शुक्रवार, 8 जनवरी 2016

उत्तराखण्ड की बागडोर उसकी परिकल्पना के जनकों को सौंपें, राज्य परिकल्पनाओं की ओर बढता दिखेगा


            हरिद्वार के पंचायत चुनाव में कांग्रेस भाजपा का पिछडना किसी भी रुप में आश्चर्यजनक नही है 47 सदस्यीय जिला पंचायत में सबसे अधिक 17 निर्दलीय  चुनकर आये हैं जबकि बसपा 16 सबसे बडी पार्टी है, कांग्रेस 11 व भाजपा कुल 3 पर सिमट गयी है। हरिद्वार के पंचायत चुनाव का महत्व इसलिए भी है कि वहां से सर्वाधिक 11 विधायक विधान सभा में आते हैं और वर्तमान में भाजपा के 5, कांग्रेस के 4 व बसपा के 2 विधायक विधान सभा में हैं। यदि जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की चर्चा करें तो निर्दलियों के दम पर प्रदेश सरकार मेें काविज कांग्रेस का अध्यक्ष बनना तय माना जा सकता है।
             यह कितनी बडी विडम्बना है कि राज्य गठन के 15 साल बाद भी उत्तराखण्ड के 12 अन्य जनपदों के साथ हम हरिद्वार का चुनाव नही करा पाये हैं और उसके पंचायत चुनाव उ प्र के समयावधि में हो रहे हैं। हरिद्वार को उत्तराखण्ड के अन्य जिलों के साथ पंचायत चुनाव न कराना राज्य में दोहरी व्यवस्था सरीखा है। विडम्बना तो यह है कि जिन जिलों को उत्तराखण्ड राज्य की कोई दरकार थी ही नही वहां अब आवादी का सवाल उठ रहा है और हमारे सांसदों की सारस्वत चुप्पी के चलते उत्तराखण्ड के पहाडी जिले 85 प्रतिशत  भू-भाग के बावजूद जनसंख्या के परिसीमन में  6 विधान सभा सीटें गवां बैठे। हमारे सांसदों को संसद में वस्तु स्थिति रखनी चाहिए थी जिससे परिसीमन में क्षेत्रफल भी मानक होता।
             गढवाल संसदीय क्षेत्र 5 जिलों पीरुमदारा से नीती-माण और मुनि की रेती तक फैला है और अल्मोडा 4 जिलों मोहान से धारचूला मुनस्यारी तक, जब चुनाव प्रचार के लिए कोई प्रत्याशी मतदाता की चैखट नही देखता तो जीतने के बाद का बादशाह क्या खाक मतदाता का ख्याल रखेगा। दुभाग्य ये भी है कि वे लोग राष्ट्रीय पार्टियों कांग्रेस व भाजपा के बडे नेता हो गये हैं जिनका उत्तराखण्ड राज्य अवधारणा से कोई लेना-देना था ही नही उल्टे वे राज्य के विरोध में थे लेकिन वही लोग आज गैरसैंण राजधानी के सवाल जल भुन रहे हैं।
           15 सालों में उत्तराखण्ड को नौकरशाही ने बहुत बूरी तरह तहस-नहस किया है और उसमें नालायक राजनेताओं की पूरी-पूरी भागीदारी है। उत्तराखण्ड का अपना पंचायत कानून नही बना। हम हम रोजगार और शिक्षा की नीति नही बना पाये। लोकपाल और स्थान्तरण कानून पर पांव इसलिए पीछे खींचे कि उसका श्रेय पूर्ववर्ती सरकार को न जाय। कभी ऊर्जा, कभी पर्यटन  कभी जैविक और भी न जाने क्या बकवास हमारे नेता करते रहे और नौकरशाह उन्हें नचाते रहे, प्रदेश और जनता बरबाद होती रही , गांव खाली हो गये, नेता भी पलायन करने लगे।
