गुरुवार, 14 जनवरी 2016

घुघुती त्यार संस्कृति के साथ आजादी और उत्तराखण्ड के ब्लू-प्रिंट का दिन है


   गैरसैंण
भगवान भुवन भास्कर सूर्य के उत्तरायण प्रवेश का दिन मकर संक्राति, उत्तरायनी और घुघुती त्यार है प्रकृति के बदते मौसम, रंग-रुप के बीच हम सम्पूर्ण जीव-जन्तु, वनस्पति, मानव और सृष्टि की अद्विती सौगात को सहजने-संवारने तथा मानव की उद्दात परम्पराओं और संस्कृतियों के संरक्षण के सहभागी है।
       घुघुती त्यार की ऋतु और मौसम से जुडी एक वैज्ञानिक धरातल पर ठोस परम्परा हैं।  उत्तराखण्ड का कोई शुभ-अशुभ कार्य गौ, स्वान, बलि और काक ग्रास के बिना सम्पन्न नहीं होता है। चूंकि पहाडों की हाड कंपा देने वाली ठंड से बचने के लिए पक्षी भी प्रवास पर चले जाते हैं, स्वाभाविक है कौऐ भी उत्तरायणी तक प्रवास में रहते हैं और कौ बाछी (कौ ग्रास) उत्तरायणी संग्रांत के दिन नहीं बल्कि बासी(संग्रांत के दूसरे दिन) दी जाती हैं।
 उत्तराखण्ड के लिए घुघुती त्यार का केवल ऋतु, मौसम, परम्परा या संस्कृति तक ही सिमित नहीं है। 14 जनवरी 1921 को बागेश्वर में सरयू में बहाये गये कुली-बेगार के वे रजिस्टर उत्तराखण्ड को गुलामी से आजाद कराने की मुहिम बन गयी। कुमाऊं केसरी बदरीदत्त पाण्डे के नेतृत्व में माघ महिने के 1 गते संबत 1978 बागेश्वर के उत्तरायण मेला में कुली-बेगार (अंग्रेज अधिकारियों जिनमें पटवारी भी शामिल था के आने पर ग्रामीणों द्वारा उनके भोजन, सुख-सुविधा और दूसरे गांव तक छोडने की पूरी व्यवस्था ग्रामीणों द्वारा निःशुल्क और अनिवार्य रुप से देने की व्यवस्था कुली-बेगार थी) न करने की शपथ आन्दोलनकारियों ने सरयू जल उठा कर ली थी और कुली बेगार के रजिस्टर सरयू में बहा दिए थे। कुली-बेगार से मुक्ति का यह आन्दोलन देश के स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा था। बागेश्वर के बाद गढ केसरी अनुसूया प्रसाद बहुगुणा के नेतृत्व में काकोडाखाल तब पौडी जिला और आज जिला चमोली में कुली-बेगार के रजिस्टर जलाये गये।
   अत्याचार से मुक्ति और स्वतंत्रता की सांस के लिए बलिदान हुए हमारे शहीदों को उत्तरायण के बढते सूर्य के साथ याद किया जाना चाहिए। आधुनिक उत्तराखण्ड के लिए भी 14 जनवरी का विशेष महत्व है। उत्तराखण्ड राज्य के लिए पहला और एक मात्र ब्लू प्रिंट उत्तराखण्ड क्रांति दल ने 14 जनवरी 1992 को बागेश्वर के उत्तरायणी मेला में जारी किया। अफसोस कि राज्य गठन के 14 सालों में उस ब्लू-पिं्रट की न कोई चर्चा होती है, कार्यवाही का तो सवाल ही नहीं। कुली-बेगार के नये रुप और नये थोकदार-सामंत, राजे-महाराजे हमारे विधाता बन गये हैं। उनसे मुक्ति और उत्तराखण्ड के जनपक्षता के लिए हमारे संघर्षों का दिन उत्तरायण बनना चाहिए।
      उत्तरायण के दिन उत्तराखण्ड मे विशेष रूप से कुमांऊं घुघुत बनाये जाते हैं बच्चे कौवों को काले कौवा आजा, घुघती माला खैजा कहकर बुलाते हैं। स्वाद और स्नेह से पगे घुघतो सौगात दी जाती है।
लीला देवी 51 वर्ष कहती हैं-घुघती त्यार को बहु-बेटियां मायके आती हैं और बच्चों के लिये घुघते की माला बनायी जाती हैं तथा घुघते से उनके लिये तरह तरह की आकृतियां बनायी जाती हैं।
ऐसे बनते हैं घुघुते
     घी, और गुड के पाक में गेहूं का आटा गुंदा जाता है और फिर भिन्न-भिन्न प्रकार की आकृति के घुघते बना कर तला जाता है।


