रविवार, 10 जुलाई 2016

रीजनल रिपोर्टर -जून जुलाई 16 स्ंायुक्तांक-सरकार बहाल-जनता बर्खास्त
सरोकारों से साक्षात्कार की मासिक पत्रिका रीजनल रिपोर्टर का जून-जुलाई 16 संयुक्तांक सरकार बहाल-जनता बर्खास्त की कबर स्टोरी लिए है जिसमें उत्तराखण्ड में हुए समूचे राजनैतिक घटनाक्रम के बाद सरकार की बहाली के बावजूद जनता की लगातार बढती मुसीबतों से रुबरु कराया गया है। देश के कांग्रेस मुक्त का नारा देने वाली भाजपा उत्तराखण्ड में कांग्रेस के 10 विधायक लेकर किस प्रकार कांग्रेस युक्त हो गयी है कवर स्टोरी में ही व्याख्या की है संपादकीय सहयोगी सीताराम बहुगुणा ने। तीसरी कवर स्टोरी जीतेन्द्र अंथवाल ने चार धाम यात्रा को निरापद बताते हुए की है- बेखौफ चले आईये केदारनाथ। चार यात्रा पर वरिष्ठ पत्रकार हरीश चन्द्र चंदोला का आलेख है-चढाव उतार पर यात्रा।
संपादकीय सहयोगी विपिन बनियाल ने- राष्ट्रपति शासन में काम हरीश राज में ऐलान व हार जीत किनारे सुलग रहे दलों के घर आलेख लिखे हैं। कार्यकारी संपादक एल मोहन कोठियाल की खबरों की खबर में -मलाईदार हुआ प्रवन्धक का पद, राजनैतिक चालों से कमजोर होती भाजपा, मौसम विभाग- रोज रोज की वार्निंग, तथा नगर नामा में बागेश्वर पर अच्छी सामग्री है। हल्द्वानी प्रतिनिधि ओ पी पाण्डे ने मई जून में विभिन्न स्थानों पर हुए सिनेमा शो पर रिपोर्ट की है-सिनेमा को आम जन तक पहुंचाने का तरीका प्रतिरोध का सिनेमा। सोच और कर्म के धनी शिक्षक घनश्याम ढौंडियाल, प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी व विद्वान संपादक स्व रामप्रसाद बहुगुणा की स्मृति में पहले राज्य स्तरीय पुरस्कार समता संपादक दयाशंकर टम्टा को मिलने, एवरेस्ट विजेता नूतन वशिष्ठ पर विपिन सेमवाल का आलेख, मो व पुरोला के बागानों में आंधी तूफान का कहर-दलवीरसिंह रावत, कोठियाडा गांव तबाह-धूमसिंह जखेडी, गोपाल मेहरा ने परिश्रम से खडा किया कारोबार, मोहन काला की सक्रीयता से दावेदारों में बेचैनी, इन पत्रकारों के पौ बारह-डा वीरेन्द्र बत्र्वाल सहित कई आलेख हैं।जगमोहन रौतेला का आलेख जमीन के मालिकाना हक के लिए लडते लोग, व वीरेन्‍द्र पैन्‍यूलीकालेख सत्‍तरा में येसहत्‍तर तो नही विशेष हैं।
स्थाई स्तंभों में उर्मिल कुमार थपलियाल का व्यंग बकमबम-कोऊ हो राजा हमें तो हानि ही हानि, डा भरत झाुनझाुनवाला का आलेख-नेट न्यूट्रेलिटी के बढते कदम, जय प्रकाश पंवार‘जे पी‘नया समाज न्यू मीडिया सोसायटी, डा प्रीतम अपच्छांण का व्यंग-अतिथि प्रदेश में आपका स्वागत है व उत्तराखण्छ को जानिये में परिचय करा रहे है जी एस नेगी उत्तराखण्ड में स्थित अंतरराष्ट्रीय अंजरराज्यीय जल विद्युत योजनाओं से।
साहित्य में मनोजकांत उनियाल की कहानी-मुंशी जी,फिल्म समीक्षा भुली ऐ भुली-धनेश कोठारी,पुस्तक समीक्षा रंजना शर्मा के कविता संग्रह हस्ताक्षर- अतुल शर्मा, व अखिलेश चन्द्र चमोला की नैतिक बोधकथाण्ें- सीताराम बहुगुणा, विमल बहुगुणा का यात्रा वृतांत- थाईलेंड की यात्रा और रोमांच हैं।
बाल मन की उडान में अजिता तिवारी की बाल कहानी कर्म ही पूजा व कंन सिरस्वाल का स्वच्छता अभियान पर चित्र है। प्रजामंडल पार्टी पर सामग्री के साथ ही गठन के सबसे विषम दौर में उत्तराखण्ड संपादकीय है।
सरोकारों की पत्रिका से जुडने के लिए आज ही संम्पर्क करें-मो 9411354767, 9412079290, लेंडलाइन 01346-252298
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गुरुवार, 28 अप्रैल 2016

