफ्तारी सरकार की सबसे बडी बहादुरी लगती है और वह पन्ने दर पन्ने, एपीसोडदर एपीसोड उत्तराखण्ड में माओवाद के पसरने और सरकार बहादुर की बहादुरी के किस्सों से धन्य-धन्य होता है। जबकि न्यायालय में एक भी मामला नही टिकता है और सभी गिरफ्तार युवा रिहा हो जाते हैं। 80 के दशक में कोटखर्रा में भूमिहीनों की लडाई लडते उत्तराखण्ड संघर्ष वाहिनी के कार्यकर्ताओं की पिटाई किस किस राजनेता को याद है? बिन्दुखत्ता मे ग्रामीणों के हक-हकूक को लेकरं सीपीआई एमएल कार्यकर्ताओं पर कितनी बार लाठी चार्ज हो गया क्या किसी मीडिया ने हिसाब रखा है?छोटी काशी हाट को बचाने के लिए वहां ग्रामीण आन्दोलित हैं लेकिन उनकी परवाह किसी को नही।
तीन दिन से चल रही बहस और समाचार केवल एक लाइन में सिमटने चाहिए थे दोषी के खिलाफ कार्यवाही और घोडे को समुचित इलाज। लेकिन मुद्दों की राजनीति से परहेज रखने वाले कांग्रेस और भाजपा के लिए तो कुर्सी और केवल कुर्सी ही पहली और अंतिम प्रारथमिकता है। वह चाहे घोडे या गधे पर सवार होकर ही क्यों न आये। उत्तराखण्ड की परिकल्पनाऐं, शहीदों के सपने तो जिन्दल, शराब, खनन व भू माफिया के यहां गिरवी रख चुके हैं। तब तिरंगे का अपमान भी हो तो उन्हें काठ मार तायेगा।
मुख्यमंत्री जी! शक्तिमान के साथ फोटो ख्ंिाचाकर जिस राजनैतिक लाभ में आप अपने को पा रहे हैं जिन्दल से नजदीकी और नैनीसार के हमलावरों की गिरफ्तारी रोकना आपको उससे भी महंगा पडने वाला है।
एक निरीह जानवर जिसे शक्तिमान कहा जा रहा है पुलिस स्कैडन का कांस्टेबल दर्जे का घोडा है जिसे भारतीय जनता पार्टी के 14 मार्च को हुए विधान सभा घेराव के दौरान विधायक गणेश जोशी द्वारा लाठी से पिटने के बाद पैर टूटने की बात कही जा रही है। एक निरीह जानवर के साथ बर्बरता की कठोर शब्दों में निंदा होनी चाहिए। कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाले पुलिस को उस पर एफआईआर मिल चुकी है और उसे सम्यक कार्यवाही करनी चाहिए।
सवाल घोडे के दर्द और जान से अधिक सत्ता के लिए तिकडमी चालों का है।उत्तराखण्ड के उन मुद्दों को लेकर हैं जिन पर सरकार और विपक्ष आंख मंद लेता है। मीडिया को काठ मार जाता है। जिस घोडे पर सरपट सवारी का मोह कोई संबरण नही कर पा रहा वह उत्सुकता 23 जनवरी को उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध आन्दोलनकारी पीसी तिवारी व रेखा धस्माना को जिन्दल के गुण्डो ंद्वारा पीटे जाने के समय कहां गयी थी? प्रभात ध्यानी और मुनीश अग्रवाल पर खनन माफिया द्वारा किया गया जान लेवा हमला पक्ष-विपद्वा की तकरीर नही बनती। स्वतंत्रता सेनानी 94 वर्षीय बुजर्ग देवेन्द्र सनवाल और तिरंगे का अपमान उन्हें विचलित नही करता। सडक से सदन तक हंगामा मचाने वाले लोग क्या जिन्दल के बंधक हैं जो उसके उसके कुकृत्यों पर मौन साध लेते हैं?
