सोमवार, 30 नवंबर 2015

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय घाट की आवासीय छात्राओं ने किया भरारीसैंण का दौरा


  राजकीय कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय घाट की आवासीय छात्राओं ने भरारीसैंण में बन रहे विधानसभा भवन व विधायक आवास को देखा। शैक्षिक भ्रमण पर आयी विद्यालय की कक्षा 6 से 8 तक की 50 छात्राओं ने ऐतिहासिक चांदपुर गढी, आदिबदरी धाम, लोहवागढी व भैरवगढी मन्दिर सहित राजधानी के लिए चर्चित स्थान गैरसैंण का भ्रमण किया।
   छात्राओं ने इसी माह गैरसैंण में विधानसभा स्थल पालिटेक्निक को भी देखा। शैक्षिक टीम ने श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम में रात्रि विश्राम किया। टीम के साथ आये प्रधानाचार्य सरला डिमरी, शिक्षिका चन्द्रप्रभा करासी, अनित्या देवी व विरेन्द्र सिंह ने कहा गैरसैंण राजधानी स्थल को देखने की छात्राओं में काफी जिज्ञासा थी। छात्रा संगीत राज ने कहा उन्हें शैक्षिक भ्रमण में अच्छा लगा और उन्होनें चांदपुर गढी, भरारीसैंण आदि देखकर काफी जानकारी प्राप्त की।
   ठस अवसर पर एसबीएमए प्लान परियोजना प्रबन्धक गिरीश डिमरी, नगर पंचायत अध्यक्ष गंगा सिंह पंवार व बच्चों के अभिभावक आदि उपस्थित थे।

राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में संविदा शिक्षकों को 8 माह से वेतन नहीं, गेस्ट टीचर भी तीन महिने से हैं परेशान


गैरसैंण, 30 नवम्बर, प्रदेश के सबसे बडे विभाग में अव्यवस्थायें इस कदर हावी हैं कि अल्प वेतन भेगी संविदा शिक्षक 8 महिने से विना वेतन गुजारा करने को मजबूर हैं। अभिनव शिक्षा का ड्रामा बन चुका राजीव गांधी नवोदय विद्यालय इसका उदाहरण है। वहां अप्रैल 15 से संविदा शिक्षकों को वेतन नही मिला है। जिससे उन्हें आर्थिक तंगी के साथ रोजमर्रा की दिक्कतों का सामना करना पड रहा है।
    राजीव गांधी नवोदय विद्याालय जो प्रत्येक जिला में अभिनव शिक्षा केन्द्र के रुप में विकसित होना था अपनी अव्रूवस्थाओं के कारण उपहा की वस्तु बन गया है और मेधावी बच्चों की प्रतिभा को हत्तोत्साहित करने का संस्थान भी। सन् 2009 में स्थापित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय का अपना स्टाफ, भूमि व भवन नहीं है । सब उधार पर चल रहा है। राजकीय इण्टर कालेज के भवन में बच्चों का आवास है तो राजकीय जूनियर हाई स्कूल में कक्षाऐं चलती हैं और राजकीय प्राथमिक विद्यालय में भोजनालय। एक किमी की दौड  बच्चों को पढाई, आवास और भोजन के लिए लगानी होती है।
   राजकीय इण्टर कालेजों से व्यवस्था पर नियुक्त प्रधानाचार्य व शिक्षकों के साथ संविदा कर्मी भी परेशान हैं।
    राजकीय इण्टर कालेज व राजकीय हाई स्कूलों में 89 दिन का सेवाकाल पूरा करने के बावजूद सरकार ने उन्हें वेतन नही दिया है। वही सर्व शिक्षा अभियान के विद्यालयों में कार्यरत  शिक्षकों को तीन माह वेतन नही मिला है।

क्षेत्र पंचायत समिति की त्रैमासिक बैठक में छाये बिजली, पानी व सडक के मुद्दे अधिकारियों के जवाब से संतुष्ट नही हुए सदस्य