सरोकारों से साक्षात्कार की मासिक पत्रिका रीजनल रिपोर्टर के अप्रैल 16अंक


सरोकारों से साक्षात्कार की मासिक पत्रिका रीजनल रिपोर्टर के अप्रैल 16अंक में प्रख्यात स्तंभकार डा भरत झुनझुनवाला का आलेखडब्लूटीओ पर पुर्नविचार जरुरी पठनीय है. आई आई टी चैन्नई में प्रोफेसर रहे डा झुनझुनवाला आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ हैं-

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2016

स्‍याल्‍दे का गीत' बीजेपी है गे सटबटुवा कांग्रेस है गे जालि


स्याल्दे बिखौती नई परिस्थितियों मेंउसके अनुरुप लोकगीत, झोडे, चांचरी के सृजन की धरती रही है. जिसमें नई हलचल और देश- काल और समाज का विम्ब होता है, इसी परम्परा में इस वर्ष का गीत नया तो नही लेकिन ईधुनिक राजव्यवस्था पर कटाक्ष करता झोडा लोगों को पसन्द आयेगा-
बीजेपी है गे सटबटुवा-कांग्रेस है गे जालि
यूं पार्टियों लें करि हैछ- उत्तराखण्ड खालि
सुक पडि रौ सार पहाड-पाणि लिजी परसडि
विपिना तीलै राज बनाय- खुशि है गया हम
कुर्सी में बैठा चोर चकार-अब क्ये करु हम-----

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2016

उमेश डोभाल टस्ट्र द्वारा प्रति वर्ष दिए जाने वाले सम्मानों की घोषणा, डा प्रयाग जोशी, स्वामी प्रेमानन्द, जहूर आलम, चन्दन बंगारी, राहुल शेखावत व दाताराम चमोली होंगे सम्मानित