व्ीर माधोसिंह मलेठा की कर्मभूमि को बंजर बनने से रोकने की मुहिम लिए हिमालय बचाओ आन्दोलन के नेता समीर रतूडी 23 दिन से अनशन पर हैं उनकी मांग आन्दोलनकारियों से मुकदमे हटाने की है। लेकिन सरकार और विपक्ष पहाड क ेजल-जंगल-जमीन के सौदों पर न केवल खामोश हैं बल्कि वे किसी न किसी रुप में माफिया को सहयोग कर रहे हैं।
कांग्रेस हो या भाजपा और उनका दुमछल्ला उत्तराखण्ड का वह दलाल मीडिया जिसे बेगुनाह युवाओं की माओवादी के रुप में गिरफ्तारी सरकार की सबसे बडी बहादुरी लगती है और वह पन्ने दर पन्ने, एपीसोडदर एपीसोड उत्तराखण्ड में माओवाद के पसरने और सरकार बहादुर की बहादुरी के किस्सों से धन्य-धन्य होता है। जबकि न्यायालय में एक भी मामला नही टिकता है और सभी गिरफ्तार युवा रिहा हो जाते हैं। 80 के दशक में कोटखर्रा में भूमिहीनों की लडाई लडते उत्तराखण्ड संघर्ष वाहिनी के कार्यकर्ताओं की पिटाई किस किस राजनेता को याद है? बिन्दुखत्ता मे ग्रामीणों के हक-हकूक को लेकरं सीपीआई एमएल कार्यकर्ताओं पर कितनी बार लाठी चार्ज हो गया क्या किसी मीडिया ने हिसाब रखा है?छोटी काशी हाट को बचाने के लिए वहां ग्रामीण आन्दोलित हैं लेकिन उनकी परवाह किसी को नही।
तीन दिन से चल रही बहस और समाचार केवल एक लाइन में सिमटने चाहिए थे दोषी के खिलाफ कार्यवाही और घोडे को समुचित इलाज। लेकिन मुद्दों की राजनीति से परहेज रखने वाले कांग्रेस और भाजपा के लिए तो कुर्सी और केवल कुर्सी ही पहली और अंतिम प्रारथमिकता है। वह चाहे घोडे या गधे पर सवार होकर ही क्यों न आये। उत्तराखण्ड की परिकल्पनाऐं, शहीदों के सपने तो जिन्दल, शराब, खनन व भू माफिया के यहां गिरवी रख चुके हैं। तब तिरंगे का अपमान भी हो तो उन्हें काठ मार तायेगा।
मुख्यमंत्री जी! शक्तिमान के साथ फोटो ख्ंिाचाकर जिस राजनैतिक लाभ में आप अपने को पा रहे हैं जिन्दल से नजदीकी और नैनीसार के हमलावरों की गिरफ्तारी रोकना आपको उससे भी महंगा पडने वाला है।
बुधवार, 9 मार्च 2016
समीर रतूडी के जीवन से न खेले सरकार, आन्दोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे अति शीघ्र वापस हों
हिमालय बचाओ आन्दोलन के नेता समीर रतूडी ने मंगलवार को जमानत लेने से इंकार कर आन्दोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जता दी है। जब न्यायिक मजिस्टेªट ने जमानत न लेने के कारण दूसरी बार उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
जेल में 17वें दिन अनशन पर रहे समीर रतूडी के स्वास्थ्य की चिन्ता होना लाजिमी है। मलेथा में क्रेशरों के विरोध में हुए आन्दोलन में माफिया की हार को खीज में बदलते देर नही लगी और समीर रतूडी व साथियों पर मुकदमे थोप दिए गये। समीर उन मुकदमों को फर्जी बताकर जमानत नही लेने पर अडिग हैं।
