सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

चकबन्दी दिवस कार्यक्रम कल, आज निकली रंग यात्रा कृषि मंत्री हरकसिंह रावत हैं मुख्य अतिथि



   गैरसैंण, 29 फरवरी, झमाझम वर्षा के बीच चकबन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर निकली रंगयात्रा चकन्दी के नारों जनगीतों और स्लोगन की तख्तियों के साथ गैरसैंण की सडकों पर एक बार आन्दोलन की यादें ताजा कर गयी।
  गरीब क्रांति अभियान द्वारा चकबन्दी आन्दोलन की पुरोधा गणेशसिंह गरीब के जन्म दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में कुषि मंत्री डा हरकसिंह रावत, विधान सभा उपाध्यक्ष डा अनुसूया प्रसाद मैखुरी,चकबन्दी सलाहकार अध्यक्ष केदारसिंह रावत और स्वयं गणेशसिंह गरीब शिरकत कर रहे हैं।
   रामलीला मैदान में वीर चन्द्रसिंह गढवाली की मूर्ति के सामने से शुरु हुई रंग यात्रा में ‘ले मशालें चल पडे हैं लोग मेरे गांव के,‘ जनगीत, खेतों की दूरी मिटानी है- चकबन्दी जरुरी है, पहाड बचाने हैं-चकबन्दी लानी है आदि नारों के साथ चकबन्दी के स्लोगन की लिए कार्यकर्ताओं ने रंगयात्रा निकाली जो चैराहा, डाक बंगला रोड, तहसील कार्यालय, वीर चन्द्रसिंह गढवाली मार्ग होत हुए रामलीला मैदान में समाप्त हुई।
  रंगयात्रा में गरीब क्रांति अभियान संयोजक कपिल डोभाल, ललित कोठियाल, बी मोहन नेगी, संजय बुढाकोटी, अमित गुसांई, विकास ध्यानी, डी के तिवारी, मैती आन्दोलन के कल्याणसिंह रावत, अनूप नेगी, तन्नू पंत, चतुरसिंह नेगी, अनूप पटवाल, गजेन्द्र नौटियाल, कुलदीप नेगी, पुरुषोत्तम असनोड़ा आदि ने शिरकत की।

शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

मुस्कराइये! कि आप डेढ लखिया हो गये, मलेथा और नैनीसार की बात जेल भेजेगी


पुरुषोत्तम असनोड़ा
   उत्तराखण्ड में प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक आय एक लाख चैवन हजार आठ सौ अठ्ठारह रु अनुमान है जो गत वर्ष की 139184रु से 7.6 प्रतिशत अधिक है। 7.65 प्रतिशत विकास दर ंसे राष्ट्रीय औसत के लगभग है जबकि प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से राष्ट्रीय औसत 93231रु है। अर्थ एवं संख्या निदेशालय के आंकडे 2011-12 से लगातार बढोतरी प्रदर्शित कर रहे हैं। 2011-12 में उत्तराखण्ड की प्रति व्यक्ति औसत आय 85372रु थी।
  आय में यह वृद्धि तब छठें वेतनमान से राज्य कर्मियों और शिक्षकों को हुए लाभ का कारण बताया गया था। सातवें बेतन आयोग लागू होने के बाद अगले वर्ष यह व्द्धि और और आगे जायेगी। अंाकडे तो आंकडे हैं कृषि विकास दर 3.09 प्रतिशत की वृद्धि बताती है कि उनकी सच्चाई क्या है? गांव खली हुए खेत बंजर हो गये, जंगली जानवरों का आतंक बढ गया, मैदानों में पहाड के पलायन का असर वहां की कृषि भूमि में रिहायशी मकान बनने से सिकुडाहाट हुई, और विकास दर बढ गयी?
  सडक, बिजली, पानी,यातायात, शिक्षा, चिकित्सा कार्यालयों के काम काज पर आय वृद्धि का असर क्यों नही दिख रहा है? 338 गांवों जो के दौर से  रहने के योग्य नही रहे हैं और विस्थापन व पुनर्वास की आवश्यकता के लिए धन और भूमि मुहैया नही हो रही है। सरकारी आंकडे पहाडी जिलों डेढ लाख घरों में ताले लटके होने की बात स्वीकार रहे हैं।  सडकों की हालत एक दशक पहले जो थी वह नही सुधरी है। शिक्षा में कई प्रयोगों के बावजूद सरकारी विद्यालय इसलिए बन्द हो रहे हैं कि वहीं छात्र नहीं हैं। चिकित्सालयों में डाक्टरों को ला पाना तो दूर सरकार खुद कहती है चिकित्सक पहाड नही चढना चाहते। रोज नई घोषणाऐं और फिर धनाभाव का रोना, अजब- गजब का प्रदश हो गया है उत्तराखण्ड। 
       विकास और शिक्षा की कहानी नैनीसार से शुरु हो गयी जिन्हें विकास और शिक्षा चाहिए वे जिन्दल जैसे माफिया को जमीन देने पर एतराज न करें जो  करेंगे वे विकास व शिक्षा के विरोधी हैं। माधोसिंह मलेठा की कर्म भूमि में क्रेसर लगाने वाले उत्तराखण्ड की अर्थ व्यवस्था के मित्र हैं और जो मलेथा की उपजाऊ भूमि जिसके लिए वीर माधोसिंह ने अपने पुत्र की बलि दे दी थी को बंजर बनने से बचाने वालों को जेल ठूंस दो। मुख्य मंत्री द्वारा प्रारम्भ की गयी यात्रा रुकने वाली नही है जो उन्होंने हलद्वानी में कह दिया है।
 निर्जन गांव की आखिर कहानी है क्या? वही विकास, वही शिक्षा-चिकित्सा, सडक, पानी, बिजली और रोजगार। उत्तराखण्ड के जिन घरों में ताले लगे उन्हें अपने घर बन्द करने का शौक नही रहा होगा। अभी गांव की जमीन पर माफिया बिठा दो, कल उन घरों में, अगले दिन देश की सीमा के गांवों में विदेशी बसाओ और किस्सा खत्म। सब निर्जन हो रहा है इसलिए किसी को विकास, किसी को शिक्षा, किसी को रोजगार और जो बचे उसे गुण्डागर्दी के लिए ही सही दे दो उत्तराखण्ड की जमीन, हवा-पानी। दे भी दिया है जल विद्युत परियोजनाऐं ने लूट तो लिए हैं संसाधन।
शायद उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के 15 सालों में जनता ने खुश रहने का प्रयास नही किया। जनता जल विद्युत योजनाओं की खिलाफत करते रहे और लूटने और लुटवाने में मसगूल रहे।
जनता पिटती रही और वे पीटते रहे। उन्हें खनन-शराब से आ रही  अकूत संम्पदा की फिक्र थी और जनता को उसे बचाने की। जब रास्ते अलग थे टकराव कीं न कही होना थ। वह मलेथा या नैनीसार कहीं भी हो सकता था। सत्ता पहले ही दहाड रही थी- खाता न वही हम ही सही, अब तो आंकडे भी हैं- सबको डेढ लखिया बना दिया अब भी रोते हो रोओ। हम तो अपनी मन की करेंगे ही, चाहे उत्तराखण्ड जिसके हाथ बिक जाये। 
     

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2016

शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज अस्वस्थ, कोटेश्वर आश्रम में हो रहा है उपचार


 बदिराश्रम ज्योतिर्पीठ के शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम जी महाराज अस्वस्थ हैं और रुद्र प्रयाग के कोटेश्वर महादेव गाभ्म में उपचार चल रहा है।
  73 वर्षीय विद्वान संत, धर्म के मर्मज्ञ और बदरीकाश्रम ज्योतिर्पीठाधीश्वर माधवाश्रम जी महाराज वेद, धर्म के विद्वान होने के साथ ही जनसरोकारों से जुडे संत हैं।
  उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन, शराबबन्दी आनदोलन और गैरसैंण राजधानी आन्दोलन में प्रत्यक्ष भाागीदारी करते रहे हैं। पिछले दिनों बे्रन हैमरेज के चलते उन्हें पीजीआई चंडीगढ में उपचार दिया गया था, जहां से महाराज जी ने कोटेश्वर आश्रम आने की इच्छा जताई थी।
  महाराज के शिष्य वशिष्ठ जी ने बताया कि महाराज के स्वास्थ में सुधार है और आश्रम में ही चिकित्सक उन्हें पी जीआई के निर्देशों के अनुसार उपचार दे रहै। श्रद्धालु शंकराचार्य महाराज के दर्शनों के लिए बडी संख्या में रोज वहां पहुंच कर स्वास्थ्य लाभ हेतु प्रार्थना कर रहे हैं।
  गैरसैंण से उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी पुरुषोत्तम असनोड़ा, यायावर स्मृति समिति महासचिव डा सी एस भण्डारी व जयसिंह नेगी ने  कोटेश्वर आश्रम में शंकराचार्य महाराज के दर्शन किए और भगवान शंकर से उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की। 



गुरुवार, 18 फ़रवरी 2016

ओफ! इस गुण्डई की हद है, हवा भी पूछेगी मेरी फिंजा में जहर किसने घोला रौतज्यू!