बुधवार, 13 जनवरी 2016

आदिबदरी धाम का महाभिषेक मकर संक्रांति 15 जनवरी को मुख्यमंत्री होंगे मुख्य अतिथि,एक सप्ताह का शीतकालीन पर्यटन एवं सांस्कृतिक मेला होगा प्रारम्भ



गैरसैंण,
   , पंच बदरियों में पहले बदरी  श्री आदिबदरी धाम के कपाट 15 जनवरी मकर संक्रांति को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुलेंगे और भगवान आदिबदरीनाथ का पारम्परिक विधि विधान से महाभिषेक होगा। समारोह के मुख्य अतिथि मुख्य मंत्री हरीश रावत होंगे, वे प्रातः 11 बजे मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे।
 मंदिर का कपाटोद्घाटन, महाभिषेक कार्यक्रम, पूजा अर्चाना व पचाग पूजा का कार्यक्रम प्रातः 8 बजे से प्रारम्भ होगा।
 मुख्य अतिथि हरीश रावत व विशिष्ट अतिथि डा अनुसूयाप्रसाद मैखुरी रामलीला मैदान में शीतकालीन पर्यटन एवं सांस्कृतिक विकास मेला का उद्घाटन करेंगे। मंदिर समिति अध्यक्ष विजयेश नवानी और महासचिव कै गैणासिंह रावत ने बताया कि 21 जनवरी तक चलने वाले मेला में विभिन्न सांकृतिक व खेल प्रतियोगिता आयोजित होंगी जबकि मंदिर में साध्वी विचित्र रचना कथा वाचन करेंगी जिसकी पूर्णाहुति 21 जनवरी को होगी और उसी दिन सांस्कृतिक व खेल प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरण के साथ मेला सम्पन्न होगा। भगवान आदिबदरीधाम के कपाट पौष माह में बन्द रखने की परम्परा है।

शनिवार, 9 जनवरी 2016

अर्द्धकुंभ विशेषांक ‘संभावनाओं’ पर ‘अधूरी कवायदों’ का सच दिखाता रीजनल रिपोर्टर नए कलेवर में दिखेगा ‘सरोकारों से साक्षात्कार’ के साथ