गैरसैंण, 30 नवम्बर, क्षेत्र पंचायत समिति की त्रैमासिक बैठक में बिजली, पेयजल व मोटर मार्ग के मुद्दे छाये रहे। वही सदस्यों ने अधिकारियों के जवाब से संतुष्ट न होते हुए कहा- बैठक समय की बरवादी है।
   विद्युत विभाग पर हुई चर्चा में कुनीगाड में सुनीतादेवी की भैंस की तीन साल पहले विद्युत करंट से हुई मौत का मुवावजा न मिलने का मुद्दा ग्राम प्रधान बचनसिंह कैडा ने उठाया तो बंज्याणी के प्रधान रतनसिंह ने एस टी लाईन डेढ साल से ठप होने की जानकारी दी।   मैहलचैरी के क्षेत्र पंचायत सदस्य ध्यान सिंह ने मैहलचैरी खेल मैदान से 33 केवी लाइन शिफ्ट करने की मांग की। खाल, कुमखोडी, नैणी, कालीमाटी, रामडा मल्ला में लौ वोल्टेज का मामला उठाया।
   पिछले 3 साल से राप्रावि विद्यालयों में विद्युत संयोजन की धनराशि जमा होने के बावजूद संयोजन ना दिये जाने को उपखण्ड अधिकारी गुलशन ने आपदा  के कारण विद्युतिकरण ना होना बताया। लोक निर्माण विभाग की चर्चाओं में भाग लेते हुए ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष महावीर बिष्ट ने स्यूंणी मल्ली मोटर मार्ग की मांग रखी। अधिशासी अभियन्ता पीडब्ल्यूडी ने बताया कि 13 मोटर मार्ग आॅनलाइन हैं जबकि दो मोटरमार्गो पर टैंडर आमंत्रित हो चुके हैं। विश्व बैंक परियोजना पीएमजीएसआर वाई व एन एच के कोई अधिकारी बैठक में उपस्थित ना होने के कारण सदस्यों में खासा रोष था। क्षेत्र पंचायत सदस्य हरेन्द्र कण्डारी, ग्राम प्रधान चन्द्र सिंह व बैज्यन्ती देवी ने कहा अधिकारी न तो तैयारी के साथ आये हैं और कई अधिकारी उपस्थित ही नहीं हैं। जो सदस्यों के समय की बरबादी है। किसी तरह क्षेत्र प्रमुख सुमति बिष्ट व खण्ड विकास अधिकारी के सी जोशी ने सदस्यों को शान्त किया।
    पेयजल की चर्चा में भी अधिशासी अभियन्ता ने भी अधिकतर योजनाओं को केन्द्र सरकार की योजनाओं में फन्डिंग ना मिलने के कारण प्रभावित बताया। 12 गांव पेयजल योजना के 16 लाख रू के प्राक्कलन पर ग्राम प्रधान संगठन महामंत्री आनन्द कनवासी ने विभागीय अधिकारी पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा साढे बारह किमी लम्बी योजना का निर्माण मात्र 16 लाख रू में कैसे हो सकता है।
   स्वजल प्रतिनिधि ने बताया कि किसी गांव में शत प्रतिशत शौचालय बनने पर ही शेष राशि का भुगतान संभव होगा। खण्ड विकास अधिकारी ने बताया जिस गांव में 20 से कम शौचालय बनने हैं वहां मनरेगा से तथा 20 से अधिक शौचालय स्वजल बनायेगा।
   क्षेत्र प्रमुख सुमति बिष्ट की अध्यक्षता में खण्ड विकास अधिकारी के सी जोशी के संचालन में सम्पन्न बैठक में जेष्ठ उप प्रमुख करणसिंह, कनिष्ठ उप प्रमुख राकेश वर्मा, जिला पंचायत सदस्य हीरासिंह फनियाल, परियोजना निदेशक श्री पंवार, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा बी एस पाल सहित कई अधिकारी व जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।