           पहाडों के गांव केवल गांव नही हैं वे देश की सरहद के रखवाले है, वे गंगा-जमुना, काली, सरयू और रामगंगा के जल के रक्षक और उससे स्वयं रक्षित हैं। वे हिमालय और हिमालय की छाती के जंगलों को पीढियों से पाल पोस और विकसित कर रहे हैं। फिर भी उनपर गुर्राने का अधिाकार हरभजन चीमा रखते हैं, इंदिरा हृदयेश उनकी भाग्य विधाता है और उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन की काट उधमसिंह नगर बचाओ के नेता हैं। अनंतकुमार सिेह व बुआसिंह को प्रोन्नति देने वाले दल और उनके सारथी-महारथी हैं, और हैं मुज्फ्फरनगर के रामपुर तिराहे के लुटेरे-हत्यारे हैं। किन-किन को कहे हमने सत्ता ही लाश पर उत्तराखण्ड बनाने वालों को सौंप दी।
         उत्तराखण्ड की एक बडी विडम्बना यह भी है कि हर कोई उत्तराखण्ड का विशेषज्ञ है और महाज्ञाता है, उससे अधिक दूसरे को कुछ नही आता अथवा वह विरोधी है। क्या भाग्य लेकर आये उत्तराखण्ड? जहां विकल्प नही है। सांपनाथ और नागनाथ के बीच का चुनाव है। विकल्प हम चुनने को तैयार हैं नही। हमारे लिए शमशेरसिंह बिष्ट आदर्श हो सकते हैं, शेखर पाठक उत्तराखण्ड के विद्वान हो सकते हैं, त्रेपनसिेह चैहान और चेतना आन्दोलन के कार्यों की प्रशंसा हो सकती, पी सी तिवारी और उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के संघर्षों की चर्चा हो सकती है, उत्तराखण्ड क्रांति दल काशीसिंह ऐरी, त्रिवेन्दं पंवार या दिवाकर भट्ट को पानी पी-पी कर कोसा जा सकता है लेकिन राज्य प्राप्ति के उनके संघर्ष की अनदेखी होती है। उन्हें नेता नही मान सकते, सत्ता नही सौंप सकते।
         सन् 1974 में यह कितनी बडी परिकल्पना रही होगी जब उत्तराखण्ड के चार युवाओं ने अस्कोट-आराकोट(उत्तराखण्ड के पूर्व से पश्चिम) की पद यात्रा का निणर््य लेकर गढवाल कुमांऊ के स्थपित भ्रमों को दूर किया था और दिया था उत्तराखण्ड का कांसेप्ट। तब ऐसे थिंकर के हाथ हमें उत्तराखण्ड की बागडोर सौंपने में परहेज क्यों होता है? हमारे सोच में कहीं न कहीं उत्तराखण्ड को, उसके दीर्घकालिक हितों को समझने की कमी रही है और ये कमी जिस दिन पूरी होगी उत्तराखण्ड अपनी परिकल्पनाओं की ओ बढता दिखेगा।        