           नूतन वर्ष 2016 के अपने पहले अंक में रीजनल रिपार्टर नये कलेवर एवं सरोकारों से साक्षात्कार के चिर परिचित तेवर के साथ है। संपादक पुरूषोत्तम असनोड़ा की संपादकीय ‘ये दावे हवा-हवाई’ में राज्य की अपार संभावनाओं के साथ लगातार होते खिलवाड़ की चर्चा हुई है। लीड स्टोरी दो हिस्सों में है। अर्द्धकुंभ विशेषांक पर केंद्रित इस अंक की लीड स्टोरी में हरिद्वार अर्द्धकुंभ के इतिहास तथा कई अन्य तथ्यों के साथ वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोक चंद्र भट्ट की स्टोरी ‘आस्था का पर्व अर्द्धकुंभ’ प्रस्तुत है, तो वरिष्ठ पत्रकार सुशील उपाध्याय की लेखनी ने ‘चुनौतियों का अर्द्धकुंभ’ में चुनौतियों पर फोकस किया है। लीड स्टोरी को आगे बढ़ाते हुए गंगा असनोड़ा थपलियाल ने ‘अधूरी कवायदों के देवप्रयाग’ शीर्षक के साथ उत्तराखंड में सिर्फ घोषणाएं करके उत्तराखंड के देवस्थानों को सिर्फ राजनैतिक हथियार बनाए जाने की ओर इशारा किया है। देवप्रयाग को केंद्र में रखकर इसे स्पष्ट करने की कोशिश इस अंक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
        लीड स्टोरी का ही हिस्सा बने ‘देवप्रयाग’ पर इस अंक में सबसे अधिक सामग्री शामिल की गई है। वरिष्ठ पत्रकार प्रभाकर जोशी ने ‘कुंभ क्षेत्र में शामिल हुआ देवप्रयाग’, राजेंद्र कुमार शर्मा ने ‘देवप्रयागः सुदर्शन क्षेत्र’, चर्चित इतिहासविद् डाॅ.शिव प्रसाद नैथानी ने ‘देवप्रयाग तीर्थ की पौराणिकता और इतिहास’, डाॅ.सुरेखा डंगवाल ने ‘देवप्रयागी समाजः संस्कृति और परंपराओं का वाहक’, युवा पत्रकार कपिल पंवार ने ‘सरकारी उदासीनता पर व्यक्तिगत प्रयास भारी’, जयप्रकाश पंवार ‘जेपी’ ने ‘देवप्रयाग के आस-पास’, बालकृष्ण बहुगुणा ने ‘राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान का 12वां परिसर देवप्रयाग में’, राजेश भट्ट ने ‘डेढ़ सौ वर्षों का इतिहास समेटे है संस्कृत महाविद्यालय’ आलेख लिखे हैं, जिसमें देवप्रयाग के इतिहास, भूगोल, पौराणिकता, प्रमुख ऐतिहासिक मंदिरों, उपलब्धियों समेत उन सभी संभावनाओं का जिक्र हुआ है, जिस पर राज्य बनने के 15 वर्षों में नजर जाती, तो देवप्रयाग का कायाकल्प हो सकता था। देवप्रयाग जैसे सैंकड़ों स्थान हैं, जिन पर सरकार की नजर नहीं पड़ती।
        स्थायी स्तंभ मंथन के तहत चर्चित स्तंभ लेखक डाॅ.भरत झुनझुनवाला का ‘कहां लुप्त हो गई ग्रोथ’, खबरों की खबर में एल मोहन का ‘बी.मोहन व स्व.जौनसारी को सम्मान’, राजेंद्र रावत ‘राजू’ की याद में व्याख्यानमाला, भाजपा में भविष्य तलाशते दिवाकर, सुरेंद्र भंडारी को स्व.चंद्रसिंह यायावर सम्मान, पंकज पांडेय का ‘नाजुक हालातों में कैसे सुधरेगा स्वास्थ्य’, श्रवण सेमवाल का ‘अब्दुल कलाम, तुम्हें सलाम’, शीना उपाध्याय का ‘यूनिवर्सिटी यूथ क्लब ने मनाया स्थापना दिवस’ शामिल हैं। नगरनामा में एल.मोहन कोठियाल ने ‘कालौडांडा से लैंसडौन’ में लैंसडौन नगर पर वृहद रूप से फोकस किया है। स्वास्थ्य परिचर्चा में डा.के.के.गुप्ता ‘जागरूकता से स्वस्थ रखें दांत’ कह रहें हैं, तो न्यू मीडिया गुरू जयप्रकाश पंवार ‘जेपी’ ‘न्यू मीडिया तकनीकी में आजमाएं हाथ’ का सुझाव दे रहे हैं। बाल मन की उड़ान में बाल कविता समेत राइका दूनागिरी के कक्षा छह के विद्यार्थियों द्वारा तैयार किया गया कोलाज, द हार्डलैंड पब्लिक स्कूल हल्द्वानी की छात्रा हर्षिता रौतेला तथा सेंट थेरेसास श्रीनगर की छात्रा मैत्री पैन्यूली की पेंटिंग भी शामिल हैं। चर्चित स्तंभकार और व्यंग्यकार उर्मिल कुमार थपलियाल ने ‘बकमबम’ स्तंभ के साथ अपने ही अंदाज में ‘सन् 15 को सलाम’ ठोका है, तो जानें अपने राज्य को में जीएस नेगी उत्तराखंड के बांधों की जानकारी दे रहे हैं। बांधों की जानकारी से जुड़ी श्रृंखला आगे भी रहेगी।
         संपादकीय सहयोगी विपिन बनियाल की रिपोर्ट ‘स्मार्ट सिटी की डर्टी पाॅलीटिक्स’ में स्मार्ट सिटी की राजनीति और चल रहे आंदोलन पर विस्तार से चर्चा है, तो अनूप नौटियाल के ‘सोलहवां सालः कुछ हरा हो जाए’ में सरकारी नीतियों के अभाव में इस राज्य के संसाधनों से होते खिलवाड़ को बता रहे हैं। पत्रकार सुधीर राठौर ने ‘शांत माहौल को अशांत करने की कोशिश’ में राईगड़सारी में हुई घटना पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की है, बिपिन सेमवाल ने ‘एवरेस्ट फतह को बढ़ेंगे अब नूतन के कदम’ में नूतन की सफलता पर रिपोर्ट दी है। संपादकीय सहयोगी सीताराम बहुगुणा ने ‘अजय पर विजय दिलाने का जिम्मा’ में अजय भट्ट को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर गंभीर राजनीतिक विश्लेषण किया है।
       इस अंक के अन्य प्रमुख आलेखों में शिक्षा व्यवस्था की प्रत्येक कमजोर तह तक पहुंचता प्रीतम अपच्छयांण का ‘उत्तराखंड में शिक्षा विभाग’ शामिल है, तो चर्चित कहानी लेखक बल्लभ डोभाल की कहानी ‘पलकों पर बसा गांव’ भी शामिल है। बीडी असनोड़ा का रोचक आलेख ‘बागेश्वर के गरूड़ से चलकर रियो डि जेनेरो में दौड़ेगा नितिन’ प्रेरणादायी है। सीताराम बहुगुणा ने फतेह सिंह रावत की पुस्तक ‘गीता गढ़वाली काव्य रूप मां’ की समीक्षा प्रस्तुत की है, तो गढ़वाली के मूर्धन्य लेखक नरेंद्र कठैत के खंडकाव्य ‘पाणि’ की कविता भी इस अंक में शामिल है-
     ‘भगीरथ जी!, हमुन् सूणी
      तुम स्वर्ग बिटि, गंगा लयां।।
      इंजीनैर से लेकी, ठ्यकदार तक
       सबि जगामा, तुमी रयान
Ganga Asnora Thapliyal