सरकार का माफिया को समर्थन की बात हर आन्दोलन में उजागर होती रही है और आन्दोलनकारियों पर मुकदमे वापस लेने की घोषणा के बावजूद समीर रतूडी की जिन्दगी से खिलवाड हो रहा है। मुकदमे वापसी में जितनी देर होगी वह सरकार की हृदयहीनता और आन्दोलनकारियों को सबक सिखाने जैसे कुत्सित प्रयासों में शुमार होगा।
हिमालय बचाओ आन्दोलन के नेता समीर की चिन्ता राज्य के उन संघर्षशील ताकतों और आम जनता को भी करनी चाहिए जिनकी लडाई वे लड रहे हैं। साढे सात किग्रा वजन घटने के साथ उन्हें कमजोरी और दूसरी दिक्कतें हो रही हैं। टिहरी जेल में समीर का संघर्ष उत्तराखण्ड के उस आम आदमी का संघर्ष है जो उत्तराखण्ड की बेहतरी का सपना देखता है जो माफिया मुक्त उत्तराखण्ड की लडाई लडता है और उसके लिए शान्ति पूर्ण तरीके से किसी भी सीमा तक संधर्ष का जज्बा रखता है। समीर आपके आन्दोलन उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी के नाते हमारा पूरा-पूरा समर्थन और सरकार से मांग कि आन्दोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे अति शीघ्र वापस हों।
खबर लिखे जाने तक समीर रतूडी को देहरादून के जाॅलीग्रांट अस्पताल में रिफर कर दिया गया है जहां चिकित्सक उनका उपचार कर रहे हैं।
जेल में 17वें दिन अनशन पर रहे समीर रतूडी के स्वास्थ्य की चिन्ता होना लाजिमी है। मलेथा में क्रेशरों के विरोध में हुए आन्दोलन में माफिया की हार को खीज में बदलते देर नही लगी और समीर रतूडी व साथियों पर मुकदमे थोप दिए गये। समीर उन मुकदमों को फर्जी बताकर जमानत नही लेने पर अडिग हैं।
सरकार का माफिया को समर्थन की बात हर आन्दोलन में उजागर होती रही है और आन्दोलनकारियों पर मुकदमे वापस लेने की घोषणा के बावजूद समीर रतूडी की जिन्दगी से खिलवाड हो रहा है। मुकदमे वापसी में जितनी देर होगी वह सरकार की हृदयहीनता और आन्दोलनकारियों को सबक सिखाने जैसे कुत्सित प्रयासों में शुमार होगा।
हिमालय बचाओ आन्दोलन के नेता समीर की चिन्ता राज्य के उन संघर्षशील ताकतों और आम जनता को भी करनी चाहिए जिनकी लडाई वे लड रहे हैं। साढे सात किग्रा वजन घटने के साथ उन्हें कमजोरी और दूसरी दिक्कतें हो रही हैं। टिहरी जेल में समीर का संघर्ष उत्तराखण्ड के उस आम आदमी का संघर्ष है जो उत्तराखण्ड की बेहतरी का सपना देखता है जो माफिया मुक्त उत्तराखण्ड की लडाई लडता है और उसके लिए शान्ति पूर्ण तरीके से किसी भी सीमा तक संधर्ष का जज्बा रखता है। समीर आपके आन्दोलन उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी के नाते हमारा पूरा-पूरा समर्थन और सरकार से मांग कि आन्दोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे अति शीघ्र वापस हों।
खबर लिखे जाने तक समीर रतूडी को देहरादून के जाॅलीग्रांट अस्पताल में रिफर कर दिया गया है जहां चिकित्सक उनका उपचार कर रहे हैं।
सोमवार, 7 मार्च 2016