गुरुवार, 7 जनवरी 2016

स्यूणी मल्ली में मोटर मार्ग की मांग पर अनशन दूसरे दिन भी जारी, कोई सरकारी कर्मी नही गया आन्दोलनकारियों की सुध लेने




गैरसैंण,
            स्यूणी मल्ली में मोटर मार्ग की मांग को लेकर ग्राम वासियों का अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। हीरादेवी 50 वर्ष भी आमरण अनशन में बैठ गयी हैं। सातों आमरण अनशनकारियों ने कहा- मोटर मार्ग का निर्माण नही हुआ तो वे आमरण अनशन से नही उठेंगे। सडक की मांग अब जीवन-मृत्यु का प्रश्न हो गयी है।
  स्यूणी मल्ली का पंचायत भवन आन्दोलन के नारों से गूंज रहा है और गांव के लोगों में मोटर मार्ग के लिए अनशन पर बैठने की होड सी लगी है।
                खंकरा देवता जो गांव सहित एक बडे क्षेत्र के ईष्ट के रुप में पूजे जाते हैं के पुजारी अवतारसिंह ने कहा- आजादी के इतने साल बाद भी हम सडक के लिए परेशान हैं। ग्रामवासी एक स्वर में कहते हैं यदि सडक नही तो वोट नही और वे चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
           स्ंायोजक धीरजसिंह कहते हैं लडाई को प्रशासन कमजोर समझ रहा है। हम गांव में अनशन में इसलिए बैठे हैं कि मरेंगे गांव में जियेगे गांव में। सडक की लडाई अब जीवन-मरण की लडाई है।
              गैरसैंण -रानीखेत राष्ट्रीय राजमार्ग के आगरचट्टी ये सीधी चढाई पर 4 किमी दूर स्यूणी मल्ली प्राकृतिक सौदर्य का धनी जंगल के बीच बसा है। सन् 2002 में में वहां के लिए मोटर मार्ग स्चीकृत हुआ जो आज तक नही बना। ग्राम वासियों को बरगलाने के लिए कई सर्वे हुए लेकिन नतीजा सिफर रहा। गांमवासी बार-बार चिल्लाये और प्रशासनिक  व पी डब्लू डी अधिकारी उन्हें आश्वासन की घुट्टी पिला शान्त कर दें।
          गांव की नई पीढी को सरकार व प्रशासन की बात कचोटती है। उन्होंने 21 दिसम्बर को गैरसैंण में बडा प्रदर्शन किया और तहसील में धरने पर बैठ गये, फिर आश्वासन मिला 5 जनवरी से पहले काम प्रसरम्ीा हो जायेगा। लेकिन नही हुआ और कल 6 जनवरी को सारे गांववासी पुरुष, महिलायें, युवा, छात्र, बडे, बृद्ध बडी संख्या में गैरसैंण पहुंचे और झूइे आश्वासन देने वाले प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक योजना के अधिकारियों का पुतला फूंका और गांव लौट कर 7 लोग आमरण अनशन पर बैठ गये जिनमें 60 वर्षीय उततराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी बसन्तीदेवी भी हैं। वे सन् 1996 में उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन में गैरसै।ण में आमरण अनशन कर चुकी हैं।
          सरकार द्वारा ग्रामवासियों की मांग पर ध्यान न देने से उनमें आक्रोश है। पूर्व प्रमुख और भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुरेद्रसिंह नेगी ने कहा- सरकार व प्रशासन को स्यूणी मल्ली में मोटर मार्ग का कार्य तुरन्त प्रारम्भ करना चाहिए। उन्होंने आन्दोलन को हर संभव सहयोग देने का भी आश्वासन दिया है।  


बुधवार, 6 जनवरी 2016

स्यूणी मल्ली में मोटर मार्ग की मांग पर तहसील मुख्याालय पर प्रदर्शन पीएमजीएसवाई अधिकारियों का फूंका पुतला राज्य अन्दोलनकारी सहित 7 ग्रामवासी बैठे आमरण अनशन पर