पौड़ी
   उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट के द्वारा हर वर्ष दिये जाने वाले सम्मानों व पत्रकारिता पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। इस आशय का निर्णय ट्रस्ट की बैठक में लिया गया। यह सम्मान व पुरस्कार 24 अप्रैल को उत्तरकाशी में होने वाले स्मृति समारोह में प्रदान किये जायंगेे। इन सबके तहत 11 हजार की धनराशि के अलावा अंग वस्त्र, प्रतीक चिन्ह दिए जाते हैं।  
इन सम्मानों में उमेश डोभाल स्मृति सम्मान डाॅ. प्रयाग जोशी को, राजेन्द्र रावत जनसरोकार सम्मान स्वामी प्रेमानन्द को ,व गिरीश तिवारी गिर्दा सम्मान संस्कृतिकर्मी जहूर आलम को दिया जायेगा। उल्लेखनीय है कि यह तीनों हस्तियां अपने-अपने क्षेत्र में लम्बे समय से कार्य में लगी हंै।
उमेश डोभाल स्मृति सम्मान पाने वाले लगभग 70 वर्’ाीय डाॅ0 प्रयाग जोशी का उत्तराखण्ड के संस्कृति, इतिहास, साहित्य में लम्बा योगदान रहा है। प्रयाग जोशी सेवानिवृत्ति के बाद भी लेखनरत हैं। आपने उत्तराखण्ड अनेक इन्टर कालेजों में सेवा दी। उसके बाद आपका चयन  उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हो गया और रायबरेली के फीरोज गांधी महाविद्यालय में प्रवक्ता पद पर नैतात हो गये। वहां से सेवानिवृत्त होने के बाद हल्द्वानी में प्रवास कर रहे हैं। चाहे वे कहीं रहे हों उत्तराखण्ड पर लेखन जारी रहा। प्रतिभा व बहुविज्ञता के धनी डॉ. प्रयाग जोशी ने अनेकों पुस्तकंे लिखी हैं।
वहीं नैनीताल के जहूर आलम का नाम कोई अनाम नहीं है। वे एक कवि, रंगकर्मी और  विचारवान संस्कृतिकर्मी हैं। नैनीताल की ज्यादातर संस्कृति गतिविधियों में उनकी भागीदारी रहती है। वे  संास्कृतिक गतिविधियों के प्रति एक समर्पित व्यक्तित्व हैं। जनगीतों नुक्कड   नाटकों, थियेटर या फिल्म फेस्टेवल सबमें उनकी भागीदारी रहती ही है। उनके गीत उत्तराखण्ड आन्दोलन के समय भी गुुनगुनाये गये थे। उनकी अगुआई में कुमाउंनी होली की रंगत देखनी हो या नाटकों का मंचन आप जान जायेंगे कि साम्प्रदायिक सदभावना कहने-सुनने की नहीं, सुनने की चीज है। जहूर ने नैनीताल के थियेटर ग्रुुप युगमंच को जिन्दा रखा है।
उत्कल विश्वविद्यालय भुवनेश्वर उड़ीसा से कृषि में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद संन्यास लेकर उत्तराखंड में बसने वाले 77 वर्’ाीय स्वामी प्रेमानंद 52 साल से समाजसेवा का कार्य कर रहे हैं। पहले उत्तरकाशी के गणेशपुर गांव में ठिकाना बनाकर बीस सालों तक आसपास के गांव के बच्चों को निशुल्क पढ़ाया। अभी तक वे हर साल डेढ़ सौ गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्चा वहन कर रहे हैं। इन उम्र में भी वे आश्रम में आने वाले बच्चों को निराश नहीं करते, बल्कि पूरी लगन से उन्हें पढ़ाकर बच्चों का भविष्य संवारने में मदद करते हैं। स्वामी प्रेमानंद की मदद का ही नतीजा है कि गणेेशपुर तथा आसपास के गांवों के कई लड़के लड़कियां डाक्टर, इंजीनियर तथा दूसरी नौकरियों में हैं। उनकी मदद से आत्मनिर्भर होकर अपना घर परिवार चलाने वालों की भी बड़ी संख्या है।
उनके आश्रम में ही एक अस्पताल भी है जहां ग्रामीणों को निशुल्क चिकित्सा सेवा, दी जाती है। मरीजों के लिये उनके यहां दोपहर में निशुल्क भोजन की व्यवस्था भी रहती है। यहां दांत व आंखों की चिकित्सा के साथ ही आधुनिक मशीनों से लैस ऑपरेशन थियेटर व पैथोलॉजी लैब भी है। यहां फिजियोथैरेपी की सुविधा है। अस्पताल की दो एंबुलेंसे भी हैं। संन्यासियों की तरह रहो और काम करो के आदर्श वाक्य को लेकर चलने वाले स्वामी प्रेमानंद के सेवा भाव से प्रभावित उनके आश्रम को मदद मिलती रहती है जिससे वे इस कार्य में लगा देते हंै।
वहीं 2015 के उमेश डोभाल पत्रकारिता पुरस्कारों में प्रिन्ट मीडिया के लिये अमर उजाला रुद्रपुर में कार्य कर रहे चन्दन बंगारी, इलेक्ट्रानिक मीडिया में लम्बी पारी खेलने वाले ईटीवी देहरादून से राहुलसिंह शेखावत और सोशियल मीडिया में सक्रिय रहने वाले दाताराम चमोली के नाम पर निर्णय हुआ। दैनिक हिन्दुस्तान रामनगर व अल्मोड़ा में कार्य कर चुके चन्दन बंगारी वर्तमान में अमर उजाला रुद्रपुर में कार्यरत है। वहीं शेखावत ईटीवी के संवाददाता हंै और जनपक्षीय समाचारों को लगातार देते रहे हैं। दाताराम चमोली सन्डे पोस्ट के संवाददाता होने के अलावा सोशियल मीडिया में बहुविषयों पर तथ्यपरक पोस्ट करते आये हंै। बैठक में ट्रस्ट के गिरीश डोभाल, बिमल नेगी, सुरेन्द्रसिंह रावत, रवि रावत, बीरेन्द्र पंवार, यमुनाराम, एल मोहन कोठियाल आदि उपस्थित थे।  