रीजनल रिपोर्टर ने रखा वेव दुनिया में कदम , वेव साइड लांच
श्रीनगर, 7 मार्च, सरोकारों से साक्षात्कार की पत्रिका रीजनल रिपोर्टर ने वेव दुनिया में प्रवेश स्व संपादक द्वय के पथपर चलते हुए वेव साइड लांच हुई है। प्रकाशक एवं संयुक्त संपादक गंगा आसनोडा थपलियाल ने कहा- संपादक द्वय के महाप्रयाण की यह तिथि वेव साइड लांच कर रीजनल रिपोर्टर परिवार उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहा है।
कोमल व रुचि द्वारा बनाई गयी वेवसाइड में होम पेज, विजन, विशेष सहयोग, एडीटारियल, एडीटोरियल बोर्ड, समदर्शी की कलम से, कवर स्टोरी, न्यू मीडिया गुरु, बकम बम जी बकम बम व जानें अपने राज्य को पृष्ठ हैं तो रीजनल रीपोर्टर का ब्लाग, ट्वीट, संपर्क और फोटो गैलरी के आंपशन हैं।
पत्रिका की संरक्षक सुशीला थपलियाल के हाथों वेवसाइड लांच हुई। इस अवसर पर संपादक पुरुषोत्तम असनोड़ा, कार्यकारी संपादक एल मोहन कोठियाल, प्रकाशक एवं संयुक्त संपादक गंगा असनोड़ा थपलियाल, प्रसार प्रवन्धक अंजना भट्ट घिल्डियाल, प्रो एस एस रावत, कृष्ण कांत चंदोला, प्रतिभा चंदोला, गिरजा शंकर थपलियाल, गौरी शंकर थपलियाल, शशि मोहन कण्डवाल, तृप्ति कण्डवाल, योगेन्द्र मोहन बडौनी, अरुणा बडौनी, लक्ष्मी प्रसाद बडौनी, शशांक कण्डवाल, लीला असनोड़ा, जयकृष्ण पैन्यूली, के के थपलियाल, सुधीर शुक्ला, कुसुम लता थपलियाल, हिमांशु थपलियाल, महेशगिरी, संदीप रावत, राम कृष्ण पोखरियाल, राजेश सुयाल, सुमित्रा जोशी, सीना उपाध्याय, कंचन नेगी, पूजा सहित बहुत से लोग उपस्थित थे।,
मंगलवार, 1 मार्च 2016
चकबन्दी दिवस कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम
गैरसैंण, 1 मार्च,
राजकीय इण्टर कालेज मैदान में चैथे चकबन्दी दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। काफल ग्रुप राजकीय जूनियर हाई स्कूल दिवागाड के बच्चों द्वारा बीस लोकनाट्यों पर आधारित संक्षिप्त पांडव नृत्य पेश किया गया वहीं महिला मंगल दल बछुवाबाण की महिलाओं ने पारम्परिक परिधानों में नन्दा की चांछडी लोकनृत्य प्रस्तुत किया।
कार्यक्रमों की शुरूआत स्थानीय लोकगायिका सुनीता रावत ने लोकधुनों पर आधारित चकबन्दी गीत ‘‘देख तुम्हे धरा पुकारती’’ और नन्दीसार महाराष्ट्र से आये युवा किसान रवीन्द्र कुंवर ने ध्यान सिंह नेगी द्वारा रचित गढवाली चकबन्दी गीत ‘‘पुंगडों की तितरी बितरी देखी अजब गजब होई बकि बात’’ गाकर स्रोताओं को भावविभोर किया।
चकबंदी दिवस कार्यक्रम में चकबंदी नियमावली बनने तक दोनों मण्डलों के दो-दो गांवों में चकबन्दी करने की मांग 1 मार्च को चकबंदी और कृषि दिवस घोषित करने की मांग नहीं पंहुचे हरक सिंह रावत
गैरसैंण, 1 मार्च,