गैरसैं nस्रूूणी मल्ली में मोटर मार्ग की मांग को लेकर ग्रामवासियों ने तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना के अधिकारियों का पुतला फूंका। 
 तहसील मुख्यालय से 15 किमी दूर से आये स्यूणी मल्ली के ग्रामवासियों ने मोटर मार्ग का निर्माण कार्य पारम्भ न होने की स्थिति में 6 जनवरी से आमरण अनशन व प्रदर्शन के निर्णय के अनुरुप  तहसील मुख्यालय पर बडा प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी मोटर मार्ग की मांग करते हुए  चैराहे से वीर चन्द्रसिंह गढवाली मार्ग होते हुए तहसील मुख्यालय गये।
  आन्दोलन संयोजक धीेरजसिंह व उप प्रधान जसवन्तसिंह ने प्रधान मंत्री ग्राम सडक योजना के अधिषासी अभियंता पर ग्रामवासियों को बरगलाने का आरोप लगाते हुए कहा- 21 दिसम्बर को हुए धरना प्रदर्शन में पीएमजीएसवाई अधिकारियों ने 5 जनवरी से पहले मोटर मार्ग के सर्वे का आश्वासन दिया था।लेकिन वे लोग धरगैड से मोटर मार्ग निर्माण का सर्वे करना चाहते हैं जबकि धरगैड के लोगों ने एतराज जताया है।
   ग्रामवायिों ने उपजिलाधिकारी को आमरण अनशन के निर्णय की जानकारी देते हुए कहा- मोटर मार्गं कार्य प्रारम्भ न होने तक अनशन जारी रहेगा। तहसील मुख्यालय से नारेबाजी करते प्रदर्शनकारियों ने चैराहे पर पीएमजीउसवाई अधिकारियों का पुतला फूंक दिया।
 प्रदर्शन का नेतृत्व ग्राम प्रधान लीला देवी, उप प्रधान जसवन्तसिंह, पंयोजक धरजसिंह, क्षमादेवी,पदमसिंह, अवतारसिंह, ममंद अध्यक्ष लीलावती, पूर्व अध्यक्षकुसमादेवी, धनसिंह, चन्द्रमोहनसिंह, कमलादवी, सुनीतादेवी, जीतसिंह, जयसिंह आदि कर रहे थे।

प्रदर्शन के बाद स्यूणी मल्ली में आमरण अनशन शुरु
 मोटर मार्ग की मांग की मांग पर तहसील मुख्यालय में प्रदर्शन के बाद के स्यूणी मल्ली के 7 आन्दोलनकारी गांव में ही आमरण अनशन पर बैठ गये हैं। उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी बसन्ती देवी(60 वर्ष), धनसिंह(56वर्ष), क्षमादेवी(55वर्ष), अवतारसिंह(45वष्र),   
जसवन्तसिंह(26वर्ष), ध्यानसिंह(31वर्ष) व कलमसिंह(30वर्ष) आमरण अनशन पर बैठ गये हैं
   पूर्व प्रधान देवसिंह बिष्ट ने आन्दोलनकारियों को संबाधित करते हुए कहा- सरकार ने सन् 2002 में स्वीकृत सडक का निर्माण न कर जनता के साथ धोखा किया है और अब ग्रामवासी सडक लेकर ही रहेंगे।
  उपजिलाधिकारी केएस नेगी ने ग्रामवासियों के अनशन में बैठने की पुष्टि करते हुए कहा- कलया परसों पीएमजीएसवाई के अधिकारी धरगैड के गामीणों से वार्ता करेंगे और आन्दोलनकारियों को सडक निर्माण से आश्वस्त करायेंगे। उन्होंने कहा- आगरचट्टी से मोटर मार्ग में 6-7 बैण्ड आ रहे हैं जिनका मलवा राष्ट्रीय राजमार्ग को बाधित करेगा अज्ञैर किसी नई सडक के प्रस्ताव को कोर नैटवर्क से जोडने में ही एक से डेढ साल का समय लगता है।
उन्होंने कहा- ग्रामवासियों की समस्या का समाधान निकाल लिया जायेगा। 


मंगलवार, 5 जनवरी 2016

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुए बहु-उद्देशीय शिविर में 52 शिकायतें दर्ज, पी पी पी मोड के विरुद्ध भडका गुस्सा, स्वैप व स्वजल के विरुद्ध लोगों में नाराजगी