उपजिलाधिकारी के आश्वासन पर स्यूणी मल्ली के ग्रामीणों का अनशन समाप्त


   स्यूणी मल्ली में मोटर मार्ग की मांग को लेकर तीन दिन से चल रहा आमरण अनशन उपजिलाधिकारी से हुए समझौते के बाद समाप्त हो गया। आज दिन में उपजिलाधिकारी किशनसिंह नेगी स्यूणी मल्ली गये और आमरण अनशन पर बैठे लोगों से अनशन समाप्त करने की अपील की।
   उपजिलाधिकारी ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि 25 जनवरी तक उनके इच्छित स्थान से सर्वे हो जायेगा और निर्माण प्रक्रिया प्रारम्भ कर ली जायेगी।
   ग्रामीणों ने कहा- यदि 25 जनवरी तक आगरचट्टी से सर्वे प्रारम्भ नही हुआ तो तहसील का घेराव होगा। इस अवसर पर अनशनकारियों के अलावा संयोजक धीरजसिंह, ग्राम प्रधान लीलादेवी, उपप्रधान जसवन्तसिंह, क्षेत्र पंचायत सदस्य माहेश्वरी देवी, महिला मंगल दल अध्यक्ष लीलावती देवी पूर्व प्रधान देवसिंह व खीम सिंह, पुजारी अवतार सिंह सहित सभी ग्रामवासी उपस्थित थे।  

स्नेहा और एकता के आस्ट्रेलिया दौरे हेतु चयन से खुश हैं खेल प्रेमी


गैरसैंण,
      भiरतीय महिला क्रिकेट टीम के आस्ट्रेलिया दौरे के लिए उत्तराखण्ड की दो बरलिकाओं चयन क्रिकेट में उत्तराखण्ड की धमक को सावित कर रहा है बावजूद इसके कि उत्तराखण्ड राज्य निर्मााण के 15 साल बाद भी बीसीसीआई ने राज्य क्रिकेट ण्ेशोसिएशन नही गठित की है।
   मिताली राज की कप्तानी में एक दिवसीय व टी-20 के तीन-तीन मैच में चमोली की स्नेहा राणा व अल्मोडा की एकता बिष्ट का चयन आस्ट्रेलिया दौरे के लिए हुआ है। 26 जनवरी से 7 फरवरी तक होने वाली सिरीज में स्नेहा का चयन एकदिवसीय मैच के लिए तथा एकता का चयन टी-20 मैच के लिए हुआ है।
    स्नेहा की प्राथमिक शिक्षा गैरसैंण के बाल सदन में हुई है और प्रशिक्षण लिटिल मास्टर उकादमी देहरादून में। खेल पेमिों ने दोनों खिलाडियों के चयन पर प्रसन्नताव्यक्त करते हुए बधाई दी है। साथ ही बीसीसीआई से उत्तराखण्ड क्रिकेट एशोसिएशन के गठन में मान्यता शीघ्र देने की मांग की है।