रविवार, 29 नवंबर 2015

सर्व शिक्षा के अध्यापकों को तीन माह से नही मिला वेतन रा प्रा शिक्षक संघ ने जताया रोष


गैरसैंण, 29 नवम्बर
   प्राथमिक शिक्षक संघ शाखा संघ गैरसैंण द्वारा सर्वशिक्षा में कार्यरत अध्यापकों की एक आवश्यक बैठक बुलाई गई जिसमें सर्वशिक्षा के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को तीन माह से वेतन ना मिलने पर रोष व्यक्त किया तथा अपनी समस्याओं से अवगत कराया जिनमें कतिपय शिक्षकों के पाल्य उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत हैं सम्बन्धित शिक्षकों को समय पर वेतन ना मिलने के कारण यथासमय शुल्क भुगतान नहीं हो पाना तथा कई अन्य समस्याओं पर चर्चा की गई। संगठन ने अति शीघ्र वेतन न मिलने पर आन्दोलन की चेतावनी दी है।
   शिक्षक संघ पदाधिकारियों के अनुसार गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान एसएसए में कार्यरत अध्यापकों द्वारा शिक्षामंत्री से इस सम्बन्ध में विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। उन्होनें जिलास्तरीय शिक्षाधिकारियों की उपस्थिति में अतिशीघ्र निस्तारण करने का आश्वासन दिया लेकिन एक माह व्यतीत होने के बाद भी वेतन भुगतान की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
   इस अवसर पर प्राथमिक शिक्षक संघ अध्यक्ष जगदीप रावत, महामंत्री मोहन सिंह रावत, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ अध्यक्ष त्रिलोक सिंह खत्री, राजेन्द्र वर्मा, मनीष काला, विपिन ढौंडियाल, पुष्कर सिंह बिष्ट, मनवर सिंह रावत, नरेन्द्र रावत, कलम सिंह नेगी, टीकाराम पुरोहित, श्याम सिंह नेगी, महेन्द्र भण्डारी, शशीकला नेगी, तृप्ति बिष्ट आदि उपस्थित थे।

शनिवार, 28 नवंबर 2015

60वें जन्म दिन का अभिवादन


मित्रों! सादर प्रणाम। ईष्ट देवता की असीम कृपा और पितरों के आशीर्वाद से 60वें वर्ष में प्रवेश कर  रहा हूं। आज जीवन के 59 साल पूरे हुए। जीवन संगिनी लीला के साथ सब अपनों का सहयोग स्नेह और बडों के आशीर्वाद के आगे जीवन की बडी से बडी कामना छोटी नजर आती है। मित्रों, नाते-रिश्तेदारों और परिचित-अपरिचितों की स्नेहिल कृपा ने इन वर्षों को आसान बनाया। प्रभु! इन वर्षों में जो पाया- खोया सब आपकी कृपा।
          सादर अभिवादन, आप सबके स्नेह का आकांक्षी।
                                                पुरुषोत्तम असनोड़ा