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2016

राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्यूंणी का गोल्डन जुबली कार्यक्रम रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न विद्यार्थियों के सामान्य ज्ञान को सराहा दर्शकों ने



गैरसैंण, 
    क्षेत्र में शिक्षा प्रयोगों का महत्वपूर्ण केन्द्र और नवाचारी शिक्षा में अव्वल राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्यूंणी मल्ली के स्वर्ण जयन्ती समारोह रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सम्पन्न हुआ। गढवाली, कुमांऊनी, जौनसारी लोकगीत लोकनृत्यों की अद्भुद छटा के बीच विद्यार्थियों का सामान्य ज्ञान दर्शनीय रहा।
    विद्यालय के बच्चों को विश्व के सभी देशों की राजधानी व स्थितियां मालूम हैं तो किसी भी प्रदेश के जिले और उससे सम्बन्धित जानकारियों का भी ज्ञान हैै। व्यक्ति परिचय व भूगोल व इतिहास के प्रश्न वे चुटकियों में हल कर सकते हैं। किसी भी महंगे पब्लिक स्कूल के शिक्षण साजसज्जा और वातावरण को पिछाडने में सक्षम राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्यूंणी मोटर सडक से 4 किमी दूर खडी चढाई में है। जहां 40 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं जिनमें 21 लडकियां व 19 लडके शामिल हैं।
   विद्यालय के प्रधानाध्यापक घनश्याम ढौंडियाल ने पिछले 20 वर्षों के अथक प्रयासों से विद्यालय को ना केवल सजाया संवारा है बल्कि स्यूंणी मल्ली को शिक्षा क्षेत्र में एक नई पहचान दी है।
  समारोह के मुख्य अतिथि एबीएमए प्लान परियोजना प्रबन्धक गिरीश डिमरी ने कहा सरकारी स्कूलों से जहां अभिभावकों का मोह भंग हो रहा है वहीं स्यूणीं मल्ली या धामदेव जैसे विद्यालय उस धारणा को आईना दिखाने के लिए काफी हैैं। उन्होनें खेद के साथ कहा विकासखण्ड में बने मोडल स्कूलों में इन दोनों स्कूलों का नाम नहीं है जो अधिकारियों की सोच को प्रकट कर रहा है।
   विशिष्ठ अतिथि एचपी गैस प्रबन्धक एचएस रावत ने कहा उत्तराखण्ड राज्य गठन के साथ ही यदि स्यूंणी मल्ली जैसे विद्यालय प्रमोट होते तो पहाडों से पलायन नहीं होता। उन्होनें रीजनल रिर्पोटर के अंक का उल्लेख करते हुए कहा घनश्याम ढौंडियाल व विद्यालय के बारे में प्रकाशित आलेख से स्यूंणी मल्ली के बारे में उनकी जिज्ञासा जगी।
   शिक्षक रमेश चन्द्र के संचालन में हुए समारोह को पूर्व प्रधानाचार्य एलपी सती, राजकीय प्राथमिक शिक्षा संघ मंत्री मोहन सिंह रावत, पूर्व प्रधान उत्तम सिंह रावत आदि ने सम्बोधित किया। इस अवसर पर ग्राम प्रधान लीला देवी, क्षेपंस माहेश्वरी देवी, ममंद अध्यक्ष लीलावती देवी, पूर्व प्रधान देव सिंह बिष्ट, शिक्षक जसपाल नेगी नन्दलाल यादव, कुशलानन्द बरमोला, पूर्व प्रधान देव सिंह बिष्ट, धीरज सिंह, मोहन सिंह, जमन सिंह, राजेन्द्र सिंह, उपप्रधान जसवन्त सिंह, मन्जू देवी आदि उपस्थित थे।
  