         नैनीसार में जिन्दल नामक जिस भ्ास्‍मासुर को हरीश रावत उठा कर लाये हैं वह उत्तराखण्ड को तो तबाह करेगा ही , स्वयं हरीश रावत के लिए भी भस्मासुर शावित होगा। नैनीसार में भूमि आवंटन से लेकर उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पी सी तिवारी पर हमला तक और राष्ट्रीय तिरंगे के अपमान से लेकर माओवादी गतिविधियों तक सब कुछ उत्तराखण्ड और कांग्रेस की हरीश रावत सरकार के असफलता के लक्षणहैं।
        सच में तो उत्तराखण्ड उस दिन सुलग जाना चाहिए था जब जिन्दल के गुण्डों ने उत्तराखण्ड के एक प्रखर आन्दोलनकारी पर हाथ उठाया।  फिर उस दिन दिन सुलगता जब स्वतंत्रता सेनानी द्वारा फहराये राष्ट्रीय तिरंगे को उतारने का देशद्रोह हुआ। जिस जिदल की कंटीली चार दिवारी में करंट हो और कोई उसे फांदे जिन्दल के लोग उसे न देखें , ऐसा हो कैसे गया? अपने पाप छुपाने को क्या-क्या तरीके ये लोग अपनायेंगे नही कह सकते?
      रावत साहब! आपसे विनती है उत्तराखण्ड की फिंजा खराब न करें। आप अपने 45-50 साल के उत्तराखण्ड की राजनीति का बार-बार हवाला देते हैं। हम लोग कम से कम 40 साल उत्तराखण्ड के सामाजिक कार्यकर्ता आन्दोलनकारी के रुप में काम कर रहे हैं और हमें भी आपकी राजनीति की जानकारी कुछ न कुछ तो जानकारी रही होगी। आप राजनीति में पाने के लिए आयें हैं, हमने लोगों प्लस-माइनस का कभी ध्यान नही किया। आप अपने को राज्य आन्दोलन से जुडा व्यक्ति कहते हैं, हम आपके राज्य आन्दोलन की भूमिका भी जानते हैं।
      संडे पोस्ट के संपादक अपूर्व जोशी को आपने जो पत्र लिखा है उसमें अपनी गांव की सडक का भी जिक्र है। आप बतायेंगे कि दुभणा बैंड- चमडखान की 3 किमी सडक आपके गांव क्यों गयी? ताडीखेत के पूर्व प्रमुख जीवनसिंह रावत से पूछिए जो दुभणा बैंड- चमडखान के 3 किमी मोटर मार्ग के जी ओ के साक्षी हैं। चूंकि आप सांसद बनते ही सडक अपने गांव ले आये और वह सडक आज तक नही बनी।
  उत्तराखण्ड देवभूमि है और यहां गुण्डों की जरुरत नही है। आप अपने बुढापे में तब मोहनरी सकून रह सकेंगे जब गुण्डे नही होंगे, अन्यथा बुढापा खराब समझिए। जिन्दल के गुण्डों से उत्तराखण्ड का वातावरण खराब मत करिए।  अन्यथा गाड-गधेरे ही नहीं हवा भी पूछेगी- मेरी फिंजा  में जहर किसने घोला रौत ज्यू!      