 गैरसैंण, 
   जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में हुए बहु-उद्देशीय शिविर में पेयजल, सडक, स्कूल भवन, बीपीएल कार्ड आदि से सम्बन्धित 52 शिकायतें दर्ज हुई।
 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के पी पी पी मोड को लेकर जन प्रतिनिधियों ने खासा आक्रोश जताया और जिलाधिकारी ने अनियमितताओं की जांच मुख्य चिकित्साधिकारी को सौंप दी।
  सलियाणा बैण्ड में काश्तकारों की अपर निदेशालय के क्रय की गयी काश्तकारों की भूमि में शिक्षा निदेशालय न बनने पर प्रतिनिधियों ने रोष जताया तो मुख्य शिक्षा अधिकारी हरीश चन्द्र सिंह रावत ने वहां राजीव गांधी नवोदय विद्यालय बनाने के प्रस्ताव की जानकारी दी और कहा- विद्यालय भवन का 22 करोड का आगणन विभाग को भेजा गया है।
  सभासद दिगम्बर सिंह रावत ने सलियाणा वार्ड में डीपीआर के अनुरुप 27 स्टैण्ड पोस्ट के बजाय मात्र 11 स्टैण्ड पोस्ट बनाये जाने को अनियमितता बताते हुए जांच की मांग की।   शिशुओं के जीवन रक्षक टीकें उपलब्ध ना होने पर जनप्रतिनिधियों ने रोष व्यक्त किया व जल्द टीके उपलब्घ कराने की मांग की।
  स्वजल द्वारा शौचालयों के निर्माण में आनलाइन लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि न मिलने पर एतराज जताया। शिविर में सी ई ओ, महाप्रबन्धक जिला उद्योग केन्द, सी एम ओ, प्रभारी स्वजल आदि अधिकारियों अपने विभागों की योजनाओं की जानकारी दी।
  इस अवसर पर उपजिलाधिकारी के एस नेगी, नगर पंचायत अध्यक्ष गंगा सिंह पंवार, पूर्व प्रमुख सुरेन्द्र सिंह नेगी, ग्राम प्रधान संगठन अध्यक्ष महावीर सिंह बिष्ट, कोषाध्यक्ष विरेन्द्र वर्मा, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य पुष्कर सिंह रावत, जिला पंचायत सदस्य हीरा सिंह फनियाल, मोहम्मद जान, डाॅ अवतार सिंह नेगी सहित कई जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय समस्यायें शिविर में रखी। 
    इस अवसर पर विद्युत, स्वास्थ्य चिकित्सा, जन सूचना, क्षेत्र विकास कार्यालय, शिक्षा विभाग, जल संस्थान आदि द्वारा समस्याओं के निराकरण के लिए स्टाल लगायें गये थे।


सोमवार, 4 जनवरी 2016

उत्तराखण्ड सडकों की हालत खस्ता, केवल कर्ज में डुबाने में व्यस्त है ऐंन्सियां, चैखुटिया- मासी मार्ग सबसे बदहाल