बुधवार, 23 मार्च 2016

हरिदत्त बहुगुणा का जाना उततराखण्ड राज्य आन्दोलन के एक युग की विदाई है।

हरिदत्त बहुगुणा का जाना उततराखण्ड राज्य आन्दोलन के एक युग की विदाई है। 
उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के योद्धा, विचारक, शिक्षक, राजनैतिक, सामाजिक कार्य कर्ता और सबसे अधिक एक सच्चे इंसान हरि दत्त बहुगुणा हमारे बीच नही रहे। काफी समय से यकृत की बिमारी बाद एक साल पहले उनके आंत में संक्रमण निकल आया था और दिल्ली के गंगा राम अस्पताल से इलाज चल रहा था। 
कल 22 मार्च 16 को सायं उत्तराखण्ड के महान योद्धा ने हरिद्वार में अपने आवास सांस ली। धर्मपत्नी, पुत्र, पुत्रवधू, पोती सहित परिवार को विलखता छोड गये स्व बहुगुणा हमारे पारिवारिक मित्र और संरक्षक थे। कवि हृदय, स्पष्ट वक्ता और लगन के धनी बीएचईएल के शिक्षक हरिदत्त बहुगुणा उत्तराखण्ड क्रांति दल के वरिष्ठ नेताओं में शुमार थे और राज्य के हर गांव, अली मौहल्ले से उनका परिचय था। वे राज्य की दशा -दिशा के प्रति चिन्तित रहने वाले मार्गदर्शी थे और सन् 1991 में उक्रांद द्वारा बनाये गये उत्तराखण्ड के ब्लू प्रिंट बनाने वाले मार्गदर्शियों में एक भी। 2009 में उक्रांद छोड कांग्रेस में शामिल होने के बाद भी वे उत्तराखण्ड के मुद्दों पर सक्रीय थे। रीजनल रिपोर्टर सहित कई पत्र- पत्रिकाओं में उनके ेलेख बराबर प्रकाशित होते थे जो लेखन और राज्य की चिन्ताओं का दस्तावेज हैं।
आत्मा की अमरता और शरीर की जीर्णता के तर्क के साथ उनका चले जाना जीवन की वे अनचाही और अनिवार्य स्थितियां हैं जिन्हें स्वीकार करना ही होता है। ऐसे महापुरुष जिनके व्यवहार में हमेशा स्नेह टपकता हो, जो विद्वता से अपनी बातें कहता हो और जिससे शिष्टाचार भी शिष्टता सीखता हो और जो उततराखण्ड की परिकल्पनाओं का साक्षी ही नही सर्जक भी हो ऐसे मानव की कमी हमेशा खलेगी।
ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दें, और शोक संतृप्त परिवार को दुख सहने की सामथ्र्य दे।
ओउ्म शान्ति-शान्ति-शान्ति