बुधवार, 17 फ़रवरी 2016





स्व डा उमाशंकर व भवानीशंकर की पहली पुण्य तिथि
जनपक्षीय पत्रकारिता की चुनौती पर गोष्ठी- सिमट रही जनपक्षीय पत्रकारिता पर जाहिर हुई चिन्ता
भवानी शंकर की प्रतिबद्धता मूल्यों के विकास की पत्रकारिता थी
   रीजनल रिपोर्टर के संपादक द्वय स्व डा उमाशकर थपलियाल व भवानी शंकर  थपलियाल की पहली पुण्य तिथि पर हेमवती नन्दन बहुगुणा केन्द्रीय विश्व विद्यालय बिडला परिसर सभागार में आयेजित विचार गोष्ठी में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया।
   भवानी शंकर स्मृति गु्रप की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जनपक्षीय पत्रकसरिता की चुनौती पर बोते हुए मुख्य वक्ता वरिष्ठ स्तंभकार डा भरत झुनझुन ने कहा-वौलिटियरी पावट्र्री के बिना जनपक्ष मजबूत नहीं होगा । उन्होंने कहा-मनु स्मृति का ब्राह्मण, लेनिन की पार्टी कैडर और गांधी जी का लोकसेवक  जनता से की शक्ति थी। डा झाुनझुनवाला ने कहा- हम जनपक्ष सोच लें कोई हमें डिगा नही सकता।
  एनडीटीवी के सुशील बहुगुणा ने कहा-पत्रकारिता के लिए जिस सोचा और समझा की जरुरत होती है वह कम होती जा रही है। हम सत्ता या आम जन में किसके पक्षधर हों ये महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा- विाषम स्थितियों, साधनों की नितान्त कमी के बावजूद भवानी ने रीजनल रीपोर्टर को जो धार दी वह जनपक्षीय पत्रकारिता की मिशाल है।
  नवभारत टाइम्स के चन्द्रभूषण ने पत्रकार के लिए जमीन और खाद की आवश्यकता बताते हुए कहा-आज की पत्रकारिता में जनपक्ष सिकुड रहा है। उन्होंने कहा- भवानी की जगह खाली है और उस जगह के लिए कई भवानी पैदा हो तभी वह पूर्ति हो सकेगी। उन्होंने पत्रकारिता को निजी विचार धारा से अलग कर वासत्विकता लोगों के बीच लाने की आवश्यकता बताई।
    डा एस पी सती ने डा उमाशंकर व भवानी शंकर को याद करते हुए कहा- पत्रकारिता के दो स्तंभों का एक साथ हमसे विदा होना दुखदायी है।ं रीजनल रिपोर्टर के संपादकीय सहयोगी गंगासिह ने कार्यवृत प्रस्तुत करते हुए रीजनल  रिपोर्टर के सरोकारों से साक्षत्कार की थीम बताई। इन्द्रेश मैखुरी के संचालन में हुए कार्यक्रम के  समापन अवसर पर डा अरुण कुकसाल ने रीजनल रीपोर्टर के वैचारिक और आर्थिक प़क्ष को सहयोग हेतु अपील की और पत्रिका दायित्व कुशलता से संभाल रही गंगा असनोड़ा थपलियाल की सराहना की।
  आयोजन टीम के सीताराम बहुगुणा, एल मोहन कोठियाल, डा डी आर पुरोहित, पूर्व पालिकाध्यक्ष कृष्णानन्द मैठानी, वरिष्ठ पत्रकार सुरेश नौटियाल, गणेश खुगशाल गणी, मधु झुनझुनवाला, डा सुरेखा डंगवाल, डा आर आर नौटियाल, सुधीर भट्ट, अनूप नौटियाल, प्रो ए आर डंगवाल, डा वी सी नैथानी, नीरज नैथानी, डा सी एस भण्डारी, डा बी डी कुकरेती, साहिबसिंह सजवाण, डा जे एस बिष्ट, अतुल सती, सीमा सती, अंजना भट्ट घिण्डियाल सीना उपाध्याय, रोशन नैलवाल, जगदीश भट्ट,  आदि बडी संख्या में लोग उपस्थित थे ।