सुयोग्य संस्कृति के अयोग्य प्रतिनिधियों का दौर है यह

               भारत को संहिष्णु और हाल के वर्षों में आई असहिष्णुता को लेकर देश दो धडों में बंटा दिखाई दे रहा है। एक पक्ष देश की संहिष्णुता को इस ठंग से पेस कर रहा है कि मानो वह कोई अहसान हो कि भारत में संहिष्णुता है और दूसरा पक्ष कुछ घटनाओं के आलोक में असहिष्णुता को रेखांकित कर अपनी चिन्ता सामने ला रहा है। सबसे पहले हमें भारत के स्वरुप को समझना चाहिए। भारत की ख्याति और उसकी परम्परा-सिद्धान्तों को समझना चाहिए। भारत बहुभाषी, बहुधर्मी, बहुजाजीय और संस्कृतियों का देश है। हजारों सालों के ज्ञात अज्ञात इतिहास कालक्रम ने उसकी बनावट को इतना ठोका-पीटा, सजाया-सवांरा, सुदृढ किया कि वह बहुभाषी, बहुधर्मी, बहुजातीय और संस्कृतियां उसकी विशेषता बन गयी।
            भगवान विष्णु के चरण कमल से शिव की जटाओं और हिमालय से पृथ्वी पर आने वाली गंगा हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग बन गयी, उसे कही कोई एतराज नही कि किस धर्म-जाति या संस्कृति का व्यक्ति उसका आचमन करता है किस खेत में सिंचाई करता है और वहां कौन सी फसल लहलहा रही है। सोहार्द के किसी वातावरण को गंगा-जमुनी तहजीब कहा जाता है।
          क्षिति, जल, पावक, गगन, समीर कहीं भी कोई भेदभाव नही करते और खून अपने लाल रंग में भी एक है। भारत विश्व का सबसे बडा लोकतंत्र है। लेकिन ये विशेषता उसे बहुत बाद में मिली, औपनिवेशिक सत्ता के विदा होने के बाद। उससे पहले हमारी नदियां, पहाड, हवा, वनस्पति यहां के वाशिंदे, उनकी संस्कृति और एकाकार हो सकने की क्षमता और घुल-मिल कर रहने की प्रवृति ये सब सहिष्णुता के कारक थे। हिमालय और गंगा इसलिए महान नही कि वह सबसे बडा पर्वत या नदी है बल्कि इसलिए कि उनके उपकार उनसे भी बडे हैं। इसलिए कोई सहिष्णुता को अहसान माने जो यह भारत की उद्दात परम्परा का अपमान है। हमें हमारे खून से संहिष्णुता मिली है। हवा, पानी, खाद से, उन फसलों से जिनका पोषण हमारी रगों में खून बनकर दौडता है, उन नदियों के नीर से जो बीतराग हैं।
       आज भारत की पहचान अनेकता में एकता का संगम है, धर्मनिरपेक्षतता और सबसे बडा लोकतंत्र का ताज है। लेकिन शुद्र स्वार्थ उस गंगा जमुनी तहजीब का कितना राग अलापें करते उल्टा हैं। राजनीति की रोटी इतनी विषैली हो गयी कि वह पोषण के बजाय मूल्य हंता हो गयी है। इसीलिए उस मुद्दे में पक्ष-विपक्ष नजर जो कही है ही नही, ऐसे झगडे उभाडे जा रहे हैं जो सचमुच चिन्ता पैदा करते हैं। देश पर जिस संकट की बात कही जाती है वह राजनीति की अपनी उपज है और सचमुच के संकटों से ध्यान बटाने की साजिश भी। या ऐ कहें हमारी सुयोग्य संस्कृति के अयोग्य प्रतिनिधियों के दौर में देश की सहिष्णुता सचमुच खतरे में है।  
                                                                                                                              पुरुषोत्तम असनोड़ा

शुक्रवार, 27 नवंबर 2015

दूधातोली में हुआ हिमपात, रिमझिम वर्षा ने बढाई ठंड


गैरसैंण, 27 नवम्बर, काफी समय बाद हुई वर्षा से जहां किसानों ने राहत महसूस की है वही दूधातोली में मौसम का पहला हिमपात हुआ है।
    प्रातः से ही छाये घने बादलों के कारण बढी ठंड दिन में रिमझिम वर्षा में बदल गयी और दूधातोली में मौसम का पहला हिमपात हुआ। दूधातोली नवम्बर से मार्च तक हिमाच्छादित रहने वाली पर्वत श्रंखला है और यही वर्फ दूधातोली से निकलने वाली 5 सदा नीरा नदियों का जल भण्डार संरक्षित करता है।
    वर्षा बहुत कम 2 मिमी हुई है लेकिन ठंड बढ गयी है।