गरीब क्र्रांंित अभियान द्वारा आयोजित चकबन्दी दिवस कार्यक्रम में गढवाल व कुमांऊ मंडल के कम से कम दो-दो गांवों में चकबन्दी प्रारम्भ करने, चकबन्दी के लिए जीवन पर्यत्न काम कर रहे गणेश सिंह गरीब के जन्म दिन को चकबन्दी और कृषि दिवस घोषित करने प्रचार-प्रसार में गरीब क्रांति अभियान का सहयोग लेने तथा ब्लाक स्तर पर किसान विद्यालय स्थापित करने की मांग की गयी।
गोष्ठि में ग्राम ब्लाक एवं जिला स्तरीय चकबन्दी जागरूकता गोष्ठियों एवं विधेयक परिचर्चा पर प्राप्त सुझाव एवं समाधानों का 10 पेज का दस्तावेज चकबन्दी सलाहकार समिति के अध्यक्ष केदार सिंह रावत को सौंपा गया ताकि राज्य में सर्वस्वीकार्य चकबन्दी की राह आसान हो सके। दस्तावेज में चकबन्दी लागू करने सम्बन्धी सुझाव में 14 बिन्दु सुझाये गये जिसमें भौगोलिक परिस्थिति, जमीनों की गुणवत्ता, जमीन हस्तान्तरण की प्रक्रिया आदि शामिल किये हैं। दस्तावेज चकबन्दी के लिए वातावरण सृजन पर जोर देता है ताकि लोग स्वेच्छा से चकबन्दी अपनाये। नई पीडी में कृषि औद्याकनकी को प्रोत्साहित करने के लिए 9 बिन्दुओं के सुझाव दिये गये हैं वहीं विभिन्न स्तरों पर जनता द्वारा उठाये गये व्यवहारिक सवालों का विवरण भी दिया गया है ताकि चकबन्दी से जुडे नियोजकों को नीति और कानून बनाने में आसानी हो।
मैती आन्दोलन के जनक कल्याण सिंह रावत की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम उन्होंने कहा- खेती और गांव बचाने के लिए कृषि शिक्षा को महत्व देना होगा जैसे हिमांचल ने अपने प्रदेश में किया है। कृषिमंत्री डा हरकसिंह रावत के कार्यक्रम में शामिल होने आश्वासन के बावजूद न पहुंचने पर गरीब क्रांति अभियान के कार्यकर्ताओं ने रोष व्यक्त किया।
एल मोहन कोठियाल और मनीष भट्ट के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में चकबन्दी आन्दोलन के प्रणेता गणेश सिंह गरीब ने कहा कि सरकार ने सलाहकार समितियां तो बनाई है लेकिन व्यवहारिक रूप में इस ओर तेजी से काम करने की जरूरत है। आयोजन के मुख्य अतिथि और चकबन्दी सलाहकार समिति अध्यक्ष केदार सिंह रावत ने कहा चकबन्दी कानून का ड्राफ्ट मुख्यमंत्री को दिया गया था तथा इस बजट सत्र में हम उसे पारित करने का प्रयास किया जायेगा।
इस अवसर पर मंगल सिंह नेगी, चतुर सिंह नेगी, कपिल डोभाल, बलवन्त गुंसाई, विकास ध्यानी, अनुप पटवाल, विजय सुन्दरियाल, मनीष सुन्दरियाल, रामकृष्ण पोखरियाल, गिरीश डिमरी, सरस्वती देवी, तनु पन्त, क्षेत्र प्रमुख सुमति बिष्ट, पूर्व प्रमुख जानकी रावत, सभासद कुसुमलता गैडी, रोशन बिष्ट, गढवाल महासभा के अध्यक्ष योगम्बर सिंह रावत, रवीन्द्र कुंवर, नितिन कुंवर, दिलीप सिंह रावत, रंगकर्मी अमित गुंसाई, उद्यान विशेषज्ञ केवलानन्द तिवारी आदि उपस्थित थे।
गरीब क्रांति के संयोजक कपिल डोभाल ने आगन्तुकों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मेलन में आने पर धन्यवाद किया।
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