         
         उत्तराखण्ड में सडकों की हालत बहुत खस्ताहाल है लगता है विश्व बैंक और एशिया बैंक का ऋण पीढियों तक चुकाने की कीमत पर उत्तराखण्ड में लूट मची हुई है। रविवार को निजी संवेदना  व्यक्त करने हेतु मानिला अल्मोडा जाना हुआ। गैरसैंण से चैखुटिया का राष्ट्रीय राजमार्ग हो या चैखुटिया-मासी प्रान्तीय मार्ग, मासी - जैनल अथ्वा जैनल-मानिला  मोटर मार्ग सब जगह ठेकेदारों की मनमानी है  स्भी स्थानों पर लोकल रेत, रोडी और पत्थर लग रहे हैं, ऐसी जगहों पर रिटर्निंग वाॅल या कलमठ बन रहे हैं जिन्हें सामान्य जन भी कहेगा कि इसकी आवश्यकता क्या है?
     चैखुटिया और मासी के बीच 13 किमी मार्ग तो मानो यात्रियों, स्थानीय जनता, चालकों और वाहन स्वामियों के लिए किसी सजा से कम नही है। ये सडक विभाग,  नेता और ठेकेदारों के लिए कामधेनु से कम नहीं हैं। पिछले 40 सालों से हम इस मोटर मार्ग को देख रहे हैं और कभी भी उसकी हालत अच्छी नही रही है। 13 किमी का सफर तय करने में एक घंटा लग रहा है। वाह रे विभाग और उसकी निर्माण ऐजेन्सी।
        मासी और केदार के बीच काम कर रही ऐजेन्सी के पत्थर खुदान, टैक्टर में भरने और उतारने के बीच कोई वाहन आये तो उसकी बला से वह तो तब रास्ता देगा जब उसका टैक्टर भरेगा, खाली होगा और मजदूर सडक से पत्थर हटायेंगे।
     लोकल पत्थर, लोकल बजरी, लोकल रोडी फिर भी ढुलान गौला और कोसी का, लूट मची है। कई जगहों पर सडक के उपर इसलिए जेबीसी से खुदान हुआ कि पत्थर निकालने हैं। मलवा वही पडा है। लगता नही कोई व्यवस्था है, लगता नही वहां कोई प्रशासन है और लगता नही कि कोई प्रतिनिधि है।
       उत्तराखण्ड के पास संसाधन नही हैं। कर्ज से काम चल रहा है, सरकार और नेतागिरी भी। भावी पीढी को नेता, अफसर और ठेकेदारों की लूट से कर्ज के बोझ में दबाना कितना जायज है? ये दुरुपयोग है, निर्माण कम्पनियां भी शायद उत्तराखण्ड की नही हैं, उस लूट में सरकार और मंत्रियों का कितना हिस्सा है कह नहीं सकते और समय आने पर शायद साफ भी हो लेकिन तय है कि उत्तराखण्ड के हालात किसी भी स्थिति में अच्छे नही हैं।


शनिवार, 2 जनवरी 2016

ग्राम प्रधान संगठन ने निकाला जूलूस, राज्य वित्त को ग्राम पंचायतों को देने की मांग


गैरसैंण,
   ग्राम प्रधान संगठन ने राज्य वित्त व्यय को क्षेत्र पंवायत व जिला पंचायत में दिये जाने का विरोध करते हुए जूलूस निकाला और ब्लाक कार्यालय बन्द कराया। मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में ग्राम प्रधान संगठन ने कहा पंचायतों की पहली सीढी की सरकार उपेक्षा कर रही है जिसके गम्भीर परिणाम होंगे। पंचायततीराज कानून के अनुसार त्रिस्तरीय पंचायत में ग्राम पंचायत को बहुत अधिकार दिए गये हैं । संविधान संशोधन 73, 74 पंचायत और नगर निकायों को लोकतंत्र की प्राथमिक इकाई के रुप में 29 विभागों का दायित्व सोंपने की व्यवस्था करता है लेकिन उत्तराखण्ड में यह बयार उल्टी बह रही है। राज्य के गठन के 15 सालों में उसका अपना पंचायतराज कानून नही है और उप्र ग्राम पंचायत और क्षेत्र समिति विधेयक व नियमावली से अब तक काम चलाया जा रहा है।
उत्तराखण्ड की कोई भी क्षेत्र पंचायत बैठक अधिकारियों के न पहुंचने पर हंगामे के बिना पूरी नही होती, इसका कारण अधिकारियों की उपस्थिति की पुख्ता व्यवस्था न होना है। उप्र ग्राम सभा व क्षेत्र समिति विधेयक में जिलास्तरीय अधिकारियों को सलाह हेतु आमंत्रण तक सीमित है। 29 विभाग को पंचायतों को सोंपने में न केवल नौकर शाही बल्कि विधायिका भी आडे आ रही है। दाता की स्थिति को अपना विषेशाधिकार मानने वाली विधायिका उन सारे विभागों का नियंत्रण का मोह नही छोड रही है। ग्राम प्रधान संगठन भी समग्र मांगों को लेकर टुकडों में आन्दोलन करते दिखते हैं और ये आन्दोलन लबी रणनीति का हिस्सा न होकर तदर्थ हितो ंपर अधिक केद्रित हो रहे हैं।
   आज ग्राम प्रधान संगठन का आन्दोलन जो राज्य वित्त को ग्राम पंचायतों को देने की मांग कर रहा था, ब्लाक कार्यालय से प्रारम्भ जूलूस नारेबाजी के साथ बाजार चैराहा तहसील पंहुचा जहां उपजिलाधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रधान संघ के अध्यक्ष महावीर सिंह बिष्ट, कोषाध्यक्ष विरेन्द्र वर्मा, सोबन सिंह, चन्द्र सिंह, चन्द्रा देवी, कमला देवी, कुंवर सिंह आदि आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे थे।