मंगलवार, 16 फ़रवरी 2016

   17 फरवरी 2015 हमेशा दैविव्यमान रहने वाला सूरज काली रोशनी लेकर आयेगा कौन सोच सकता है। नाम से शंकर, घर का नाम शंकर, भगवान शंकर के उपासक और भगवान शंकर का ही दिन शिवरात्रि, हमारे अजीज भवानी शंकर व डाॅ उमाशंकर की चिरविदाई जिनसे श्रीनगर, उत्तराखण्ड और देश-विदेश के उनके परिजनों पर जो प्रतिघात हुआ उसकी आज पहली पुण्यतिथि है।
   डाॅ उमाशंकर थपलियाल पत्रकारिता, साहित्य, खेल और सामाजिक जीवन के वह स्तम्भ थे जिसकी रिक्तता हमेशा महसूस की जायेगी। रीजनल रिर्पोटर के प्रबन्ध सम्पादक, आकाशवाणी के सम्वाददाता, यूएनआई, हिन्दुस्तान टाइम्स, टाइम्स आॅफ इण्डिया, लोकमत, बिजनौर टाइम्स, देवभूमि सहित दर्जनों संस्थानों से जुडे रहे डाॅ थपलियाल पत्रकारिता के बडे स्तम्भ थे। साहित्य और संस्कृति के पुरोधा और सामाजिक जीवन के अभिन्न अंग हमारे अपने थे।
   रीजनल रिपोर्टर के युवा सम्पादक भवानी शंकर की प्रतिभा ज्ञान और सरोकारों को समझने की क्षमता हम सब से अधिक थी। श्रीनगर में रहते हुए देश दुनिया की खोज, अविष्कार, शिक्षा, राजनीति, इतिहास और भूगोल की जो जानकारी उनके पास होती थी वह शायद ही किसी के पास होती थी। हंसमुख, काम पर उलझे रहने वाले और स्वप्न दृष्टा भवानी का असमय जाना खलता है।
   इस एक साल में रीजनल रिपोर्टर की गुरूत्तर जिम्मेदारी बेटी गंगा व रीजनल रिपोर्टर के सम्पादकीय सहयोगी मित्रों, शुभचिन्तकों, परिजनों, पाठकों व विज्ञापनदाताओं ने जितनी तत्परता से सम्भाली है उन सब का स्नेह, आदर सम्पादक द्वय के प्रति प्रदर्शित होता है। अपने प्रिय भवानी व डाॅ उमाशंकर थपलियाल आप पितर श्रेणी में पंहुच गये हैं। आपकी व आपके द्वारा दिखाये गये मार्ग पर चलने के प्रयास की ही हामी भर सकते हैं।
   आपको श्रद्धासुमन! कोटी-कोटी नमन

शनिवार, 13 फ़रवरी 2016

मुख्यमंत्री जनसंवाद,पारदर्शिता और विकास जैसे जुमलों से जनता को गुमराह कर रहे हैं-प्रभात ध्यानी द्वाराहाट में उपपा कार्यकर्ताओं ने फूंका मुख्यमंत्री का पुतला

गैरसैंण,13 फरवरी
        उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी केन्द्रीय प्रधान महासचिव प्रभात ध्यानी सहित छः   उपपा व सहयोगी संगठन नेताओं को रामनगर में मुख्य मंत्री हरीश रावत के आने से पहले गिरफ्तार करने को उपपा ने सरकार की तानाशाही करार दिया है।  दिन में 1.20 बजे प्रभात ध्यानी केसर राणा, पंकज, ललिता रावत, मनमोहन अग्रवाल व मनीन्द्र सेठी को सी ओ स्वतंत्रकुमार व कोतवाल कैलाश पंवार ने गिरफ्तार कर लिया और शायं 5 बजे कालाढुंगी के एसडीएम अशोक जोशी ने उनकी रिहाई की।
        प्रभात ध्यानी ने बताया कि वे मुख्यमंत्री का विरोध करने की बात नही कर रहे थे बल्कि नैनीसार पर मुख्य मंत्री जो गलत बयानबाजी कर रहे हैं उसका जवाब जरुर लेना चाहते थे। उन्होंने कहा- एक ओर हरीश रावत जनसंवाद जैसा ढोंग कर रहे हैं दूसरी तरफ लोगों को अपनी बात कहने पर पुलिस बल का प्रयोग हो रहा है। जनसंवाद, पारदर्शिता और विकास जैसे जुमले बेकार हो गये हैं।
          उन्होंने कहा- नैनीसार से मुख्यमंत्री की पोल खुल गयी है जहां उन्होंने उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी  अध्यक्ष पर जानलेवा हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी रोकने का काम किया है और उल्टे पी सी तिवारी की गिरफ्तारी करवाई है।
       उपपा प्रधान महासचिव ने कहा- जनता सरकार की कारगुजारियों को समझ गयी है इसलिए आज नैनीसार में उनके दायित्वधारियों को जनता के भारी विरोध का सामना करना पडा।
       प्रभात ध्यानी और साथियों की गिरफ्तारी की उत्तराखण्ड के कई स्थानों पर प्रतिक्रिया हूई है, द्वाराहाट में उपपा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का पुतला जलाया।