शुक्रवार, 1 जनवरी 2016

शाबास निम शाबास आर डी एफ शाबास जवानो जो माइनस तापमान में भी केदारनाथ निर्माण में जुटे हैं

                मुख्यमंत्री हरीश रावत नव वर्ष के पहले दिन केदारनाथ धाम पहॅुचें। जहां उन्होंने निम की टीम, पुलिस एवं एसडीआरएफ के जवानों को नव वर्ष की शुभकानाएं देते हुए गरम टोपी, इनर एवं मिष्ठान वितरण किया। 
मुख्यमंत्री श्री रावत ने इस दौरान केदारनाथ में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यो का जायजा लिया और पुननिर्माण कार्यो पर संतोष प्रकट किया। उन्होंने मंदिर में मत्था टेका और राज्य की सुख समृद्धि एवं विकास की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि सभी को गर्व है कि केदारनाथ में विषम परिस्थितियों एवं माइनस डिग्री तापमान में भी हमारे लोग पुनर्निमाण कार्य पर लगे हुए हैै। निम द्वारा मुख्यमंत्री श्री रावत का ढोल दमाऊ के साथ स्वागत किया गया और आयोजित रासौ नृत्य में मुख्यमंत्री भी शामिल हुए। 
        इस अवसर पर मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमत्री श्री रावत ने कहा कि मकर संक्रांति से देहरादून से केदारनाथ के लिये 50 प्रतिशत छूट पर हैली सेवा की शुरू की जायेगी, ताकि भक्तजन केदारनाथ में बर्फ से आच्छादित केदारनाथ धाम के दर्शन एवं प्रकृति का आनंद ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि तीर्थ पुरोहितों को प्रति परिवार 1 लाख रूपये का मुआवजा, छूटे हुए 923 मजदूरों को 10-10 हजार रूपये एवं एलएनटी से प्रभावित 493 परिवारों को शीघ्र मुआवजा वितरण किया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री रावत ने केदार महोत्सव आयोजन को लेकर कहा कि जनवरी या फरवरी माह में अधिक बर्फवारी के अवसर पर ही केदार महोत्सव का आयोजन किया जायेगा। उन्होंने इसके लिये निम के प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल को तिथि एवं कार्यक्रम तैयार करने को कहा गया है। 
      मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि केदारनाथ में पुनर्निमाण के कार्य चल रहे हैं, अगली केदारनाथ यात्रा अच्छे स्वरूप में देखने को मिलेगी। अगली यात्रा के दौरान केदारनाथ में लगभग एक हजार यात्रियों के रूकने की व्यवस्था हो जायेगी तथा आगामी यात्रा तक स्नान घाट निर्माण का कार्य भी पूरा कर लिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने केदारनाथ भ्रमण के दौरान पुनर्निमाण कार्यो का जायजा लिया। वहीं उन्होंने निम के प्रधानाचार्य कर्नल कोठियाल एवं जिलाधिकारी डाॅ राघव लंगर के साथ केदारनाथ पुनर्निमाण कार्यो की समीक्षा भी की। 
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राकेश शर्मा, सचिव अमित नेगी, विनोद शर्मा, जिलाधिकारी डाॅ राघव लंगर, पुलिस अधीक्षक पीएन मीणा सहित निम की टीम एवं पुलिस व एसडीआरएफ के जवान उपस्थित थे।